प्यार में धोखे से टूट गई थी कांस्टेबल, मौत ही सूझा आखिरी रास्ता
- महिला हेल्प लाइन में भी सुलझाने की हुई कोशिश
- पांच अप्रैल को नेहरू कालोनी थाने में दी थी तहरीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अपने प्यार पाने के लिए महिला कांस्टेबल ने अंतिम सांस तक जद्दोजहद की। अधिकारियों का दरवाजा खटखटाने के साथ प्रेमी सिपाही के परिजनों के सामने भी गिड़गिड़ाई। हर तरफ से मिली निराशा ने उसे मौत की तरफ धकेल दिया। यही वजह थी कि परिजनों में आरोपी और पुलिस के खिलाफ आक्रोश था।
पुलिस मुख्यालय पर तैनाती के दौरान डेढ़ साल पहले महिला कांस्टेबल और एटीएस सिपाही संजीत कुमार के बीच फोन के जरिये बातचीत शुरू हुई थी। मन मिले, दिल मिले और फिर साथ जीने और मरने की कसमें तक खाई गईं। यहां तक कि दोनों परिवार भी इस रिश्ते से वाकिफ थे।
मृतका शहर में अपनी बहन के साथ रहती थी, संजीत कुमार का वहां आना-जाना भी था। अचानक संजीत के बदले रुख ने उसकी जिंदगी में भूचाल ला दिया। शादी से इनकार के बाद वह बेहद तनाव में आ गई थी। इसी बीच परिजनों ने संजीत की कहीं और शादी तय कर दी।
आखिर तक करती रही प्रेमी को पाने की जद्दोजहद
महिला ने पुलिस अधिकारियों से मिलकर विश्वासघात की कहानी बयां की। महिला हेल्प लाइन में भी यह मामला चला। आरोपी सिपाही तो नहीं आया, लेकिन उसके परिजन जरूर आए। तमाम कवायद के बाद भी बात नहीं बन सकी।
पांच अप्रैल को उसकी तरफ से नेहरू कॉलोनी में एक तहरीर भी दी गई, जिसमें कहा गया कि अगस्त 2015 से लेकर जनवरी 2016 तक वह उनके कमरे पर रहा है। पुलिस ने तहरीर की रिसीव कापी तो दे दी, लेकिन किसी तरह की कार्रवाई नहीं की।
जान देने से पहले तक उसका प्रयास रहा कि प्रेमी की शादी टल जाए। कामयाबी नहीं मिली तो उसने टूटे सपनों के साथ दुनिया को अलविदा कह दिया।