कानपुर का इतिहास और टीम इंडिया की हार में दुर्लभ संयोग
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हार और जीत क्रिकेट में कोई बड़ी बात नहीं। रविवार को महात्मा गांधी-नेल्सन मंडेला सीरीज में टीम इंडिया की लगातार तीसरी हार और मेहमान अफ्रीकी टीम की एक और बड़ी जीत।
रविवार को भारत की हार एक मामले में बेहद रोचक हो जाती है क्योंकि कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में पहली मर्तबा किसी टीम ने 300 का आंकड़ा पार किया और मेजबान भारतीय टीम इस रिकॉर्ड में अपनी जीत सुनिश्चित नहीं कर सकी।
टीम इंडिया का एक रिकॉर्ड रहा है कि वह 300 या इससे ज्यादा रनों के लक्ष्य को भेदने में ज्यादातर सफल रहा है। लेकिन कानपुर में पहली बार बना 304 रन का टारगेट हासिल न कर पाना भारतीय टीम के लिए दुखद संयोग है।
वैसे लकी रहा है कानपुर का ग्रीन पार्क
कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम ने रविवार को लगभग दो साल बाद अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय मुकाबले की मेजबानी की। इससे पहले इसी स्टेडियम में खेला गया पिछला वनडे मैच टीम इंडिया ने नवंबर 2013 में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला था।
जिसमें भारतीय टीम पांच विकेट से जीतने में सफल रही थी। शिखर धवन मैन ऑफ द मैच बने थे जिन्होंने 119 रनों की शानदार पारी खेली थी।
इतना ही नहीं यदि ग्रीन पार्क स्टेडियम में टीम इंडिया के रिकॉर्ड की बात करें तो भारत का पलड़ा ज्यादातर भारी रहा है। आगे जानें, कानपुर में भारत के पिछले 5 वनडे मैचों के रिजल्ट।
पाकिस्तान से लिया था हार का बदला
जनवरी 2002 में इंग्लैंड के खिलाफ वनडे मैच में भारत ने मेहमान टीम को 8 विकेट से रौंदा था। इसमें वीरेंद्र सहवाग मैन ऑफ द मैच रहे थे।
हालांकि अपनी चिर-प्रतिद्वंद्वी टीम पाकिस्तान के खिलाफ अप्रैल 2005 में भारत को शिकस्त का सामना करना पड़ा लेकिन नवंबर 2007 में भारत ने पाक को इसी सरजमीं पर 46 रनों से रौंदकर पिछली हार का बदला लिया। इस मैच के हीरो युवराज सिंह थे।
भारत की जीत का सिलसिला यहीं नहीं रुका। नवंबर 2008 में एक बार फिर इंग्लैंड को डकवर्थ लुइस नियम के आधार पर भारतीय टीम ने 16 रनों से जीत हासिल की थी। मैन ऑफ द मैच टर्बिनेटर हरभजन सिंह रहे थे।
नवंबर 2013 में भारतीय टीम ने महेंद्र सिंह धोनी की अगुआई में कैरिबियाई टीम को 5 विकेट से शिकस्त दी थी।