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सचिन ने खोला राज, सबसे बुरे दौर के बाद क्यों छोड़ी कप्तानी
amarujala.com- Presented by: पवन नाहर
Updated Wed, 17 May 2017 09:48 PM IST
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सचिन तेंदुलकर
- फोटो : Cricket 360
मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने 24 साल तक क्रिकेट के मैदान पर अपना जादू बिखेरा। अपने करियर में तमाम उतार चढ़ाव देखने वाले सचिन ने खुलासा किया कि उनके करियर की सबसे मु्श्किल सीरीज कौनसी थी। सचिन ने बताया कि 1999 का ऑस्ट्रेलिया दौरा उनके करियर की सबसे मुश्किल चुनौती थी। उन्होंने कहा, "निश्चित तौर पर वो सबसे मुश्किल दौरा था।"
सचिन ने कहा कि उस समय ऑस्ट्रेलिया की टीम बेहद मजबूत थी। 11 की टीम में 8-9 खिलाड़ी अपने ही दम पर टीम को मैच जिता सकते थे। यही वजह है कि कंगारू टीम ने लंबे समय तक क्रिकेट की दुनिया पर राज किया और 1999 से लेकर 2007 तक का विश्व कप अपने नाम किया। पीटीआई से अपनी बातचीत में सचिन ने कहा कि कई टीमें ऑस्ट्रेलिया के खेल की मुरीद थीं।
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सचिन ने कहा कि उस समय ऑस्ट्रेलिया की टीम बेहद मजबूत थी। 11 की टीम में 8-9 खिलाड़ी अपने ही दम पर टीम को मैच जिता सकते थे। यही वजह है कि कंगारू टीम ने लंबे समय तक क्रिकेट की दुनिया पर राज किया और 1999 से लेकर 2007 तक का विश्व कप अपने नाम किया। पीटीआई से अपनी बातचीत में सचिन ने कहा कि कई टीमें ऑस्ट्रेलिया के खेल की मुरीद थीं।
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वनडे या टेस्ट- क्या थी सचिन की पसंद
सचिन तेंदुलकर
- फोटो : ESPN
1999 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर सचिन ही टीम इंडिया के कप्तान थी। इस दौरे पर स्टीव वॉ की टीम ने भारत को 3-0 से मात दी। उस सीरीज में सचिन अकेले ही मैदान पर संघर्ष करते दिखे। सचिन ने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई के सभी खिलाड़ियों को टीम में अपनी जिम्मेदारी का एहसास था और इसी वजह से वो और बेहतर प्रदर्शन कर पाते थे।
सचिन ने कहा कि टेस्ट क्रिकेट उन्हें हमेशा से ही प्रिय रहा है। हालांकि, वनडे क्रिकेट भी काफी मुश्किल था, मगर टेस्ट क्रिकेट उनके दिल के करीब रहा है। टेस्ट क्रिकेट से उन्हें 'संतोष' का अनुभव मिलता था। 1999 की सीरीज सचिन के करियर का सबसे बुरा दौर कहा जा सकता है। इस सीरीज के बाद अच्छी फॉर्म में चल रहे सचिन ने टीम की कप्तानी छोड़ दी थी।
सचिन ने कहा कि टेस्ट क्रिकेट उन्हें हमेशा से ही प्रिय रहा है। हालांकि, वनडे क्रिकेट भी काफी मुश्किल था, मगर टेस्ट क्रिकेट उनके दिल के करीब रहा है। टेस्ट क्रिकेट से उन्हें 'संतोष' का अनुभव मिलता था। 1999 की सीरीज सचिन के करियर का सबसे बुरा दौर कहा जा सकता है। इस सीरीज के बाद अच्छी फॉर्म में चल रहे सचिन ने टीम की कप्तानी छोड़ दी थी।