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टॉस फिर बना बॉस: दुबई में जिसके पक्ष में सिक्का गिरा उसने ही मारी बाजी, ऑस्ट्रेलियाई कप्तान फिंच को हुआ फायदा

Mon, 15 Nov 2021 12:59 AM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, दुबई
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, दुबई Published by: स्वप्निल शशांक Updated Mon, 15 Nov 2021 12:59 AM IST
सार

जिस कप्तान ने टॉस जीता है, ज्यादातर मैच उसकी टीम ने ही जीते हैं। फाइनल मैच भी शाम में हुआ, वैसे में ओस ने लक्ष्य का पीछा करने वाली टीमों को जमकर फायदा हुआ। इस विश्व कप में दुबई में हुए 13 मैचों में 12 बार लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम जीती है।

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T20 got a new champion: the team that won the toss in Dubai became the boss, dew played an important role | 000 became t20 champion defeating 000
टी-20 विश्व कप - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

45 मैचों के बाद आईसीसी टी-20 विश्व कप 2021 अपने अंजाम तक पहुंच गया है। आज फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड को आठ विकेट से हरा दिया। टी-20 को सात साल बाद नया चैंपियन मिला है। इससे पहले 2007 में भारत, 2009 में पाकिस्तान, 2010 में इंग्लैंड, 2012 और 2016 में वेस्टइंडीज और 2014 में श्रीलंका चैंपियन बन चुका है।
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टी-20 विश्व कप - फोटो : अमर उजाला
टॉस जीतने वाली टीम बनी बॉस
ऑस्ट्रेलियाई कप्तान एरॉन फिंच इस विश्व कप में बल्ले से अपनी टीम के लिए कुछ खास नहीं कर पाए। हालांकि, फाइनल में उन्होंने टॉस जीतकर अपनी टीम को फायदा पहुंचाया। इसके पीछे कारण यह है कि इस विश्व कप में टॉस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

जिस कप्तान ने टॉस जीता है, ज्यादातर मैच उसकी टीम ने ही जीते हैं। फाइनल में भी यही हुआ। फिंच ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला लिया। मैच शाम में हुआ, वैसे में ओस ने लक्ष्य का पीछा करने वाली ऑस्ट्रेलिया को जमकर फायदा पहुंचाया। अब तक दुबई में हुए 13 मैचों में 12 बार लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम जीती है।

रात में खेले गए 10 में से 10 मुकाबले लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम जीती है। दुबई में पिछले 18 नाइट मैचों में 17 मैच उन टीमों ने जीता, जिसने लक्ष्य का पीछा किया। इसमें इकलौता अपवाद आईपीएल फाइनल है। जिसमें चेन्नई सुपर किंग्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए जीत हासिल की थी।

ऑस्ट्रेलिया ने इस विश्व कप में सात में से छह मैच जीते हैं। यह छह मैच कंगारू ने लक्ष्य का पीछा करते हुए जीता। कप्तान फिंच इंग्लैंड के खिलाफ टॉस हारे थे और पहले बल्लेबाजी करते हुए मैच भी हार गए थे। वहीं, न्यूजीलैंड की टीम ने इस विश्व कप में सात में से तीन बार पहले बल्लेबाजी की है।

हालांकि, इनमें से दो मैच दिन वाले और एक रात वाला मैच था। टूर्नामेंट में कीवी टीम ने सिर्फ दो मैच गंवाया है। ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के खिलाफ यह मैच रात में खेला गया था और न्यूजीलैंड ने इसमें पहले बल्लेबाजी की थी। 

 
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टी-20 विश्व कप - फोटो : अमर उजाला
फाइनल में ओस की भूमिका महत्वपूर्ण
दोनों सेमीफाइनल मुकाबले में नतीजे डेथ ओवर यानी आखिरी कुछ ओवर्स में आए थे। न्यूजीलैंड को इंग्लैंड के खिलाफ पांच ओवर में 60 रन और ऑस्ट्रेलिया को आखिरी पांच ओवर में 62 रन की जरूरत थी। दोनों ही टीमों ने एक ओवर रहते इतने रन बना लिए और मैच जीत लिया।

फाइनल में भी यही हुआ और न्यूजीलैंड की टीम रन नहीं बचा सकी। ऑस्ट्रेलिया टीम ने शुरुआत से ही रन गति को बनाए रखा आखिरी पांच ओवर में ऑस्ट्रेलिया को 37 रन की जरूरत थी, जो उन्होंने 18.5 ओवर यानी 3.5 ओवर में ही बना डाला।

यूएई में शारजाह, अबू धाबी और दुबई की तुलना करें, तो दुबई में ओस की भूमिका सबसे ज्यादा रही है। दूसरी पारी में इससे बल्लेबाजी काफी आसान हो जाती है। रात में हुए मुकाबलों में दूसरी पारी में तेज गेंदबाजी पर काफी रन बनते हैं। गेंदबाजों ने 16 से 20 ओवर के बीच करीब 14 की इकोनॉमी से रन लुटाए हैं। वहीं, पहली पारी में ये इकोनॉमी करीब 10 का रहता है।

ऑस्ट्रेलिया ने अब तक रात के मैच में दूसरी पारी में गेंदबाजी नहीं की है। वहीं, न्यूजीलैंड की टीम ने दूसरी बार दुबई में दूसरी पारी में गेंदबाजी की। पाकिस्तान के खिलाफ कीवी गेंदबाजों ने 3.4 ओवर में 44 रन लुटाए थे। वहीं, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कीवी गेंदबाजों ने डेथ ओवर में 17 गेंदों पर 37 रन दिए।

सेमीफाइनल मैचों में दिखा है कि पिच के मुताबिक गेंदबाजी करना ज्यादा फायदेमंद रहा है, बगैर यॉर्कर डालने के। यॉर्कर गलत जगह पड़ने पर सामने वाली टीमों को भारी कीमत चुकानी पड़ी है। कीवी गेंदबाजों ने फाइनल में भी यही गलती की और इसकी कीमत चुकानी पड़ी।
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