2010 में दक्षिण अफ्रीकी टीम भारत दौरे पर वन-डे सीरीज फतह करने के इरादे से आई थी, लेकिन उसे क्या पता था कि इस दौरान उन्हें मैदान पर साक्षात 'भगवान' के दर्शन होने वाले हैं। पहला मैच आसानी से जीतने के बाद भारत का अगला मुकाबला ग्वालियर में था।
दिन था 24 फरवरी। यानी ठीक से आज से नौ साल पहले। उस दिन को 'क्रिकेट का भगवान' कहलाए जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने अपने लिए हमेशा-हमेशा के लिए खास बना दिया। सचिन ने वह पारी खेली, जो उस समय विश्व क्रिकेट का कोई भी बल्लेबाज नहीं कर पाया था।
टीम के कप्तान एमएस धोनी ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का निर्णय लिया। बल्लेबाजी के लिए अनुकूल ग्वालियर की पिच में भारत की ओर से वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर ओपनिंग करने मैदान पर उतरे। विस्फोटक बल्लेबाज सहवाग महज 9 रन के निजी स्कोर पर पवेलियन लौट गए। इसके बाद क्रीज पर आए दिनेश कार्तिक। कार्तिक ने सचिन का पूरा साथ दिया।
करियर के उस पड़ाव पर सचिन संभलकर खेलना शुरू कर चुके थे। मगर उस दिन मुंबई का यह खिलाड़ी कुछ और ही सोच कर आया था। कोई भी गेंदबाज सचिन को रोक नहीं पा रहा था। लोगों को अंदेशा हो गया था कि आज कुछ इतिहास बनने वाला है। सचिन की क्रिकेट बुक में जितने भी शॉट्स थे उस दिन दर्शकों को सब एक मैच में देखने मिले।
तेंदुलकर ने पूरे 50 ओवर बैटिंग की। इस दौरान उन्होंने147 गेंदों में नाबाद 200 रन ठोक दिए। इससे पहले वनडे इतिहास में किसी भी बल्लेबाज ने यह आंकड़ा नहीं छुआ था। सचिन ऐसा करने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बने। इस पारी में उन्होंने 25 चौके और 3 छक्के लगाए।