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ड्यूक गेंद: इस गेंद से अभ्यास करने का लाभ कीवी खिलाड़ियों को इंग्लैंड और भारत के खिलाफ मिलेगा- डेवोन कॉनवे

Sun, 23 May 2021 12:48 PM IST
प्रियंका तिवारी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, वेलिंग्टन
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, वेलिंग्टन Published by: प्रियंका तिवारी Updated Sun, 23 May 2021 12:48 PM IST
सार

न्यूजीलैंड के बल्लेबाज डेवोन कॉनवे का कहना है कि स्वदेश में ड्यूक गेंदों से प्रैक्टिस करने का फायदा आगामी दिनों में इंग्लैंड और भारत के खिलाफ होने वाले क्रिकेट मैचों में मिलेगा।

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New Zealand cricketer Devon Conway said that Practicing with Duke Ball will benefit Kiwi players against England and India
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज दो जून से शुरू होगी। इसके बाद भारत और न्यूजीलैंड के बीच 18 जून से साउथैंप्टन में विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) फाइनल खेला जाएगा। इस बीच न्यूजीलैंड के बल्लेबाज डेवोन कॉनवे का बयान आया है। दरअसल, कॉनवे का मानना है कि न्यूजीलैंड में ड्यूक गेंदों से अभ्यास करने का फायदा इंग्लैंड के खिलाफ दो टेस्ट मैचों और भारत के खिलाफ डब्ल्यूटीसी के फाइनल में मिलेगा। 

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अब तक नहीं खेले टेस्ट मैच
बता दें, न्यूजीलैंड की 20 सदस्यीय टीम में कॉनवे उन तीन खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने अब तक टेस्ट मैच नहीं खेले हैं। उनका मानना है कि इस दौरे से पहले लिंकन में अभ्यास शिविर का काफी फायदा मिलेगा। न्यूजीलैंड स्वदेश में कूकाबुरा गेंद से खेलता है। कॉनवे ने ऑनलाइन आयोजित किए गए एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'यह हमारे लिए बेहद फायदेमंद रहा। हमें ड्यूक गेंदों से खेलने और उसे समझने का मौका मिला। इससे हमें अपनी रणनीति तैयार करने में मदद मिली।' 
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अधिक स्विंग करती है ड्यूक गेंद
उन्होंने आगे कहा, 'लेकिन मुझे लगता है कि इससे (गेंद बदलने) बहुत अधिक परिवर्तन नहीं होता है। हम जानते हैं कि ड्यूक गेंद कूकाबुरा की तुलना में थोड़ा अधिक स्विंग करती है, लेकिन आपको गेंद का सामना करना होता है और एक रणनीति के साथ क्रीज पर उतरकर उस पर अमल करना होता है।' दक्षिण अफ्रीका में जन्मे इस खिलाड़ी को सीमित ओवरों की क्रिकेट में प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद टेस्ट टीम में चुना गया।
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टॉम लैथम और रोस टेलर से सीखने की है इच्छा
स्वदेश में अभ्यास शिविर में कॉनवे ने स्पिन गेंदबाजों के सामने भी खूब अभ्यास किया ताकि उन्हें डब्ल्यूटीसी फाइनल में रविचंद्रन अश्विन जैसे गेंदबाजों का सामना करने में मदद मिले। अपने इस पहले टेस्ट दौरे में यह 29 वर्षीय खिलाड़ी टॉम लैथम और रोस टेलर जैसे स्थापित बल्लेबाजों से काफी कुछ सीखना चाहता है। उन्होंने कहा, 'यह मेरे लिए सीखने का बहुत अच्छा मौका है कि कैसे रणनीति तय करनी है और उस पर अमल करना है। कई खिलाड़ी टेस्ट टीम में लंबे समय से हैं और उनके अनुभवों से कुछ सीखना अच्छा है।'

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