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Kohli-Ganguly Controversy: गांगुली पर बरसे वेंगसरकर, कहा- कोहली की कप्तानी के मसले पर उन्हें नहीं बोलना चाहिए था
Thu, 23 Dec 2021 03:07 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Thu, 23 Dec 2021 03:07 AM IST
सार
वेंगसरकर ने कहा कि 1932 में जब पहली बार टीम चुनी गई थी, तब से लेकर अब तक ऐसा ही होता रहा है। एक बार तो हमने पांच टेस्ट मैचों में चार कप्तानों को आजमाते देखा था।
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दिलीप वेंगसरकर
- फोटो : social media
विस्तार
भारत के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर दिलीप वेंगसरकर ने विराट कोहली और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के बीच चल रहे विवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है। वेंगसरकर ने बोर्ड अध्यक्ष सौरव गांगुली पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि विराट को कप्तानी से हटाने के फैसले के बाद गांगुली को चयनकर्ताओं की जगह बोलने की कोई जरूरत नहीं थी।
गांगुली को बयान नहीं देना चाहिए था
वेंगसरकर ने एक अखबार से बातचीत में कहा कि कुछ भी हो टीम चयन और कप्तानी से संबंधित मामलों को चयनकर्ताओं पर ही छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा- गांगुली को इस मामले में नहीं घुसना चाहिए था। वह बीसीसीआई के अध्यक्ष हैं। चयन या कप्तानी को लेकर कोई सवाल आता है, तो चयनकर्ताओं को जवाब देना चाहिए।
गांगुली ने कप्तानी को लेकर क्या बोला था?
गांगुली ने कहा था कि बीसीसीआई और चयनकर्ताओं ने मिलकर फैसला लिया था कि रोहित को सीमित ओवरों की कप्तानी सौंप देनी चाहिए। गांगुली ने कहा था कि बोर्ड ने विराट को टी-20 की कप्तानी नहीं छोड़ने के लिए भी कहा था, लेकिन वह नहीं माने। इसके बाद चयनकर्ताओं को टी-20 और वनडे के दो अलग-अलग कप्तान रखना सही नहीं लगा। विराट टेस्ट में कप्तानी करते रहेंगे। कप्तानी से हटाने से पहले मैंने और चयनकर्ताओं ने विराट से पर्सनली बातचीत की थी।
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विराट ने भी गांगुली को दिया था जवाब
इसके बाद विराट ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिना नाम लिए सौरव गांगुली को जवाब दिया था। उन्होंने कहा था कि कप्तानी से हटाने की जानकारी दक्षिण अफ्रीकी दौरे के लिए टेस्ट टीम चुनने से डेढ़ घंटे पहले दी गई थी। साथ ही बीसीसीआई और चयनकर्ता किसी ने उन्हें टी-20 कप्तानी छोड़ने से नहीं रोका था। विराट के इस बयान के बाद जमकर बवाल उठा था और कयास लगाए जा रहे थे कि विराट और बीसीसीआई के बीच सबकुछ ठीक नहीं है।
सिलेक्शन कमेटी और कोहली को सुलझाना था मसला
वेंगसरकर ने कहा- गांगुली को अपने विचार देने की कोई जरूरत नहीं थी। जब गांगुली ने अपना बयान दिया, तो यह सही है कि विराट भी अपना पक्ष सबके सामने रखना चाहेंगे। मुझे लगता है कि यह बात सिलेक्शन कमेटी के अध्यक्ष और कप्तान के बीच रहनी चाहिए थी। कप्तान को बनाने या हटाने का काम चयनकर्ताओं का होता है। इसमें गांगुली को नहीं आना चाहिए था।
कोहली का सम्मान किया जाना चाहिए
वेंगसरकर ने कहा कि 1932 में जब पहली बार टीम चुनी गई थी, तब से लेकर अब तक ऐसा ही होता रहा है। एक बार तो हमने पांच टेस्ट मैचों में चार कप्तानों को आजमाते देखा था। हालांकि, अब स्थिति बदलनी चाहिए। हमें विराट कोहली का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने देश के लिए काफी कुछ किया है, लेकिन जिस प्रकार बोर्ड ने उनके साथ बर्ताव किया, उन्हें काफी दुख हुआ होगा।
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गांगुली को बयान नहीं देना चाहिए था
वेंगसरकर ने एक अखबार से बातचीत में कहा कि कुछ भी हो टीम चयन और कप्तानी से संबंधित मामलों को चयनकर्ताओं पर ही छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा- गांगुली को इस मामले में नहीं घुसना चाहिए था। वह बीसीसीआई के अध्यक्ष हैं। चयन या कप्तानी को लेकर कोई सवाल आता है, तो चयनकर्ताओं को जवाब देना चाहिए।
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गांगुली ने कप्तानी को लेकर क्या बोला था?
गांगुली ने कहा था कि बीसीसीआई और चयनकर्ताओं ने मिलकर फैसला लिया था कि रोहित को सीमित ओवरों की कप्तानी सौंप देनी चाहिए। गांगुली ने कहा था कि बोर्ड ने विराट को टी-20 की कप्तानी नहीं छोड़ने के लिए भी कहा था, लेकिन वह नहीं माने। इसके बाद चयनकर्ताओं को टी-20 और वनडे के दो अलग-अलग कप्तान रखना सही नहीं लगा। विराट टेस्ट में कप्तानी करते रहेंगे। कप्तानी से हटाने से पहले मैंने और चयनकर्ताओं ने विराट से पर्सनली बातचीत की थी।
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विराट ने भी गांगुली को दिया था जवाब
इसके बाद विराट ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिना नाम लिए सौरव गांगुली को जवाब दिया था। उन्होंने कहा था कि कप्तानी से हटाने की जानकारी दक्षिण अफ्रीकी दौरे के लिए टेस्ट टीम चुनने से डेढ़ घंटे पहले दी गई थी। साथ ही बीसीसीआई और चयनकर्ता किसी ने उन्हें टी-20 कप्तानी छोड़ने से नहीं रोका था। विराट के इस बयान के बाद जमकर बवाल उठा था और कयास लगाए जा रहे थे कि विराट और बीसीसीआई के बीच सबकुछ ठीक नहीं है।
सिलेक्शन कमेटी और कोहली को सुलझाना था मसला
वेंगसरकर ने कहा- गांगुली को अपने विचार देने की कोई जरूरत नहीं थी। जब गांगुली ने अपना बयान दिया, तो यह सही है कि विराट भी अपना पक्ष सबके सामने रखना चाहेंगे। मुझे लगता है कि यह बात सिलेक्शन कमेटी के अध्यक्ष और कप्तान के बीच रहनी चाहिए थी। कप्तान को बनाने या हटाने का काम चयनकर्ताओं का होता है। इसमें गांगुली को नहीं आना चाहिए था।
कोहली का सम्मान किया जाना चाहिए
वेंगसरकर ने कहा कि 1932 में जब पहली बार टीम चुनी गई थी, तब से लेकर अब तक ऐसा ही होता रहा है। एक बार तो हमने पांच टेस्ट मैचों में चार कप्तानों को आजमाते देखा था। हालांकि, अब स्थिति बदलनी चाहिए। हमें विराट कोहली का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने देश के लिए काफी कुछ किया है, लेकिन जिस प्रकार बोर्ड ने उनके साथ बर्ताव किया, उन्हें काफी दुख हुआ होगा।