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टीम इंडिया में चुने जाने का पूरा यकीन था: रसूल
जम्मू/अमित वर्मा
Updated Sat, 06 Jul 2013 09:35 AM IST
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कश्मीर घाटी के छोटे से कसबे बिजबेहाड़ा के युवा क्रिकेटर परवेज रसूल ने जिंबाव्वे जाने वाली टीम इंडिया का हिस्सा बनने के साथ ही इतिहास रच दिया।
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परवेज बारूद या पत्थरों से नहीं, कलम, गेंद और हौसलों से जन्नत की फिजां को खुशगवार बना रहे हैं।
यह नया और काबिले फख्र कश्मीर बड़ी उम्मीदें जगा रहा है। शुक्रवार को टीम की घोषणा होने के तुरंत बाद अमर उजाला के साथ अपनी खुशी बांटते हुए परवेज ने कहा कि उन्हें यकीन था कि टीम इंडिया में उनका चयन जरूर होगा।
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उसने कहा, ‘ईमानदारी से कहूं तो वन डे टीम में चुने जाने का मुझे पूरा भरोसा था। इसका यह मतलब यह हरगिज नहीं है कि मैं अतिविश्वास से भरा हूं।
पर मैं सोचता था कि यदि चयनकर्ता कुछ नियमित खिलाड़ियों को विश्राम देते हैं तो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बनने के लिए जिंबाब्वे दौरा मेरे लिए बेहतर अवसर हो सकता है। और ऐसा हुआ भी।’
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रसूल पिछले सीजन में अपने प्रदर्शन को राष्ट्रीय टीम में पहुंचने की सीढ़ी मान रहे हैं।
अपनी उपलब्धि को परवेज ने पूरे राज्य के लिए गौरव बताया है। उनका कहना है, ‘इंशा अल्लाह अब टीम इंडिया में जम्मू-कश्मीर का नाम नियमित रूप से शामिल रहेगा।’ वह रविवार को बंगलुरु स्थित नेशनल क्रिकेट अकादमी के लिए रवाना हो रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हाल ही में इंडिया ‘ए’ टीम की ओर से पहले अभ्यास मैच में मात्र 45 रन देकर सात प्रमुख बल्लेबाजों को पवेलियन भेजकर सुर्खियां बटोरने वाले परवेज का कहना है कि अभी तो शुरुआत है। लंबा सफर तय करना है।
वह चाहते हैं कि उनकी तरह रियासत के युवा आगे आएं और प्रदेश के साथ देश का नाम रोशन करें।
इससे पहले परवेज आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2013 की भारतीय टीम के प्रस्तावित तीस खिलाड़ियों की सूची में शामिल हुए। मगर टीम इंडिया की फाइनल सूची में जगह पाने से चूक गए।
वे हताश नहीं हुए और उनकी कोशिशों व जुनून ने उन्हें यहां तक पहुंचा ही दिया। परवेज आईपीएल-6 में पुणे वॉरियर्स का हिस्सा थे।
पिछले सीजन में जम्मू-कश्मीर टीम को प्रशिक्षण देने वाले पूर्व भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी ने रसूल को भविष्य का बेहतरीन गेंदबाज करार दिया था।
पिछले रणजी सीजन में आठ मैचों में 33 विकेट हासिल करने वाले दाएं हाथ के ऑफ ब्रेक गेंदबाज ने बल्ले में भी अपनी करामात दिखाते हुए दो शतक जड़े।
परवेज के पिता गुलाम रसूल ने बेटे के इस मुकाम तक पहुंचने के लिए जेकेसीए के अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री डा. फारूक अब्दुल्ला का धन्यवाद किया। मां शमीमा ने कहा कि उनके लिए यह सबसे बड़ी खुशी की बात है।
बहन रूबी और भाई आसिफ (क्रिकेटर) की खुशी का तो कोई पारावार ही नहीं है। डॉ. फारुख अब्दुल्ला ने परवेज को मुबारकबाद देते हुए उनसे और टीम इंडिया से जिंबाब्वे दौरे के दौरान बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद जताई।