अनुभवी खिलाड़ी रजत भाटिया ने कहा क्रिकेट को अलविदा, हर प्रारूप से लिया संन्यास
साल 2007 में जब दिल्ली ने रणजी ट्रॉफी का खिताब जीता तो रजत भाटिया की उसमें अहम भूमिका थी। यह 1991-92 के बाद पहला मौका था, जब दिल्ली रणजी चैंपियन बनी थी। 2007 के सीजन में भाटिया ने सात मुकाबलों में 512 रन बनाए थे।
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अनुभवी घरेलू क्रिकेटर रजत भाटिया ने क्रिकेट के हर फॉर्मेट को अलविदा कह दिया। साल 2000 में अपने करियर की शुरुआत करने वाले भाटिया को जन्म दिल्ली में हुआ। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 6482 रन बनाने के साथ-साथ 137 विकेट चटकाने वाला यह ऑलराउंडर नॉर्थ जोन का बड़ा नाम था, लेकिन कभी टीम इंडिया में एंट्री नहीं मिल पाई।
तमिलनाडु से अपने घरेलू सफर की शुरुआत करने वाले रजत ने दो सीजन के बाद अपनी घरेलू टीम का दामन थाम लिया। साल 2015 तक दिल्ली के लिए खेलने के बाद रजत ने राजस्थान और उत्तराखंड का रुख किया। 112 रणजी मैच में दिल्ली के लिए 81 मुकाबले खेलने वाले रजत घरेलू क्रिकेट में निरंतर अच्छा प्रदर्शन करते रहे, लेकिन कभी राष्ट्रीय चयनकर्ताओं को प्रभावित नहीं कर पाए।
गेंद और बल्ले दोनों से भाटिया ने लगातार अच्छा खेल दिखाया। भाटिया स्लो मीडियम गेंदबाजी करते थे, उन्होंने आईपीएल मे भी अपना जौहर दिखाया। 2008 से 2017 तक हर सीजन में वह इस प्रतिष्ठित लीग में नजर आए। दिल्ली डेयरडेविल्स के अलावा कोलकाता नाइटराइडर्स, राजस्थान रॉयल्स और राइजिंग पुणे सुपरजायंट्स में भी रजत भाटिया का योगदान रहा।