रवि शास्त्री एक बार फिर टीम इंडिया के मुख्य कोच बन गए हैं। शुक्रवार को मुंबई में 1983 विश्व कप विजेता कप्तान कपिल देव की अगुआई वाली तीन सदस्यीय क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) ने शास्त्री समेत छह उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया, जिसमें शास्त्री के नाम पर मुहर लगाई गई। इसके साथ ही वह अपने पद पर अगले दो साल तक बने रहेंगे। वह तीसरी बार टीम इंडिया के कोच चुने गए हैं।
29 साल के इतिहास में भारत ने देखे 16 कोच, रवि शास्त्री को तीसरी बार मिली जिम्मेदारी
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बिशन सिंह बेदी (1990-91)
पूर्व भारतीय स्पिनर बिशन सिंह बेदी का भारतीय राष्ट्रीय टीम के कोच के रूप में एक संक्षिप्त कार्यकाल था। वह पहले व्यक्ति थे जिन्हें इस काम के लिए पूर्णकालिक क्षमता में नियुक्त किया गया था। उनके कार्यकाल में भारतीय टीम का प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं रहा था।
अब्बास अली बेग (1991-92)
बिशन सिंह बेदी के बाद अब्बास अली बेग को भारतीय टीम का कोच नियुक्त किया गया। 1991-92 में भारत का ऑस्ट्रेलियाई दौरा काफी निराशाजनक रहा था। भारत को पांच में से चार टेस्ट मैचों में हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद भारतीय टीम 1992 विश्व कप के सेमीफाइनल में भी प्रवेश नहीं कर पाई। अब्बास अली बेग और मैनेजर को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया।
अजीत वाडेकर (1992-96)
अब्बास अली बेग के बाद भारतीय टीम की कमान अजीत बाडेकर के हाथों में दी गई। भारत की ओर से टेस्ट एवं वनडे क्रिकेट खेलने वाले अजीत वाडेकर 1992 से 1996 तक भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच रहे। कोच के रूप में अजीत वाडेकर के कार्यकाल के दौरान सचिन तेंदुलकर और मोहम्मद अजहरूद्दीन टेस्ट और वनडे टीम के कप्तान थे।
संदीप पाटिल (1996)
1996 विश्व कप में वह अजीत वाडेकर के असिस्टेंट मैनेजर थे। वह 1996 में इंग्लैंड में मोहम्मद अजहरुद्दीन और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच हुए झगड़े के दौरान टीम के कोच थे। इसके बाद सिद्धू दौरा बीच में ही छोड़ भारत आ गए थे। श्रीलंका में चार देशों के टूर्नामेंट के दौरान एक मैच के दौरान जब सचिन तेंदुलकर भारत के कप्तान थे तब हालात और खराब हुए। भारत के ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में नौ विकेट गिर चुके थे। तभी कुंबले स्लॉग शॉट खेलकर आउट हो गए। पाटिल ने इस पर नाराजगी जताई। तेंदुलकर और अन्य सीनियर खिलाड़ियों को यह अच्छा नहीं लगा। टोरंटो में सहारा कप में पाकिस्तान से हार के साथ ही पाटिल को उनके पद से हटा दिया गया।