रहाणे की अमर उजाला से खास बातचीत, कहा- इंग्लैंड को हल्के में नहीं लेंगे, करेंगे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
05 फरवरी से चेन्नई में शुरू होगा दोनों टीमों के बीच पहला टेस्ट मैच
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में हराकर लगातार दूसरी टेस्ट सीरीज जीतकर लौटी है। अब उसके सामने इंग्लैंड की चुनौती है जो श्रीलंका का उसी के घर में सफाया करके यहां पहुंची है। मुकाबला कांटे का होगा। ऑस्ट्रेलिया में तीन मैचों में कार्यवाहक कप्तान की भूमिका निभाने वाले अजिंक्य रहाणे साफ करते हैं कि वह जो रूट एंड कंपनी को हल्के में लेने की गलती नहीं करेंगे। टीम इंग्लैंड की चुनौती के लिए पूरी तरह से तैयार है। ऑस्ट्रेलिया की तरह घर में भी हम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे। हालांकि यह देखने वाली बात होगी कि उनके तेज गेंदबाजों जेम्स एंडरसन, स्टुअर्ट ब्रॉड, जोफ्रा आर्चर, मार्क वुड और क्रिस वोक्स को यहां किस तरह की मदद मिलेगी।
टीमें चेन्नई पहुंची :
कप्तान जो रूट सहित इंग्लैंड क्रिकेट टीम के सदस्य भारत के खिलाफ चार टेस्ट मैचों की सीरीज के पहले दो मुकाबलों के लिए बुधवार को यहां पहुंच गए। रूट और उनकी टीम श्रीलंका से सुबह पहुंची और सीधे होटल चली गई। जहां दोनों टीमों के लिए बायो बबल बनाया गया है। इंग्लैंड की टीम ने श्रीलंका को टेस्ट सीरीज में 3-0 से हराया। भारत के स्टार बल्लेबाज रोहित शर्मा और उपकप्तान अजिंक्य रहाणे मंगलवार रात ही पहुंच गए थे। चेतेश्वर पुजारा, जसप्रीत बुमराह और ऋषभ पंत बुधवार सुबह पहुंचे। टीम के कोच रवि शास्त्री मुंबई से यहां पहुंचे हैं। कप्तान विराट कोहली शाम को पहुंचे। दोनों टीमें होटल लीला पैलेस में रूकी हैं। टीमें छह दिन तक एकांतवास में रहने के बाद दो फरवरी से अभ्यास शुरू करेंगी। खिलाड़ियों का कोरोना टेस्ट भी होगा। पहला मैच पांच फरवरी और दूसरा 13 फरवरी से शुरू होगा
ऑस्ट्रेलिया में लगा ही नहीं युवाओं के साथ खेला :
एडिलेड में 36 रन पर ऑलआउट होने के बाद रहाणे और टीम मैनेजमेंट के लिए हर मुकाबला तनावपूर्ण था। लेकिन इस तनाव को दूर करने का काम उन युवाओं ने किया जिन्होंने कभी टेस्ट क्रिकेट तक नहीं खेला। टीम के कार्यवाहक कप्तान रहाणे कहते हैं कि पहले टेस्ट के बाद उनके लिए हर मुकाबला तनाव से भरा था, लेकिन शुभमन गिल, नवदीप सैनी, मोहम्मद सिराज, टी नटराजन, वाशिंगटन सुंदर और शार्दुल ठाकुर ने यह अहसास नहीं होने दिया कि वह ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम के खिलाफ नए क्रिकेटरों के साथ खेल रहे हैं।
रहाणे कहते हैं कि मेलबर्न, सिडनी, ब्रिसबेन हर जगह तनाव था, लेकिन उन्होंने मेलबर्न में ही सभी को सकारात्मक रवैया अपनाने को कहा। अच्छी बात यह रही कि हर क्रिकेटर इसी तर्ज पर खेलता दिखा। सच कहूं तो साथियों ने मेरे तनाव को इसी ऊर्जा के चलते काफी हद तक दूर कर दिया था। उन्हें विश्वास हो चला था कि ये क्रिकेटर नए हैं लेकिन काफी कुछ कर सकते हैं। किसी भी मौके पर उन्हें ऐसा नहीं लगा कि वह नए क्रिकेटरों के साथ खेल रहे हैं। हर किसी ने समय-समय पर अपने उपयोगी और प्रतिभाशाली होने का परिचय दिया। अगर आपकेपास अच्छी टीम हो तो वह अनुभवी टीम को भी हराने की क्षमता रखती है। इसका उदाहरण यह सीरीज है।
जोश और उत्साह से भरे थे युवा :
सिराज, नटराजन, शार्दुल, गिल, सैनी और वाशिंगटन सुंदर जैसे युवा क्रिकेटरों से उनका सर्वश्रेष्ठ निकलवाने के बारे में रहाणे ने कहा कि मैंने सिर्फ इतना कहा कि वे अपनी क्षमता के अनुसार खेलें। उन्हें पता था कि ये सभी प्रतिभाशाली हैं। अच्छा प्रदर्शन करके ही टेस्ट टीम में स्थान बनाकर आए हैं। इनमें अनुभव की कमी जरूर थी मगर जोश और उत्साह से भरे हुए थे। बस उन्होंने सही मौके पर सही मार्गदर्शन दिया जिससे वह उनका बेहतरीन प्रदर्शन निकलवाने में कामयाब रहे।
सिराज की मां चाहती थीं वह रुके और अच्छा प्रदर्शन करे :
रहाणे पेसर सिराज से बेहद प्रभावित हैं। उनके पिता का निधन होने के बावजूद उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में रुकने का बड़ा फैसला लिया। उनकी मां की भी इच्छा यही थी कि वह ऑस्ट्रेलिया में रुककर टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन करे। सिराज के पिता उसे बड़े स्तर पर क्रिकेट खेलते देखना चाहते थे। उन्होंने अपने पिता की इच्छा के अनुसार ही इस टेस्ट सीरीज में गेंदबाजी की। यह वाकई बहुत अच्छा और भावुक करने वाला था। पूरी सीरीज के दौरान वह खुद सभी साथी और टीम मैनेजमेंट उनका लगातार हौसला बढ़ाते रहे। उन्हें मजबूती देते रहे।
पंत ने निभाई सीनियर की भूमिका :
रहाणे कहते हैं कि सिडनी में ऋषभ पंत से कुछ कैच जरूर छूटे पर वह एक अच्छे विकेटकीपर हैं। फिर बल्लेबाजी में उनकी आक्रमकता टीम के लिए कारगर साबित हुई। इस सीरीज में सभी मुकाबले कांटे के थे। दस्तानों से चूक टीम को भारी पड़ सकती थी, लेकिन पंत का यहां अलग रूप देखने को मिला। वह एक सीनियर क्रिकेटर की भांति प्रदर्शन कर रहे थे। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी देकर ऊपरी क्रम में बल्लेबाजी करने भेजा गया। गाबा में जब वह आउट हुए तो चाय में 20 मिनट शेष थे। उन्होंने पंत से कहा कि इन 20 मिनट में संभलकर खेलना। उन्होंने ऐसा ही किया जिससे ऑस्ट्रेलियाई दबाव में आ गए। इसके बाद वह आक्रामक हो गए और जीत दिलाने में अहम भूमिका अदा की। यह उनके कॅरिअर की यादगार पारी और सीरीज है।