एक क्रिकेटर जिसका बल्ला ही नहीं बल्कि आक्रामक तेवर भी जमकर मैदान पर बात करते। दो विश्व कप के फाइनल खेले और दोनों में ही सर्वाधिक स्कोरर रहा। उसकी बेशकीमती पारी से बनाई हुई मजबूत नींव के दम पर ही भारत दो बार विश्व चैंपियन बना, लेकिन कुछ चमकते नामों के आगे पसीने से लथपथ उसका चेहरा भीड़ में कहीं ओझल हो गया। वह खिलाड़ी जो बद्तमीजी करने वाले विरोधी खिलाड़ियों को पलटकर दोगुनी बद्तमीजी से जवाब दे देता। देश के लिए क्रिकेट खेला और जितने भी दिन खेला भयंकर एग्रेशन के साथ खेला। भारत को विश्व चैंपियन बनाने के लिए मिट्टी में लोटपोट हो गया। दुनिया इस खिलाड़ी को गौतम गंभीर के नाम से जानती है।
गौतम गंभीरः वो बल्लेबाज जिसकी विश्व विजेता पारी श्रीसंत के कैच और धोनी के छक्के में खो गई
गौतम गंभीर बाएं हाथ का वो कलात्मक बल्लेबाज जिसे पैरों का इस्तेमाल करना बेहद पसंद था, किसी भी बेहतरीन गेंद को बैकफूट पर जाकर शानदार कट के सहारे प्वाइंट और थर्ड मैन के बीच से चार रन के लिए सरपट दौड़ा देता। गेंदों को तो उसने खूब सीमा रेखा के पार दौड़ाया पर बदले में गंभीर को कभी वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वह हकदार थे। गंभीर की ऐसी ही दो विश्वस्तरीय पारियां हैं, जो किसी और की चमक में दब गईं। वो दो पारियां जो लोगों के जुबां पर नमक की तरह चढ़ीं और फिर एक चटखारे के बाद गायब हो गईं। पहले पहली पारी का किस्सा सुनाते हैं आपको।
साल 2011 वानखेड़े स्टेडियम विश्व कप का फाइनल सचिन-सहवाग पवेलियन लौट चुके थे। देश हाथ जोड़े और सूखे होंठ लिए टीवी पर नजरें गड़ाए था। सचिन और सहवाग के आउट होने के बाद गंभीर ने मोर्चा संभाल लिया था। गौती के जमते ही धीरे-धीरे स्कोरबोर्ड भी चलने लगा। वर्ल्ड कप का फाइनल अगर आपने देखा होगा, तो याद होगा कि गंभीर कैसे रन आउट होते-होते बचे थे। रन आउट से बचने के लिए गौती ने क्रीज में गोता लगा दिया था, उन्हें अपनी कीमती विकेट का अंदाजा था। वापस उठे और धूल में सनी जर्सी की परवाह किए बिना फिर भिड़ गए।
गंभीर ने 97 रन बनाए थे, वो 97 रन जिसने भारत विश्व चैंपियन बनने के लिए जमीन तैयार की। वो 97 रन जिसने धोनी को विनिंग छक्का लगाने की आजादी दी, लेकिन गंभीर को जो नहीं मिला वो था उसके 97 रन की सही कीमत। जीत के बाद धोनी ने ट्रॉफी उठाई, सचिन ने कंधे पर सवार होकर मैदान का चक्कर काटा, लेकिन गंभीर एक मजबूत दीवार की नींव की तरह जमीन में दबे रह गए, मिट्टी में सनी उनकी टी-शर्ट चमचमाती रात में लोगों के आंखों से ओझल हो गई। 97 रन के स्कोर पर क्लीन बोल्ड होने के बाद गंभीर ने दोनों हाथ हवा में उठा दिए थे, मानों कोई बहुत बड़ा मिशन निपट गया हो।
दूसरी पारी साल 2007 दक्षिण अफ्रीका का जोहांसबर्ग मैदान और पहले टी-20 विश्व कप का फाइनल। भारत बनाम पाकिस्तान। पारी ओपन करने गंभीर आए और उनके साथ थे यूसुफ पठान। गंभीर ने एक छोर पकड़कर रन पीटने शुरू कर दिए, लेकिन दूसरे छोर पर विकेट लगातार गिरते रहे। टीम मंझधार में फंसी और गौती ने फिर अपने जुझारू खेल से टीम को किनारे लगा दिया। उस फाइनल में पूरी टीम का टोटल था 157 और गंभीर ने बनाए 54 गेंदों में 75।
अगले दिन देश के हर एक अखबार में तस्वीरें छपी, आखिरी ओवर में मिस्बाह का कैच लपकते श्रीसंत, मैदान पर जीत के बाद अपने लंबे बालों को लहराते दौड़ते धोनी, गंभीर एक बार फिर खूबसूरत रंगों में रंगी चमकती दीवार की नींव बनकर रह गए।
गंभीर ने क्रिकेट को अलविदा कह दिया है, लेकिन गंभीर के तेवर आज भी दिमाग में ताजा हैं। अफरीदी को मुंह पर ही दमभर गलियां उड़ेल दी थीं। वॉटसन से टकराकर, एक या दो मैच के लिए बैन हो गया, लेकिन तेवर नहीं बदले।
गौतम गंभीर, जो क्रीज से दो कदम आगे निकलकर गेंद को इनसाइड आउट बाउंड्री के बाहर पहुंचा देते। वह गौतम गंभीर जो धड़ाधड़ गिरते विकेटों के बीच एक छोर पर खूंटा गाड़ देते। वह गौतम गंभीर जिसने विश्व विजेता पारियां खेली, लेकिन टीम ने उन्हें शान से अलविदा कहने का मौका नहीं दिया। वह गौतम गंभीर जो बड़े मैच के हीरो खिलाड़ी थे, लेकिन उन्हें उतना क्रेडिट नहीं मिल पाया, जिसके वे हकदार थे। खैर.. हैपी बर्थडे गौती...