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दस लाख रुपये देकर छूटे रिटायर्ड वनकर्मी समेत तीनों अपहृत
Updated Sat, 27 Oct 2018 12:46 AM IST
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डाकुओं के बारे में बात करते पुलिस कर्मी।
- फोटो : amar ujala
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चित्रकूट। जिले की सीमा से सटे बगदरा घाटी के पास कुख्यात डाकू लवलेश कोल गैंग ने जिन दो रिटायर्ड वनकर्मी समेत तीन लोगों का अपहरण किया था वह 58 घंटे बाद छूटकर सकुशल घर पहुंच गए। दस लाख रुपये लेने के बाद उन्हें छोड़ा गया। जिससे परिजन व पुलिस ने राहत की संास ली है। तीनों को अस्वस्थ होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस अधिकारियों ने दावा किया कि बढ़ते दबाव के कारण अपहृतों को छोड़कर डकैतों को भागना पड़ा।
अपहृत रिटायर्ड एसडीओ रींवा निवासी रामाश्रय पांडेय, रिटायर्ड लिपिक रींवा निवासी सुरेश त्रिपाठी व कार चालक मुन्नालाल शुक्रवार को तड़के लगभग तीन बजे अपने घर पहुंच गए। उनके घर पहुंचते ही परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पुलिस अधिकारियों को जैसे ही इसकी भनक लगी तो तीनों से बातचीत करने पहुंचे लेकिन उनका स्वास्थ्य बेहद खराब होने की वजह से तीनों को रींवा के संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया। सुबह दस बजे स्वास्थ्य में कुछ सुधार होने के बाद तीनों को लेकर पुलिस रिटायर्ड एसडीओ के घर पहुंची। लगभग दो घंटे तक परिजनों के साथ रहने के बाद पुलिस उन्हें लेकर मझगवां थाने पहुंची जहां आईजी रींवा उमेश जोगा व सतना एसपी संतोष कुमार ने पूछताछ की।
पुलिस के सामने तीनों अपहृतों ने बताया कि पुलिस के दबाव के कारण ही डाकू बबुली कोल व लवलेश गैंग उन्हें छोड़कर भाग गए हैं। पुलिस ने डकैतों के परिजनों को पकड़कर दबाव बनाया था। डकैतों के पकड़े गए परिजनों से उनके मोबाइल नंबर पर बातचीत हुई थी। डकैतों ने देर रात को जंगल में छोड़ दिया, करीब आठ किमी पैदल चलकर सड़क पर पहुंचे। वहां कुछ लोगों की मदद से अपने गांव पहुंच पाए। आईजी रींवा ने भी दावा किया कि पुलिस के दबाव के कारण ही डाकू बबुली व लवलेश गैंग अपहृतों को छोड़ भाग गए। उधर, अपहृतों के परिजन व उनके रिश्तेदारों ने दावा किया कि डकैतों ने छह बार फिरौती के लिए फोन किया था। फिरौती की रकम ज्यादा होने की बात कहने पर उसे कम किया गया और फिर अंत में दस लाख रुपये पहुंचाने के बाद ही तीनों को छोड़ा गया है। यह रकम तीनों के परिवार व रिश्तेदारों से एकत्र की गई थी। गौरतलब है कि मंगलवार की शाम करीब पांच बजे जानकीकुंड चित्रकूट से आंख का इलाज कराकर रींवा लौटते समय बगदरा घाटी पर एक लाख तीस हजार के इनामी डाकू लवलेश कोल गैंग ने तीनों को कार से उतारकर अपहरण किया था।
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अपहृत रिटायर्ड एसडीओ रींवा निवासी रामाश्रय पांडेय, रिटायर्ड लिपिक रींवा निवासी सुरेश त्रिपाठी व कार चालक मुन्नालाल शुक्रवार को तड़के लगभग तीन बजे अपने घर पहुंच गए। उनके घर पहुंचते ही परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पुलिस अधिकारियों को जैसे ही इसकी भनक लगी तो तीनों से बातचीत करने पहुंचे लेकिन उनका स्वास्थ्य बेहद खराब होने की वजह से तीनों को रींवा के संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया। सुबह दस बजे स्वास्थ्य में कुछ सुधार होने के बाद तीनों को लेकर पुलिस रिटायर्ड एसडीओ के घर पहुंची। लगभग दो घंटे तक परिजनों के साथ रहने के बाद पुलिस उन्हें लेकर मझगवां थाने पहुंची जहां आईजी रींवा उमेश जोगा व सतना एसपी संतोष कुमार ने पूछताछ की।
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पुलिस के सामने तीनों अपहृतों ने बताया कि पुलिस के दबाव के कारण ही डाकू बबुली कोल व लवलेश गैंग उन्हें छोड़कर भाग गए हैं। पुलिस ने डकैतों के परिजनों को पकड़कर दबाव बनाया था। डकैतों के पकड़े गए परिजनों से उनके मोबाइल नंबर पर बातचीत हुई थी। डकैतों ने देर रात को जंगल में छोड़ दिया, करीब आठ किमी पैदल चलकर सड़क पर पहुंचे। वहां कुछ लोगों की मदद से अपने गांव पहुंच पाए। आईजी रींवा ने भी दावा किया कि पुलिस के दबाव के कारण ही डाकू बबुली व लवलेश गैंग अपहृतों को छोड़ भाग गए। उधर, अपहृतों के परिजन व उनके रिश्तेदारों ने दावा किया कि डकैतों ने छह बार फिरौती के लिए फोन किया था। फिरौती की रकम ज्यादा होने की बात कहने पर उसे कम किया गया और फिर अंत में दस लाख रुपये पहुंचाने के बाद ही तीनों को छोड़ा गया है। यह रकम तीनों के परिवार व रिश्तेदारों से एकत्र की गई थी। गौरतलब है कि मंगलवार की शाम करीब पांच बजे जानकीकुंड चित्रकूट से आंख का इलाज कराकर रींवा लौटते समय बगदरा घाटी पर एक लाख तीस हजार के इनामी डाकू लवलेश कोल गैंग ने तीनों को कार से उतारकर अपहरण किया था।
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