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छह साल बिछुड़ी बच्ची को परिजनों से मिलाया
Dehradun
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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देहरादून। ट्रेन में सफर के दौरान छह बरस पहले सुनीता जब परिजनों से बिछुड़ गई थी तब उसकी उम्र 11 साल की थी। किस्मत अच्छी थी कि देहरादून के महिला बाल उत्थान एवम कलामंच के महिला आश्रम में पहुंच गई। तबसे परिवार वालों से संपर्क नहीं हो पाया था। इसी साल जून में शुरू की गई चाइल्ड हेल्पलाइन ने सुनीता को उसके परिवार से मिला दिया। इस दौरान 17 साल की सुनीता ने दसवीं की पढ़ाई भी पूरी कर ली है। उससे मिलने के बाद परिवार फूले नहीं समा रहा है। सभी चाइल्ड लाइन की तारीफ में कसीदे पढ़ रहे हैं।
कैसे संपर्क हुआ परिवार से
चाइल्ड हेल्पलाइन समन्वयक द्वारिका प्रसाद नौनी बताते हैं कि पिछले सप्ताह महिला बाल उत्थान एवम कलामंच दून की संचालिका सुनीता जोशी ने अपने महिला आश्रम में रह रही सुनीता किशोरी की कहानी सुनाई। सुनीता से मिली जानकारी के आधार पर उसके घर वालों से हेल्पलाइन की छत्तीसगढ़ की इकाई ने उससे माता-पिता को ढूंढ निकाला। इतने साल बाद बेटी की खोजखबर मिलने के बाद बिलासपुर के जसपुर इलाके में रहने वाले सुनीता के पिता कुतारे भगत की तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसका भतीजा रामप्रसाद देहरादून में ही काम करता है। बाल कल्याण समिति देहरादून की सदस्य डॉ. प्रतिभा शर्मा ने पूरी पड़ताल के बाद उसे चचेरे भाई के साथ जसपुर में माता-पिता के पास जाने की इजाजत दे दी। सुनीता के सकुशल घर पहुंचने की पुष्टि हो गई है।
अब तक 250 बच्चों की मदद
चाइल्ड हेल्प लाइन केंद्र सरकार के महिला एवम बाल विकास मंत्रालय के सौजन्य से काम करती है। देहरादून में पर्वतीय बाल मंच इसका संचालन कर रहा है। 18 साल तक की उम्र के किसी बच्चे के लावारिस मिलने, अपराध घटित होने, घर से भाग कर आ जाने, बाल श्रम आदि के मामलों में हेल्पलाइन मददगार साबित होती है। अब तक 250 बच्चों की मदद की जा चुकी है।
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चाइल्ड हेल्प लाइन का टोलफ्री नंबर 1098
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कैसे संपर्क हुआ परिवार से
चाइल्ड हेल्पलाइन समन्वयक द्वारिका प्रसाद नौनी बताते हैं कि पिछले सप्ताह महिला बाल उत्थान एवम कलामंच दून की संचालिका सुनीता जोशी ने अपने महिला आश्रम में रह रही सुनीता किशोरी की कहानी सुनाई। सुनीता से मिली जानकारी के आधार पर उसके घर वालों से हेल्पलाइन की छत्तीसगढ़ की इकाई ने उससे माता-पिता को ढूंढ निकाला। इतने साल बाद बेटी की खोजखबर मिलने के बाद बिलासपुर के जसपुर इलाके में रहने वाले सुनीता के पिता कुतारे भगत की तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसका भतीजा रामप्रसाद देहरादून में ही काम करता है। बाल कल्याण समिति देहरादून की सदस्य डॉ. प्रतिभा शर्मा ने पूरी पड़ताल के बाद उसे चचेरे भाई के साथ जसपुर में माता-पिता के पास जाने की इजाजत दे दी। सुनीता के सकुशल घर पहुंचने की पुष्टि हो गई है।
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अब तक 250 बच्चों की मदद
चाइल्ड हेल्प लाइन केंद्र सरकार के महिला एवम बाल विकास मंत्रालय के सौजन्य से काम करती है। देहरादून में पर्वतीय बाल मंच इसका संचालन कर रहा है। 18 साल तक की उम्र के किसी बच्चे के लावारिस मिलने, अपराध घटित होने, घर से भाग कर आ जाने, बाल श्रम आदि के मामलों में हेल्पलाइन मददगार साबित होती है। अब तक 250 बच्चों की मदद की जा चुकी है।
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