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Kambli-Sachin: साथ शुरू हुआ करियर, फिर कांबली क्यों रह गए सचिन से पीछे? प्रतिभा नहीं, ये कारण रहे महत्वपूर्ण

Sat, 07 Dec 2024 06:29 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्वप्निल शशांक Updated Sat, 07 Dec 2024 06:29 PM IST
सार

आईपीएल में ढेरों पैसे मिलने के बाद पृथ्वी का करियर पटरी से उतर गया। अब उन्हें आईपीएल तक में कोई टीम नसीब नहीं हो रही। इसके बाद से कई दिग्गजों के बयान सामने आए और कुछ ने उनकी तुलना कांबली से कर दी और फिर कांबली भी चर्चा का विषय बन गए।

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Sachin Tendulkar vs Vinod Kambli Career Stats Key Reasons Behind Vinod Kambli Downfall in Cricket Career
सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली - फोटो : twitter

विस्तार

आईपीएल 2025 के लिए नीलामी के बाद से दो क्रिकेटर सुर्खियों में हैं। दोनों को ही काफी प्रतिभाशाली माना जाता है, लेकिन गलत कारणों से इनका करियर चर्चा का विषय बन गया है। एक तो भारत का पूर्व क्रिकेटर है और दूसरा एक युवा क्रिकेटर है। जी हां हम बात कर रहे हैं- विनोद कांबली और पृथ्वी शॉ की। पृथ्वी को नीलामी में किसी ने नहीं खरीदा। एक समय में उनकी तुलना वीरेंद्र सहवाग, सचिन तेंदुलकर और ब्रायन लारा से होती थी। टेस्ट डेब्यू पर ही शतक ने उन्हें रातों रात स्टार बना दिया था।
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घरेलू क्रिकेट में ढेरों रन और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शुरुआती दिनों में ही फेम ने पृथ्वी को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। आईपीएल में ढेरों पैसे मिलने के बाद पृथ्वी का करियर पटरी से उतर गया। अब उन्हें आईपीएल तक में कोई टीम नसीब नहीं हो रही। इसके बाद से कई दिग्गजों के बयान सामने आए और कुछ ने उनकी तुलना कांबली से कर दी और फिर कांबली भी चर्चा का विषय बन गए।
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Sachin Tendulkar vs Vinod Kambli Career Stats Key Reasons Behind Vinod Kambli Downfall in Cricket Career
कांबली और पृथ्वी - फोटो : Twitter
नीलामी में अनसोल्ड रहने के बाद दिल्ली कैपिटल्स के पूर्व टैलेंट स्काउट और सहायक कोच प्रवीण आमरे ने अनुमान लगाया कि इतनी कम उम्र में 30-40 करोड़ रुपये के करीब कमाई ने शॉ को करियर की  पटरी से उतार दिया होगा। शॉ को डीसी में लाने में बड़ी भूमिका निभाने वाले आमरे ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने शॉ को विनोद कांबली का उदाहरण दिया था, लेकिन वह भी काम नहीं आया। आमरे ने कहा- तीन साल पहले मैंने पृथ्वी शॉ को विनोद कांबली का उदाहरण दिया था। मैंने कांबली के पतन को करीब से देखा है। इस पीढ़ी को कुछ चीजें सिखाना आसान नहीं है।'

विनोद कांबली ने 1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक की शुरुआत में करियर की शुरुआत की थी। वह सचिन तेंदुलकर के साथ एक ही समय में भारतीय टीम में आए थे। कांबली को सचिन से भी प्रतिभाशाली क्रिकेटर माना जाता था। हालांकि, तेंदुलकर के विपरीत कांबली का करियर कम उम्र में पटरी से उतर गया। उन्होंने 23 साल की उम्र में अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला था। इसके बाद कांबली युवा क्रिकेटरों के लिए उदाहरण तो बने, लेकिन गलत चीजों के लिए। उन्हें केस स्टडी के तौर पर लिया जाने लगा कि एक युवा क्रिकेटर को क्या नहीं करना चाहिए। 



ऐसे क्या कारण थे जिसकी वजह से सचिन महान खिलाड़ी बन गए और कांबली पीछे रह गए? इसके बारे में तो हम जानेंगे ही, लेकिन आइए पहले दोनों की कहानी जानते हैं...

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सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली - फोटो : Twitter
एक ही स्कूल में पढ़े
सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली ने शुरुआती पढ़ाई एक ही स्कूल में की। इन दोनों की दोस्ती की शुरुआत उस समय हुई जब वे 10 साल के थे और मुंबई के शारदाश्रम विद्यामंदिर में कक्षा 7 में पढ़ते थे। इसके बाद इन दोनों की दोस्ती आगे बढ़ती रही। 

एक ही गुरु के पास सीखी क्रिकेट
जिन दिनों सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली शारदाश्रम विद्यामंदिर स्कूल में पढ़ते थे उस समय दोनों की मुलाकात रमाकांत आचरेकर की क्रिकेट कोचिंग में हुई। यहां कोच रमाकांत ने सचिन-कांबली को क्रिकेट की बारीकियां सिखाईं। इन दोनों ने बड़ी ही संजीदगी से अपने कोच से क्रिकेट के अलावा अनुशासन का पाठ पढ़ा। 



664 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी
 शारदाश्रम विद्यामंदिर स्कूल के लिए हैरिश शील्ड टूर्नामेंट के दौरान सचिन और कांबली ने बल्लेबाजी में इतिहास रच दिया। इन दोनों इस प्रतियोगिता में जेवियर स्कूल के विरुद्ध खेलते हुए 664 रनों की साझेदारी कर विश्व रिकॉर्ड कायम किया। इसी प्रदर्शन के चलते दोनों क्रिकेटरों को भारत की राष्ट्रीय टीम में बहुत कम उम्र में जगह मिल गई थी। 
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सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली - फोटो : Twitter
पहले शुरू हुआ सचिन का क्रिकेट करियर 
इस प्रदर्शन के बाद सचिन तेंदुलकर को साल 1989 में भारतीय टीम में जगह मिल गई। साल 1992 आते-आते तेंदुलकर टेस्ट क्रिकेट में एक हजार रन बनाकर सुर्खियां बटोर चुके थे। वहीं 1993 में टेस्ट डेब्यू करने वाले कांबली ने 14 टेस्ट मैचों में एक हजार रन बनाकर नया कीर्तिमान रच दिया था। 

वड़ा पाव खाने में होती थी होड़
विनोद कांबली के अनुसार, कैंटीन में दोनों खिलाड़ियों का पसंदीदा डिश वड़ा पाव था। इस दोनों खिलाड़ियों में अक्सर इस बात को लेकर शर्त लगाई जाती थी कि कौन कितने खाएगा। कहा जाता है कि सचिन के 100 रन पूरे होने पर विनोद उन्हें 10 बड़ा पाव खिलाते थे। ठीक यही सचिन भी कांबली के लिए करते थे। 



सचिन को हराने में आता था मजा
विनोद कांबली ने एक बार इंटरव्यू में कहा था कि मुझे सचिन को हराने में काफी मजा आता था। चाहे वह क्रिकेट का मैदान हो या स्कूल। कांबली के मुताबिक सचिन को हमेशा पंजा लड़ाकर ताकत दिखाने का बहुत शौक था। 

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सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली - फोटो : Twitter
जुदा हुईं सचिन-कांबली की राहें
सचिन तेंदुलकर लगातार क्रिकेट की बुलंदियां छू रहे थे। वहीं विनोद कांबली को टीम इंडिया में जगह बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था। कुल मिलाकर साल 2000 तक कांबली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेले। इस दौरान एक इंटरव्यू में कांबली ने कहा कि करियर के दौरान सचिन ने उनकी ज्यादा मदद नहीं की। इस बात से मास्टर ब्लास्टर तेंदुलकर काफी खफा हुए और बाद में दोनों की दोस्ती में दरार आ गई। 

आठ साल बाद फिर एक हुए सचिन-कांबली
2008-2009 के दौरान एक किताब के विमोचन के दौरान सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली एक साथ आए थे। उसके बाद बाद दोंनों के रिश्तों पर जमी बर्फ पिघल गई। इस दौरान कांबली ने कहा था कि उनके बीच दूरियां मिट गई हैं और कोई मतभेद नहीं है। कांबली ने कहा था कि उन्हें खुशी है कि वे दोनों फिर करीब आ गए हैं। दोनों ने एक दूसरे को गले लगाया। दोनों वापस से दोस्त बन गए। 

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सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली - फोटो : Twitter
कांबली का करियर
1991 में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू करने के बाद भारत के लिए 104 वनडे और 17 टेस्ट खेलने के बावजूद कांबली का अंतरराष्ट्रीय करियर एक दशक भी नहीं चल सका। कांबली ने 17 टेस्ट में 54.20 की औसत से 1084 रन बनाए थे। इनमें चार शतक और तीन अर्धशतक शामिल हैं। इसके अलावा 104 वनडे में उन्होंने 32.59 की औसत से 2477 रन बनाए। इनमें दो शतक और 14 अर्धशतक शामिल हैं। इसके अलावा 129 प्रथम श्रेणी मैचों में उन्होंने 59.67 की औसत से 9965 रन बनाए। इनमें 35 शतक और 44 अर्धशतक शामिल हैं। इसके अलावा 221 लिस्ट-ए मैचों में कांबली ने 41.24 की औसत से 6476 रन बनाए। इनमें 11 शतक और 35 अर्धशतक शामिल हैं।

सचिन का करियर
जहां सचिन खेल के इतिहास में एक महान नाम बन गए, वहीं कांबली अपने करियर की शानदार शुरुआत का फायदा नहीं उठा पाए। हाल के दिनों में उन्हें चलने में दिक्कत होने लगी है और ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं, जहां वह गिर गए। इससे फैंस उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। अपने शानदार करियर के दौरान सचिन ने 664 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 48.52 की औसत से 34,357 रन बनाए। सचिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक 100 शतक और 164 अर्धशतक बनाए हैं। वह शतकों का शतक लगाने वाले एकमात्र खिलाड़ी हैं। टेस्ट क्रिकेट के अलावा सचिन ने वनडे फॉर्मेट में भी कई रिकॉर्ड बनाए हैं। वनडे में 44.83 के औसत, 49 शतक और 96 अर्धशतक के साथ 18,426 रन और टेस्ट में 53.78 के औसत, 51 शतक और 68 अर्धशतक के साथ 15,921 रन बनाए।

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सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली - फोटो : Twitter
आचरेकर के स्मारक अनावरण पर कांबली का अजीबोगरीब व्यवहार
इसी महीने की तीन तारीख को मुंबई के प्रसिद्ध शिवाजी पार्क में दिग्गज क्रिकेट कोच रमाकांत आचरेकर के स्मारक का अनावरण किया गया। इस मौके पर सचिन तेंदुलकर और कांबली दोनों पहुंचे थे। कांबली की तबीयत इतनी खराब थी कि वह अपनी सीट से उठ तक नहीं पा रहे थे। उन्होंने कुछ देर तक सचिन का हाथ पकड़ा और कुछ मजाक मस्ती चली, लेकिन इसके बाद सचिन वहां से आगे बढ़ गए। हालांकि, इस मुलाकात के दौरान कांबली के बगल में बैठे शख्स ने सचिन को हाथ छुड़वाने और आगे बढ़ने के लिए कहा। इस अजीबोगरीब मुलाकात को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चाएं हो रही हैं। इसके बाद दोनों स्टेज पर भी खड़े मिले। वहां, कांबली सचिन के सिर पर हाथ फेरते दिखे। इसके काफी वीडियोज वायरल हो रहे हैं।

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सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली - फोटो : Twitter
प्रवीण आमरे ने बताई थी वजह
कांबली के पास टैलेंट तो था, लेकिन एक सफल एथलीट बनने के लिए सिर्फ प्रतिभा काफी नहीं होती। प्रवीण आमरे बताते हैं- अकेले प्रतिभा आपको शीर्ष पर नहीं ले जा सकती। तीन डी - अनुशासन, दृढ़ संकल्प और समर्पण - महत्वपूर्ण हैं। कम उम्र में ग्लैमर और पैसा भी आपके करियर को बेपटरी करने के लिए काफी है। आमरे के मुताबिक, 'जब एक क्रिकेटर कम उम्र में ज्यादा कमाने लगता है, तो वह पूरा ध्यान खो देता है। यह महत्वपूर्ण है कि आप पैसे का प्रबंधन करना जानते हों, अच्छे दोस्त बनाएं और क्रिकेट को प्राथमिकता दें।' सचिन के पास टैलेंट भले ही कांबली से कम रहा हो, लेकिन वह अपने खेल के प्रति अनुशासित, दृढ़ संकल्पित और समर्पित रहे। सचिन ने अपने करियर की गंभीरता से लिया और सिर्फ उसी पर फोकस किया, वहीं कांबली कभी अपनी गर्लफ्रेंड तो कभी किसी और वजह से चर्चा में रहे।

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द्रविड़ का कांबली पर बयान - फोटो : Twitter
द्रविड़ ने बताई थी यह वजह
हाल ही में राहुल द्रविड़ का भी एक बयान कांबली को लेकर सामने आया था। उन्होंने बताया था कि ऐसी क्या वजह रही, जिसकी वजह से कांबली सचिन से पीछे रह गए। द्रविड़ की इस पुरानी क्लिप में वह विनोद कांबली के नाम का उल्लेख करते हुए टैलेंट की परिभाषा पर अपने विचार साझा करते दिख रहे हैं। द्रविड़ ने वायरल क्लिप में उदाहरण दिया कि कैसे विनोद कांबली में गेंद को हिट करने की अविश्वसनीय क्षमता थी, लेकिन शायद उनके पास अन्य क्षेत्रों में प्रतिभा नहीं थी, जिसकी वजह से वह नहीं समझ सके कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर होने के लिए क्या करना पड़ता है।

ये कारक भी हैं महत्वपूर्ण
द्रविड़ ने कहा, 'मुझे लगता है कि हम प्रतिभा को गलत आंकते हैं। हम प्रतिभा के रूप में क्या देखते हैं? मैंने भी वही गलती की है। हम लोगों की गेंद को हिट करने की क्षमता से प्रतिभा का न्याय करते हैं। क्रिकेट की गेंद की टाइमिंग या कितने अच्छे से किसी ने हिट किया, इससे जांचते हैं। यही एकमात्र चीज है जिसे हम प्रतिभा के रूप में देखते हैं। लेकिन दृढ़ संकल्प, साहस, अनुशासन और स्वभाव जैसी चीजें भी प्रतिभा हैं। जब हम प्रतिभा को आंकते हैं, तो मुझे लगता है कि हमें पूरे पैकेज को देखना होगा।'



द्रविड़ ने कहा, 'यह समझाना कठिन है, लेकिन कुछ लोगों के पास सिर्फ टाइमिंग और बॉल-स्ट्राइकिंग की क्षमता है। सौरव गांगुली के पास सिर्फ कवर ड्राइव लगाने की क्षमता थी। उनके पास यह नैसर्गिक था। आप देख सकते हैं। सचिन और वीरू के पास भी कुछ क्षमताएं थीं। आप गौतम (गंभीर) जैसे व्यक्ति के बारे में ऐसा नहीं कहेंगे जितना आप इन अन्य लोगों के लिए कहेंगे। ऐसा नहीं है कि गौतम कम सफल हैं। तो यही हम प्रतिभा के रूप में देखते हैं। हम वास्तव में प्रतिभा के दूसरे पक्ष को नहीं देखते हैं। हम कहते हैं एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी टीम में जगह नहीं बना पाया। हम हमेशा इस तरफ देखते हैं लेकिन शायद उसके पास अन्य प्रतिभाएं नहीं थीं।'

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सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली - फोटो : Twitter
कांबली-सचिन के बीच अंतर
द्रविड़ ने कहा, 'मैं यह बोलने से कतराता हूं, लेकिन विनोद शायद उन सबसे अच्छे लोगों में से एक हैं जिनसे मैं मिला हूं। विनोद के पास गेंद को हिट करने की अविश्वसनीय क्षमता थी। मुझे राजकोट का मैच याद है, विनोद ने जवागल श्रीनाथ और अनिल कुंबले के खिलाफ 150 रन बनाए थे। यह अविश्वसनीय था। कुंबले जब गेंदबाजी के लिए आए तो पहली गेंद पर कांबली ने उन्हें सीधे दीवार पर मारा। राजकोट में पत्थर की दीवार हुआ करती थी। कांबली ने लंबा शॉट मारा और गेंद जब दीवार पर लगी तो लगा की धमाका हुआ। मेरा मतलब है, हम सभी चौंक गए थे। हम सोच रहे थे कि वाह यह अद्भुत शॉट था। लेकिन शायद उनके पास अन्य क्षेत्रों में यह समझने की प्रतिभा नहीं थी कि एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर होने के लिए, तनाव और दबाव से निपटने के लिए क्या करना पड़ता है। मैं केवल अनुमान लगा सकता हूं, लेकिन शायद सचिन के पास इतना कुछ था। यही वजह है कि सचिन आज जहां हैं, वहां हैं।'
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