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Sachin Tendulkar: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से परिवार के साथ मिले सचिन तेंदुलकर, भेंट की टेस्ट जर्सी, वीडियो
Thu, 06 Feb 2025 05:49 PM IST
Mayank Tripathi
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Mayank Tripathi
Updated Thu, 06 Feb 2025 05:49 PM IST
सार
सचिन तेंदुलकर ने गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से उनके आवास पर मुलाकात की। इस दौरान उनका परिवार भी मौजूद रहा।
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सचिन तेंदुलकर-राष्ट्रपति मुर्मू
- फोटो : ANI
विस्तार
भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से उनके आवास पर मुलाकात की। इस दौरान उनका परिवार भी मौजूद रहा। पूर्व खिलाड़ी ने इस मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति को अपनी टेस्ट जर्सी भेंट की।
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#WATCH | Delhi: Cricket legend Sachin Tendulkar and family meet President of India Droupadi Murmu at Rashtrapati Bhavan. pic.twitter.com/bPdqYFISQ7
— ANI (@ANI) February 6, 2025विज्ञापन
सचिन ने राष्ट्रपति के साथ साझा की खेल की पुरानी यादें
इस दौरान सचिन ने अपने खेल की पुरानी यादों को साझा किया। उन्होंने बताया कि साझेदारी हमेशा विश्वास से बढ़ती है और वह जानते थे कि किसी खिलाड़ी से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करवाने के लिए उसे किस तरह से नियंत्रित किया जाए। उन्होंने बताया कि वह जानते थे कि वीरेंद्र सहवाग को आक्रामक तेवर दिखाने और रक्षात्मक होकर खेलने के लिए कैसे नियंत्रित किया जा सके और युवराज सिंह को कैसे प्रेरित किया जाए। टेस्ट और वनडे में क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी तेंदुलकर गुरुवार को 'राष्ट्रपति भवन विमर्श श्रृंखला' सम्मेलन में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने इस बारे में बात की कि कैसे खेल सभी के साथ समान व्यवहार करता है।
तेंदुलकर ने कहा, आप अच्छी फॉर्म में हो सकते हैं लेकिन हो सकता है कि कोई और नहीं है तथा ऐसा हो सकता है कि कोई और अच्छी फॉर्म में है लेकिन आप नहीं हैं। एक टीम के रूप में आपको अच्छे और बुरे समय में एक-दूसरे का साथ देना चाहिए। आपको अपने साथी पर भरोसा करने की जरूरत है।
इस दौरान सचिन ने अपने खेल की पुरानी यादों को साझा किया। उन्होंने बताया कि साझेदारी हमेशा विश्वास से बढ़ती है और वह जानते थे कि किसी खिलाड़ी से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करवाने के लिए उसे किस तरह से नियंत्रित किया जाए। उन्होंने बताया कि वह जानते थे कि वीरेंद्र सहवाग को आक्रामक तेवर दिखाने और रक्षात्मक होकर खेलने के लिए कैसे नियंत्रित किया जा सके और युवराज सिंह को कैसे प्रेरित किया जाए। टेस्ट और वनडे में क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी तेंदुलकर गुरुवार को 'राष्ट्रपति भवन विमर्श श्रृंखला' सम्मेलन में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने इस बारे में बात की कि कैसे खेल सभी के साथ समान व्यवहार करता है।
तेंदुलकर ने कहा, आप अच्छी फॉर्म में हो सकते हैं लेकिन हो सकता है कि कोई और नहीं है तथा ऐसा हो सकता है कि कोई और अच्छी फॉर्म में है लेकिन आप नहीं हैं। एक टीम के रूप में आपको अच्छे और बुरे समय में एक-दूसरे का साथ देना चाहिए। आपको अपने साथी पर भरोसा करने की जरूरत है।
सचिन ने सुनाए पुराने किस्से
उन्होंने दर्शकों को अपने खेलने के दिनों के किस्से सुनाए। तेंदुलकर ने कहा कि हर टीम में अलग-अलग तरह के खिलाड़ी होते हैं और उनसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करवाने के लिए उन्हें समझना जरूरी है। उन्होंने याद करते हुए कहा, सहवाग की बात करें तो मैं उससे जो चाहता था, वह उसके विपरीत काम करता था। इसलिए मैं वीरू से कुछ ओवर तक रक्षात्मक खेल चाहता था तो मैं उससे कहता था कि ‘वीरू जाओ और गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाओ और बड़े छक्के लगाओ। तब वीरू कहता था ‘नहीं पाजी, मुझे लगता है कि मुझे चार ओवर तक रक्षात्मक खेल दिखाना चाहिए और फिर छक्के मारने की कोशिश करनी चाहिए। वीरू से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करवाने के लिए मुझे इसके विपरीत कहना पड़ता था। मैं मुस्कुराता था क्योंकि मुझे जो चाहिए वो मिल गया होता।
इसी तरह उन्होंने याद किया कि 2011 विश्व कप की शुरुआत से पहले युवराज थोड़े कम ऊर्जावान लग रहे थे और लेकिन तब उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि इस टूर्नामेंट के बाद उन्हें कैंसर हो जाएगा। तेंदुलकर ने कहा, मैंने युवी को रात्रिभोज पर बुलाया और उससे पूछा कि वह कम ऊर्जावान क्यों दिख रहा है। उसने कहा, पाजी मैं गेंद को सही से टाइम नहीं कर पा रहा हूं। मैंने उससे कहा कि बल्लेबाजी को भूलकर क्षेत्ररक्षण पर ध्यान दो। क्षेत्ररक्षण के लिए कुछ लक्ष्य निर्धारित करो।
उन्होंने दर्शकों को अपने खेलने के दिनों के किस्से सुनाए। तेंदुलकर ने कहा कि हर टीम में अलग-अलग तरह के खिलाड़ी होते हैं और उनसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करवाने के लिए उन्हें समझना जरूरी है। उन्होंने याद करते हुए कहा, सहवाग की बात करें तो मैं उससे जो चाहता था, वह उसके विपरीत काम करता था। इसलिए मैं वीरू से कुछ ओवर तक रक्षात्मक खेल चाहता था तो मैं उससे कहता था कि ‘वीरू जाओ और गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाओ और बड़े छक्के लगाओ। तब वीरू कहता था ‘नहीं पाजी, मुझे लगता है कि मुझे चार ओवर तक रक्षात्मक खेल दिखाना चाहिए और फिर छक्के मारने की कोशिश करनी चाहिए। वीरू से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करवाने के लिए मुझे इसके विपरीत कहना पड़ता था। मैं मुस्कुराता था क्योंकि मुझे जो चाहिए वो मिल गया होता।
इसी तरह उन्होंने याद किया कि 2011 विश्व कप की शुरुआत से पहले युवराज थोड़े कम ऊर्जावान लग रहे थे और लेकिन तब उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि इस टूर्नामेंट के बाद उन्हें कैंसर हो जाएगा। तेंदुलकर ने कहा, मैंने युवी को रात्रिभोज पर बुलाया और उससे पूछा कि वह कम ऊर्जावान क्यों दिख रहा है। उसने कहा, पाजी मैं गेंद को सही से टाइम नहीं कर पा रहा हूं। मैंने उससे कहा कि बल्लेबाजी को भूलकर क्षेत्ररक्षण पर ध्यान दो। क्षेत्ररक्षण के लिए कुछ लक्ष्य निर्धारित करो।