{"_id":"59cbbfac4f1c1b65548b4ab5","slug":"mv-sridhar-steps-down-as-general-manager-of-cricket-operations","type":"story","status":"publish","title_hn":"आरोपों में घिरे एमवी श्रीधर को देना पड़ा इस्तीफा, CEO जौहरी संभालेंगे क्रिकेट ऑपरेशन्स का काम ","category":{"title":"Cricket News","title_hn":"क्रिकेट न्यूज़","slug":"cricket-news"}}
आरोपों में घिरे एमवी श्रीधर को देना पड़ा इस्तीफा, CEO जौहरी संभालेंगे क्रिकेट ऑपरेशन्स का काम
amarujala.com- Presented by: नवीन चौहान
Updated Wed, 27 Sep 2017 08:44 PM IST
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बीसीसीआई स्पॉन्सर से जुड़ा सदस्य
बीसीसीआई के जनरल मैनेजर क्रिकेट आपरेशंस और हैदराबाद पूर्व रणजी कप्तान एमवी श्रीधर को आखिर अपने पद से इस्तीफा देना पड़ गया है। उन पर हितों के टकराव और हैदराबाद में स्टेडियम के निर्माण के दौरान पाई गई अनियमित्ताओं में एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से नोटिस दिए जाने का मामला सामने आया था। आरोप है कि ये सभी बातें उन्होंने बीसीसीआई से छुपाई थीं, जिसके चलते सीईओ राहुल जौहरी ने उनको दो बार नोटिस भेजकर जवाब मांगा था। प्रशासकों की समिति (सीओए) ने श्रीधर का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। अगले आदेश तक बोर्ड के जीएम क्रिकेट आपरेशंस का काम अब खुद राहुल जौहरी संभालेंगे।
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श्रीधर 30 सितंबर तक अपने पद पर बने रहेंगे। हैदराबाद के लिए रणजी ट्राफी में छह हजार से अधिक रन बनाने वाले श्रीधर लंबे समय से इस पद पर थे। श्रीधर को सबसे पहला नोटिस बोर्ड ने 19 जुलाई को और अगला नोटिस ठीक एक माह बाद थमाया था। दोनों ही बार सीओए उनकी ओर से दिए गए जवाबों से संतुष्ट नहीं थे। श्रीधर के बोर्ड के मजबूत कर्मियों में थे। उनके काम पर कभी सवाल नहीं उठे, लेकिन बोर्ड के कई आला अधिकारियों को जब सुप्रीम कोर्ट की ओर से हितों के टकराव में घसीटा गया तो इसमें अचानक उनका नाम भी उछल गया।
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कई माह से घिरे थे श्रीधर
जौहरी की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद उन पर पद छोड़ने का दबाव था। इसी दबाव के चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा, जिसे तुरंत स्वीकार भी कर लिया गया। श्रीधर पर आरोप था कि साल 2014 में हैदराबाद के राजीव गांधी क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण में 89.71 करोड़ रुपये की अनियमितताओं के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने भष्टाचार के केस में नोटिस जारी किया था। बोर्ड में जीएम पद स्वीकार करने के दौरान उन्होंने इसका खुलासा नहीं किया था। यही नहीं उन पर यह भी आरोप लगाया गया कि हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन में रहते वह क्रिकेट क्लबों का संचालन करते थे। दो क्लबों के वह मालिक बताए गए। इसका खुलासा भी उन्होंने बोर्ड से नहीं किया। जिसके चलते उन पर हितों के टकराव का मामला बना।
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