24 घंटों का 'खेल' और सचिन को दे दिया भारत रत्न
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जनता से जुड़े मसलों पर निर्णय लेने में केंद्र सरकार को न सिर्फ काफी मशक्कत करनी पड़ती है बल्कि सालों साल लग जाते हैं लेकिन सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न देने में जैसी तत्परता यूपीए सरकार ने दिखाई, वैसी किसी जन समस्या के समाधान में नहीं देखी गई।
मास्टर ब्लास्टर के क्रिकेट से संन्यास की बेला पर जनभावनाओं की बयार में बहकर न केवल केंद्र सरकार ने मात्र 4 घंटे में उनके 24 साल के सफर का बायोडाटा तैयार कर लिया बल्कि 24 घंटे के अंदर भारत रत्न देने का फैसला तक कर लिया।
बिना सिफारिश के ही कर दी पहल
सरकार ने यह मेहरबानी और तत्परता तब दिखाई जब न तो खुद सचिन और न ही किसी और ने उनके नाम की सिफारिश देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए की थी।
इसकी पहल खुद प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने की थी। हालांकि खेल मंत्रालय ने इस सम्मान के लिए हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के नाम को आगे बढ़ाया था।
पीएमओ ने सचिन को भारत रत्न देने के लिए राष्ट्रपति को लिखे गए प्रधानमंत्री के पत्र या उसके मजमून का नियमों का हवाला देकर खुलासा करने से साफ मना कर दिया।
आरटीआई से मिली जानकारी
सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत पीएमओ की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, सचिन 14 नवंबर को वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना 200वां टेस्ट मैच खेल रहे थे। टेस्ट मैच के शुरू होने के बाद ही पीएमओ ने 1:35 बजे खेल मंत्रालय से तत्काल लिटिल मास्टर का बायोडाटा मांगा।
पीएमओ के ईमेल के जवाब में 5:23 बजे खेल मंत्रालय ने जो बायोडाटा भेजा, उससे स्पष्ट होता है कि इसे सचिन से नहीं मांगा गया बल्कि खेल मंत्रालय ने पीएमओ से भेजे गए फॉर्मेट के अनुसार खुद 4 घंटे में तैयार किया। अगले ही दिन जरूरी कार्यवाही पूरी कर प्रधानमंत्री ने इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेज दिया।
राष्ट्रपति ने भी मंजूरी में नहीं लगाई देरी
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी प्रधानमंत्री के प्रस्ताव को मंजूरी देने में देर नहीं लगाई और 16 नवंबर को टेस्ट मैच खत्म होते ही सचिन को भारत रत्न देने की घोषणा कर दी गई।
15 नवंबर को जब कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी सचिन की बैटिंग देखने वानखेड़े स्टेडियम पहुंचे उस वक्त प्रधानमंत्री उनके नाम पर मुहर लगा चुके थे।
ध्यानचंद के नाम की सिफारिश की गई थी
खास बात यह है कि भारत रत्न के लिए खेल मंत्रालय ने हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की सिफारिश की थी लेकिन पीएमओ ने सचिन के नाम को आगे बढ़ाने के लिए ध्यानचंद के नाम पर कोई विचार नहीं किया।
गौर करने वाली बात यह है कि बीते वर्ष महाराष्ट्र सरकार ने विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर सचिन को भारत रत्न देने की सिफारिश पीएमओ से की थी लेकिन तब उस पर विचार नहीं हुआ।
सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक के कस्तूरीरंगन ने वैज्ञानिक सीएनआर राव के नाम की सिफारिश कर रखी थी। कस्तूरीरंगन ने 28 सितंबर को उनके नाम की सिफारिश पीएमओ की भेजी थी।
फैसले के खिलाफ दाखिल होगी पीआईएल
कैंसर से जूझ रहे बैतूल निवासी हेमंत दुबे की ओर से आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी भी अधूरी है।
पीएमओ ने संविधान के अनुच्छेद 74 (2) के तहत राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच इस संबंध में हुई बातचीत और पत्राचार का ब्योरा देने से इंकार कर दिया है। हेमंत दुबे पीएमओ के इस फैसले के खिलाफ जनहित याचिका भी दायर करने जा रहे हैं।