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लोगों को खूब भाए ग्रामीणों के उत्पाद
Dehradun
Updated Mon, 12 Nov 2012 12:00 PM IST
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देहरादून। सरस मेले में राज्यभर से जुटे ग्रामीणों के उत्पादों को लोगों ने खूब पसंद किया। पहाड़ी दाल-सब्जियां, जूस आदि की काफी खरीदारी हुई। रविवार को मेले के समापन के साथ ही इस बार का टर्नओवर करीब एक करोड़ सत्तर लाख रुपये रहा। जो पिछली बार एक करोड़ के आसपास था।
परेड ग्राउंड में आयोजित सरस मेले में उत्तराखंड से करीब डेढ़ सौ स्टॉल थे। मेले की खासियत यह थी कि खेती-किसानी करने वाले लोग खुद यहां जुटे थे और आमदनी सीधे उन्हीं के हाथों में आई। मेले में जैविक उत्पाद लोगों की पहली पसंद रहे। मेले के अंतिम दिन उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्वयं सहायता समूहों को सचिव ग्राम्य विकास विनोद फोनिया ने पुरस्कृत किया। इस मौके पर पश्चिम बंगाल के स्वयं सहायता समूह को प्रथम, उत्तराखंड को द्वितीय, हरियाणा को तृतीय पुरस्कार दिया गया। उत्तराखंडी व्यंजन परोसने वाले देवभूमि स्वयं सहायता समूह थत्यूड़ टिहरी को पुरस्कार प्रदान किया गया। उत्तराखंड के स्टॉलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए झूमादुरी स्वयं सहायता समूह चंपावत को प्रथम, देवभूमि समूह को द्वितीय एवं मुस्कान समूह को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। ग्राम्य विकास विभाग परियोजना प्रबंधक इकाई के विशेष कार्याधिकारी एससी शर्मा ने बताया कि सरस मेले का आयोजन ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने का प्रयास है।
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परेड ग्राउंड में आयोजित सरस मेले में उत्तराखंड से करीब डेढ़ सौ स्टॉल थे। मेले की खासियत यह थी कि खेती-किसानी करने वाले लोग खुद यहां जुटे थे और आमदनी सीधे उन्हीं के हाथों में आई। मेले में जैविक उत्पाद लोगों की पहली पसंद रहे। मेले के अंतिम दिन उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्वयं सहायता समूहों को सचिव ग्राम्य विकास विनोद फोनिया ने पुरस्कृत किया। इस मौके पर पश्चिम बंगाल के स्वयं सहायता समूह को प्रथम, उत्तराखंड को द्वितीय, हरियाणा को तृतीय पुरस्कार दिया गया। उत्तराखंडी व्यंजन परोसने वाले देवभूमि स्वयं सहायता समूह थत्यूड़ टिहरी को पुरस्कार प्रदान किया गया। उत्तराखंड के स्टॉलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए झूमादुरी स्वयं सहायता समूह चंपावत को प्रथम, देवभूमि समूह को द्वितीय एवं मुस्कान समूह को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। ग्राम्य विकास विभाग परियोजना प्रबंधक इकाई के विशेष कार्याधिकारी एससी शर्मा ने बताया कि सरस मेले का आयोजन ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने का प्रयास है।
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