टीम इंडिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर इन दिनों विवादों में फंसे हुए हैं। उत्तराखंड क्रिकेट टीम के कोच पद से इस्तीफा देने के बाद से जाफर पर लगातार कई आरोप लगाए जा रहे हैं। उनपर उत्तराखंड क्रिकेट संघ के सचिव माहिम वर्मा द्वारा मजहबी आरोप और टीम चयन में इस्लाम को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया। हालांकि जाफर ने इसे खारिज करते हुए खुलकर अपना पक्ष रखा। वहीं जाफर के बचाव में पूर्व क्रिकेटर भी उतर आए हैं। इस कड़ी में अब मोहम्मद कैफ भी शामिल हो गए।
कैफ ने कहा कि उन्होंने यह पूरा प्रकरण देखकर दुःख पहुंचा है और यह दुर्भाग्यपूर्ण है। कैफ ने एक अखबार में ताजा हालात का जिक्र करते हुए अपने दौर को याद किया है। उन्होंने अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस में एक कॉलम में अपनी बात कही है। इस कॉलम का शीर्षक है- ‘क्रिकेट को गंदा मत कीजिए, प्लीज’।
भारत के बेहतरीन फील्डरों में शुमार मोहम्मद कैफ ने अपने इस लेख में सवाल उठाए हैं कि आखिर खेल के रास्ते में धर्म कब से आ गया? कैफ ने लिखा कि मैंने उत्तर प्रदेश, देश के अलग-अलग जोन, भारत समेत कई क्लब और इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट खेला है लेकिन कभी भी अपने धर्म को लेकर फिक्रमंद नहीं रहा।
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वसीम जाफर
- फोटो : ट्विटर
कैफ ने लिखा भारतीय क्रिकेट में इन दिनों वसीम जाफर के मुद्दे को लेकर जो भी हो रहा है, वह बहुत पीड़ा देने वाला है। उन्होंने अपने बीते हुए सुनहरे क्रिकेट दौर को याद करते हुए अपने अंडर-15 के दिनों के हॉस्टल के वक्त को याद किया है।
कैफ ने यहां भारतीय टीम के दिग्गज खिलाड़ियों के बार में बात करते हुए लिखा, ‘मुझे याद है कि सचिन अपने क्रिकेट किट बैग में अपने आराध्य साईं बाबा की तस्वीर रखते थे। वीवीएस लक्षमण अपने भगवान की तस्वीर रखते थे। जहीर खान, हरभजन सिंह अपनी-अपनी आस्था के अनुरूप चीजें करते थे। सौरव गांगुली हो या जॉन राईट, हम सभी अलग-अलग परिवेश, भाषा, धर्म के थे लेकिन हम आपस में कभी इन चीजों के बीच ना मनभेद ना मतभेद करते थे। हम हिंदू-मुस्लिम सिख या इसाई नहीं थे। हम सभी एक साथ, एक देश के लिए एकजुट होकर खेलते थे।’