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पूर्व एसीएमओ समेत चार पर हरिजन एक्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, हाथरस
Updated Wed, 09 Mar 2016 12:33 AM IST
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हाथरस। कोर्ट के आदेश पर पूर्व एसीएमओ और जिला अस्पताल में कार्यरत डॉ. पीके श्रीवास्तव, उनकी बेटी नेहा श्रीवास्तव, ईएनटी सर्जन डॉ. नवनीत अरोड़ा और अस्पताल के सफाई कर्मी बिजेंद्र के विरुद्ध हरिजन एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
इन सभी पर चंदपा क्षेत्र के गांव संटीकरा के वीरेंद्र पुत्र ज्ञानप्रकाश ने गंभीर आरोप लगाए हैं। कहा गया है बीते साल 23 जून को जब वह विकलांग प्रमाणपत्र बनवाने सीएमओ ऑफिस पहुंचे तो उनके साथ न केवल बुरा व्यवहार किया गया, बल्कि गाली-गलौज कर मारपीट की गई और विकलांग बोर्ड से धक्का मारकर बाहर निकाल दिया गया।
मालूम हो कि 23 जून को बोर्ड में समय से किसी डॉक्टर के नहीं पहुंचने पर निशक्तजनों ने हंगामा किया था। आरोप है कि सफाई कर्मी और आरोपी बिजेंद्र ने कुछ दिव्यांगों को धक्का मारकर बोर्ड से बाहर कर दिया था।
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दिव्यांगों के साथ पूर्व एसीएमओ, उनकी बेटी नेहा और बोर्ड में मौजूद ईएनटी सर्जन पर भी बुरा बर्ताव करने का आरोप लगा था। इस मामले में तब आरोपियों के विरुद्ध पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। बाद में डॉक्टर की ओर से भी शिकायत दर्ज की गई थी।
वीरेंद्र की शिकायत पुलिस ने दर्ज नहीं की थी, इसलिए उसे कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। इंसपेक्टर कोतवाली मनोज शर्मा का कहना है कि इन सभी के खिलाफ मुकदमा कर लिया गया है। विवेचना में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। डॉ. पीके श्रीवास्तव का कहना है कि सभी आरोप निराधार है। उन्हें न्याय पालिका पर पूरा भरोसा है। कानून उनके साथ न्याय करेगा।
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इन सभी पर चंदपा क्षेत्र के गांव संटीकरा के वीरेंद्र पुत्र ज्ञानप्रकाश ने गंभीर आरोप लगाए हैं। कहा गया है बीते साल 23 जून को जब वह विकलांग प्रमाणपत्र बनवाने सीएमओ ऑफिस पहुंचे तो उनके साथ न केवल बुरा व्यवहार किया गया, बल्कि गाली-गलौज कर मारपीट की गई और विकलांग बोर्ड से धक्का मारकर बाहर निकाल दिया गया।
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मालूम हो कि 23 जून को बोर्ड में समय से किसी डॉक्टर के नहीं पहुंचने पर निशक्तजनों ने हंगामा किया था। आरोप है कि सफाई कर्मी और आरोपी बिजेंद्र ने कुछ दिव्यांगों को धक्का मारकर बोर्ड से बाहर कर दिया था।
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दिव्यांगों के साथ पूर्व एसीएमओ, उनकी बेटी नेहा और बोर्ड में मौजूद ईएनटी सर्जन पर भी बुरा बर्ताव करने का आरोप लगा था। इस मामले में तब आरोपियों के विरुद्ध पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। बाद में डॉक्टर की ओर से भी शिकायत दर्ज की गई थी।
वीरेंद्र की शिकायत पुलिस ने दर्ज नहीं की थी, इसलिए उसे कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। इंसपेक्टर कोतवाली मनोज शर्मा का कहना है कि इन सभी के खिलाफ मुकदमा कर लिया गया है। विवेचना में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। डॉ. पीके श्रीवास्तव का कहना है कि सभी आरोप निराधार है। उन्हें न्याय पालिका पर पूरा भरोसा है। कानून उनके साथ न्याय करेगा।