ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कैनबरा में खेले जा रहे पहले टी-20 मैच में रविंद्र जडेजा की जगह युजवेंद्र चहल ‘कनकशन सब्स्टीट्यूट’ खिलाड़ी के तौर पर उतरे। ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज मिशेल स्टार्क की तेज गेंद रविंद्र जडेजा के सिर में लग गई, जिसके बाद चहल को 'कनकशन सब्स्टीट्यूट' (सिर में चोट लगने के कारण उसकी जगह मैदान पर उतरने वाला स्थानापन्न खिलाड़ी) के तौर पर उतारा गया।
बिना टीम में रहे युजवेंद्र चहल ने कैसे जिताया मैच, जानें कनकशन सब्स्टीट्यूट के बारे में सबकुछ
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बता दें कि अंतिम ओवर में स्टार्क की गेंद जडेजा को लगी। बल्लेबाजी पूरी होने के बाद उनको चेकअप के लिए बीसीसीआई की मेडिकल टीम ने रोक लिया। गेंद हेलमेट पर लगने के बाद पारी खत्म होते ही बीसीसीआई की मेडिकल टीम ने रविंद्र जडेजा का असेसमेंट करने के लिए उन्हें ड्रेसिंग रूम में ही रोक लिया और उनकी जगह युजवेंद्र चहल को बतौर सब्स्टीट्यूट मैदान पर फील्डिंग के लिए उतारा गया।
जडेजा ने महज 23 गेंदों पर नाबाद 44 रन की पारी खेली। इस दौरान जडेजा के बल्ले से 5 चौके और एक छक्का आया। जडेजा की इस पारी के कारण ही भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को 162 रनों का लक्ष्य दिया। चहल ने गेंदबाजी करते हुए चार ओवरों में 25 रन देकर तीन विकेट चटकाए। वहीं, लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम निर्धारित ओवरों में सात विकेट खोकर 150 रन ही बना सकी। इसी के साथ भारत पहला टी-20 11 रन से जीत गया।
क्या है कनकशन सब्स्टीट्यूट का नियम...
कब हुई थी इस नियम की चर्चा पहली बार?
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व ओपनर फिलिप ह्यूज के निधन के बाद इस नियम को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। ह्यूज को 2014 में शेफील्ड शील्ड टूर्नामेंट के एक मैच में सिर पर बाउंसर लगी थी। इसके बाद ह्यूज को अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका था।