{"_id":"5a833d504f1c1b4f588b8782","slug":"manza-cuts-neck-of-police-constable","type":"story","status":"publish","title_hn":"धारा 144 की रिपोर्ट बनने से पहले फिर कटी गर्दन","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
धारा 144 की रिपोर्ट बनने से पहले फिर कटी गर्दन
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Wed, 14 Feb 2018 01:02 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्यामगंज फ्लाईओवर पर गुजरने वालों को पतंगबाजों के खौफ से निजात दिलाने के लिए प्रशासन धारा 144 के तहत पतंगबाजी पर रोक लगाने के लिए रिपोर्ट तैयार कराता रह गया कि इस बीच मंगलवार शाम को पुल पर फिर हादसा हो गया। इस बार महिला थाने की सिपाही आरती शुक्ला श्यामगंज पुल पर गुजरते वक्त मांझे की चपेट में आई। उनकी गर्दन मांझे से 15 सेंटीमीटर लंबाई में चार सेंटीमीटर गहरे तक कट गई। तत्काल ही उन्हें पास के नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टरों को उनकी जान बचाने के लिए फौरन उनका ऑपरेशन करना पड़ा। इस जानलेवा हादसे के बाद पुलिस भी फौरन हरकत में आई और ‘चाइनीज’ मांझे के खिलाफ छापामार कार्रवाई शुरू कर दी गई। एक व्यापारी को गिरफ्तार कर उसकी दुकान से मांझा कब्जे में ले लिया गया।
मांझे का शिकार हुई सिपाही आरती शुक्ला महिला थाने में तैनात हैं। मंगलवार शाम वह करीब 5.30 बजे स्कूटी से ड्यूटी जा रही थीं। इसी बीच पास ही उड़ रही पतंग का मांझा श्यामगंज पुल पर शहदाना मजार से आगे उनकी गर्दन में लिपट गया। इसके बाद उनकी स्कूटी गिर गई। एक हाथ से गर्दन में फंसा मांझा निकालते हुए आरती ने दूसरे हाथ से खून रोकने को रूमाल लगा लिया। मौके पर भीड़ इकट्ठी हो गई। इसी बीच मरीज छोड़कर लौट रही खुशलोक अस्पताल की एंबुलेंस वहां से गुजरी तो ड्राइवर मनोज गंगवार हादसा देखकर वहां रुक गए। साथी रिंकू औरबंटी की मदद से आरती को लेकर अस्पताल पहुंचे। उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टर सीधे ऑपरेशन थिएटर लेकर गए। वहां डॉ. शरद खंडेलवाल, डॉ. मुक्ता पागरानी, डॉ. अनिमेष गुप्ता और डॉ. जितेंद्र वार्ष्णेय ने उनकी सर्जरी की। सूचना पर महिला थाने की एसओ विजय सिरोही, साथी सिपाही ममता आदि भी वहां पहुंच गईं। कुछ महिला सिपाही आरती की गंभीर हालत देखकर रोने लगीं। ममता ने बताया कि आरती के पति पीयूष लखनऊ में नौकरी करते हैं। आरती शुक्ला मूल रूप से लखीमपुर खीरी की रहने वाली हैं। थाना इज्जतनगर परिसर के क्वार्टर में रहती हैं।
आरती की गर्दन में 15 सेमी लंबा और चार सेमी गहरा जख्म था। अगर अस्पताल लाने में थोड़ी सी भी देरी होती तो वह उनके लिए घातक साबित हो सकती थी। उनकी हालत गंभीर थी, लेकिन ऑपरेशन के बाद फिलहाल वह खतरे से बाहर हैं। उन्हें कम से कम सप्ताह भर तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ेगा। -डॉ. विनोद पागरानी, खुशलोक अस्पताल के संचालक
विज्ञापन
दो सप्ताह के अंदर तीसरा हादसा
क्रेडिट लेने की होड़ में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर जल्दबाजी में शुरू किया गया श्यामगंज पुल दो पहिया वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। दो सप्ताह के अंदर मांझे से होने वाला यह तीसरा हादसा है। इससे पहले 28 जनवरी को गुलाबनगर निवासी सिद्धार्थ बाइक से गुजरते समय मांझे की चपेट में आए। मांझा गर्दन पर आया तो उन्होंने हाथ आगे कर दिया और उनकी उंगली कट गई। उसी दिन राजेंद्रनगर निवासी बिजली विभाग के सब स्टेशन ऑपरेटर सीपी सिंह भी मांझे की चपेट में आए। उनकी नाक मांझे से कट गई और प्लास्टिक सर्जरी करानी पड़ी। इसके अलावा एक कार एक्सीडेंट भी पुल पर हो चुका है।
रिपोर्ट पहुंची.. मगर कार्रवाई कुछ नहीं
पिछले दिनों डीएम आर विक्रम सिंह ने पुल पर होने वाले हादसों के मद्देनजर पतंग उड़ाने को लेकर धारा 144 लागू की थी। इसके तहत बारादरी पुलिस से पुल पर होने वाले हादसों और मांझा पर रोक लगाने संबंधी शिकायतों पर रिपोर्ट मांगी थी। इंस्पेक्टर बारादरी उपेंद्र सिंह ने बताया कि यह रिपोर्ट सोमवार को डीएम कार्यालय में रिसीव करा दी गई है। करीब दर्जन भर लोगों ने थाने में प्रार्थनापत्र देकर पुल के आसपास पतंग उड़ाने और चाइनीज मांझे पर रोक लगाने की मांग की थी। मगर मंगलवार को हादसा होने से पहले तक प्रशासन की ओर से यहां पतंगबाजों और चाइनीज मांझा बेचने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
व्यू कटर अब तक नहीं लग सके
बता दें कि श्यामगंज फ्लाईओवर 21 जनवरी को शुरू हुआ था, मगर अब तक व्यू कटर नहीं लग सके हैं। इसके लिए 80 लाख रुपये का बजट बना था लेकिन बजट की मांग पुल शुरू होने के वक्त हुई। इसके चलते यह बजट फंस गया और अब तक व्यू कटर नहीं लग सके हैं।
पुल के दोनों ओर कट बने एक्सीडेंट जोन
श्यामगंज फ्लाईओवर के दोनों ओर डिवाइडर के कट भी एक्सीडेंट जोन बने हुए हैं। यहां पर बने डिवाइडर और पुल के बीच अंतर बहुत कम है। इसके बीच ही तीन ब्रेकर भी बना दिए गए हैं, जिसके चलते आए दिन हादसे हो रहे हैं। दो दिन पहले भी एक कार डिवाइडर से टकरा गई थी, जिसके बाद वहां लंबा जाम लग गया।
नीचे टूटी सड़क, गिर गया दूधिया
पुल के नीचे भी हाल खराब है। सड़क अब तक बनी नहीं है और पुल का मलबा भी पड़ा है। अंधेरा भी रहता है। दुकानों और वाहनों की लाइट के सहारे ही लोग रात में यहां से गुजरते हैं। दुकानें बंद होने के बाद हाल और भी बेहाल हो जाता है। पिलर की आड़ में शराबी अड्डा जमाए रहते हैं। मंगलवार रात पुल के नीचे गुजरते समय कीचड़ में दूधिया की बाइक फिसल गई और सारा दूध गिर गया।
विज्ञापन
मांझे का शिकार हुई सिपाही आरती शुक्ला महिला थाने में तैनात हैं। मंगलवार शाम वह करीब 5.30 बजे स्कूटी से ड्यूटी जा रही थीं। इसी बीच पास ही उड़ रही पतंग का मांझा श्यामगंज पुल पर शहदाना मजार से आगे उनकी गर्दन में लिपट गया। इसके बाद उनकी स्कूटी गिर गई। एक हाथ से गर्दन में फंसा मांझा निकालते हुए आरती ने दूसरे हाथ से खून रोकने को रूमाल लगा लिया। मौके पर भीड़ इकट्ठी हो गई। इसी बीच मरीज छोड़कर लौट रही खुशलोक अस्पताल की एंबुलेंस वहां से गुजरी तो ड्राइवर मनोज गंगवार हादसा देखकर वहां रुक गए। साथी रिंकू औरबंटी की मदद से आरती को लेकर अस्पताल पहुंचे। उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टर सीधे ऑपरेशन थिएटर लेकर गए। वहां डॉ. शरद खंडेलवाल, डॉ. मुक्ता पागरानी, डॉ. अनिमेष गुप्ता और डॉ. जितेंद्र वार्ष्णेय ने उनकी सर्जरी की। सूचना पर महिला थाने की एसओ विजय सिरोही, साथी सिपाही ममता आदि भी वहां पहुंच गईं। कुछ महिला सिपाही आरती की गंभीर हालत देखकर रोने लगीं। ममता ने बताया कि आरती के पति पीयूष लखनऊ में नौकरी करते हैं। आरती शुक्ला मूल रूप से लखीमपुर खीरी की रहने वाली हैं। थाना इज्जतनगर परिसर के क्वार्टर में रहती हैं।
विज्ञापन
आरती की गर्दन में 15 सेमी लंबा और चार सेमी गहरा जख्म था। अगर अस्पताल लाने में थोड़ी सी भी देरी होती तो वह उनके लिए घातक साबित हो सकती थी। उनकी हालत गंभीर थी, लेकिन ऑपरेशन के बाद फिलहाल वह खतरे से बाहर हैं। उन्हें कम से कम सप्ताह भर तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ेगा। -डॉ. विनोद पागरानी, खुशलोक अस्पताल के संचालक
विज्ञापन
दो सप्ताह के अंदर तीसरा हादसा
क्रेडिट लेने की होड़ में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर जल्दबाजी में शुरू किया गया श्यामगंज पुल दो पहिया वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। दो सप्ताह के अंदर मांझे से होने वाला यह तीसरा हादसा है। इससे पहले 28 जनवरी को गुलाबनगर निवासी सिद्धार्थ बाइक से गुजरते समय मांझे की चपेट में आए। मांझा गर्दन पर आया तो उन्होंने हाथ आगे कर दिया और उनकी उंगली कट गई। उसी दिन राजेंद्रनगर निवासी बिजली विभाग के सब स्टेशन ऑपरेटर सीपी सिंह भी मांझे की चपेट में आए। उनकी नाक मांझे से कट गई और प्लास्टिक सर्जरी करानी पड़ी। इसके अलावा एक कार एक्सीडेंट भी पुल पर हो चुका है।
रिपोर्ट पहुंची.. मगर कार्रवाई कुछ नहीं
पिछले दिनों डीएम आर विक्रम सिंह ने पुल पर होने वाले हादसों के मद्देनजर पतंग उड़ाने को लेकर धारा 144 लागू की थी। इसके तहत बारादरी पुलिस से पुल पर होने वाले हादसों और मांझा पर रोक लगाने संबंधी शिकायतों पर रिपोर्ट मांगी थी। इंस्पेक्टर बारादरी उपेंद्र सिंह ने बताया कि यह रिपोर्ट सोमवार को डीएम कार्यालय में रिसीव करा दी गई है। करीब दर्जन भर लोगों ने थाने में प्रार्थनापत्र देकर पुल के आसपास पतंग उड़ाने और चाइनीज मांझे पर रोक लगाने की मांग की थी। मगर मंगलवार को हादसा होने से पहले तक प्रशासन की ओर से यहां पतंगबाजों और चाइनीज मांझा बेचने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
व्यू कटर अब तक नहीं लग सके
बता दें कि श्यामगंज फ्लाईओवर 21 जनवरी को शुरू हुआ था, मगर अब तक व्यू कटर नहीं लग सके हैं। इसके लिए 80 लाख रुपये का बजट बना था लेकिन बजट की मांग पुल शुरू होने के वक्त हुई। इसके चलते यह बजट फंस गया और अब तक व्यू कटर नहीं लग सके हैं।
पुल के दोनों ओर कट बने एक्सीडेंट जोन
श्यामगंज फ्लाईओवर के दोनों ओर डिवाइडर के कट भी एक्सीडेंट जोन बने हुए हैं। यहां पर बने डिवाइडर और पुल के बीच अंतर बहुत कम है। इसके बीच ही तीन ब्रेकर भी बना दिए गए हैं, जिसके चलते आए दिन हादसे हो रहे हैं। दो दिन पहले भी एक कार डिवाइडर से टकरा गई थी, जिसके बाद वहां लंबा जाम लग गया।
नीचे टूटी सड़क, गिर गया दूधिया
पुल के नीचे भी हाल खराब है। सड़क अब तक बनी नहीं है और पुल का मलबा भी पड़ा है। अंधेरा भी रहता है। दुकानों और वाहनों की लाइट के सहारे ही लोग रात में यहां से गुजरते हैं। दुकानें बंद होने के बाद हाल और भी बेहाल हो जाता है। पिलर की आड़ में शराबी अड्डा जमाए रहते हैं। मंगलवार रात पुल के नीचे गुजरते समय कीचड़ में दूधिया की बाइक फिसल गई और सारा दूध गिर गया।