टीम इंडिया भले ही 30 मई से इंग्लैंड-वेल्स में शुरू होने जा रहे विश्व कप 2019 की प्रबल दावेदार है, लेकिन 2003 में यह टीम फाइनल पहुंचकर खिताब से चूक गई थी। 2003 में उस दिन वॉन्डर्स के मैदान पर वंडर होते-होते रह गया।
भारत जीत सकता था 2003 World Cup, गांगुली की एक गलती ने तोड़ा देशवासियों का दिल
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गांगुली की एक गलती और हाथ से फिसल गया विश्व कप
गांगुली की एक गलती और हाथ से फिसल गया विश्व कप
साल 2003 के विश्वकप फाइनल में भारतीय फैन्स के दिल उस वक्त टूट गए थे, जब टीम इंडिया 20 साल बाद विश्वकप खिताब से मात्र एक कदम दूर रह गई। किसी को भरोसा नहीं हो रहा था टीम को जीतना सिखाने वाले ‘दादा’ यानी सौरभ गांगुली की टीम हार गई है। वह मुकाबला जिस पर भारतीय क्रिकेट का सुनहरा भविष्य लिखा जाना था।
टूर्नामेंट के दौरान भारतीय टीम का प्रदर्शन शानदार रहा था। पूरी टीम आत्मविश्वास से भरी थी। खिताबी मुकाबले में जैसे ही सौरभ गांगुली मैदान पर टॉस के लिए उतरे टीवी पर टकटकी लगाकर बैठे दर्शक भारत के टॉस जीतने की कामना करने लगे। भारतीयों की दुआओं ने काम किया और भारत टॉस जीतने में कामयाब रहा। दर्शक खुश थे।
इसी बीच सौरभ गांगुली ने पहले गेंदबाजी का फैसला लेकर सभी को चौंका दिया। असल में पहले गेंदबाजी का फैसला गांगुली ने इसलिए किया था, क्योंकि मैच से पहले सुबह बरसात हुई थी। ऐसे में गांगुली को उम्मीद थी कि पिच की नमी गेंदबाजी में मददगार रहेगी।
गांगुली को भरोसा था कि अगर सही जगह पर गेंदबाजी की जाएगी, तो वह जल्द ही ऑस्ट्रेलिया की ओपनिंग जोड़ी को आउट करने में कामयाब रहेंगे। हालांकि, उनका यह दांव उल्टा पड़ गया। भारतीय गेंदबाज बेअसर साबित हुए। परिणामस्वरुप ऑस्ट्रेलिया 359 का बड़ा स्कोर बनाने में सफल रहा। माना जाता है कि गांगुली का यह फैसला ही टीम की हार प्रमुख कारण बना।
फाइनल में सचिन ने किया निराश
सचिन तेंदुलकर 2003 के विश्वकप के टूर्नामेंट के मैन ऑफ द टूर्नामेंट जरुर रहे थे। उन्होंने लगभग हर मैच में बल्ले के साथ अच्छा प्रदर्शन किया। कई मौकों पर तो भारत को जीत भी दिलाई थी। टूर्नामेंट की 11 पारियों में 61.18 की औसत से 673 रन बनाकर सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज भी थे। जिसमें छह अर्धशतक और एक शतक भी शामिल था। बावजूद इसके ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल में उन्होंने सभी को बहुत निराश किया।
टीम इंडिया जब ऑस्ट्रेलिया के विशालकाय स्कोर का पीछा करने उतरी तो सभी की नजरें इस लिटिल मास्टर पर टिकी हुई थी। वह 4 के स्कोर पर थे, तभी ग्लेन मैक्ग्राथ ने उन्हें अपना शिकार बना लिया। सचिन के आउट होते ही पूरी टीम लखड़खड़ा गई।
सहवाग को छोड़कर कोई भी बल्लेबाज पिच पर नहीं टिक सका। एक-एक करके सभी बल्लेबाज वापस लौटते रहे। आखिर में भारतीय टीम 39.2 ओवर में सिर्फ 234 रनों तक ही पहुंच सकी। भारत को इस फाइनल मुकाबले में 125 रन की करारी हार का सामना करना पड़ा।
नेहरा ने वसूला था अंग्रेजों से दोगुना लगान
आशीष नेहरा डरबन में 26 फरवरी को डरबन में खेले गए इंग्लैंड के खिलाफ लीग मैच में 23 रन देकर छह विकेट लेकर हीरो बने थे। उनका यह प्रदर्शन किसी भी भारतीय का विश्व कप में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बन गया।
नेहरा ने केला खाकर मार्चा संभाला और कमाल कर दिया। दरअसल, उस मैच में नेहरा को उल्टियां भी हुई थीं, लेकिन उनकी गेंदबाजी यादगार साबित हुई। एनर्जी जुटाने के लिए नेहरा को पार्थिव पटेल ने केला क्या खिलाया, उसके बाद तो ताश के पत्ते की तरह इंग्लैंड की पारी ढहनी शुरू हो गई।
251 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड का स्कोर 52/2 था। 17वें ओवर में नेहरा ने दो विकेट चटकाए। स्कोर बदलकर 52/4 हो गया। नेहरा के तूफान के आगे इंग्लिश बल्लेबाज हथियार डालते चले गए। 19वें ओवर की आखिरी गेंद पर उन्होंने एक और विकेट लिया और 62 के स्कोर पर आधी अंग्रेज टीम लौट गई।
27वें ओवर की पहली गेंद के बाद नेहरा ने 31वें ओवर की पहली गेंद और तीसरी गेंद पर दो और विकेट लेकर इंग्लैंड की कमर तोड़ दी। 107 रनों के स्कोर पर इंग्लैंड के 8 विकेट गिर गए। बाकी के दो विकेट क्रमश: जवागल श्रीनाथ और जहीर खान ने निकाल दिए।
इंग्लैंड की टीम 168 रनों पर सिमट गई। भारत ने वह मैच 82 रनों से जीत लिया।
नेहरा ने कप्तान नासिर हुसैन (15), एलेक स्टीवर्ट (0), माइकल वॉन (20), पॉल कोलिंगवुड (18), क्रेग व्हाइट (13) और रॉनी ईरानी (0) के विकेट लिए। नेहरा मैन ऑफ द मैच रहे। इस विश्व कप में दिग्गज ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज शेन वॉर्न को डोपिंग का दोषी पाया गया। इसके बाद उन्हें टूर्नामेंट के बीच में ही स्वदेश भेज दिया गया।
2003 विश्वकप में पहली बार
- पहली बार अफ्रीकी धरती पर विश्व कप का आयोजन किया गया
- पहली बार इसका आयोजन आईसीसी विश्व कप के नाम से किया गया
- केन्या विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली पहली गैर टेस्ट दर्जा प्राप्त टीम बनी
- पहली बार इस वैश्विक टूर्नामेंट में रिकॉर्ड 14 टीमों ने भाग लिया