क्रिकेट खेल भले ही इंग्लैंड में पैदा हुआ हो, लेकिन यह पला-बढ़ा भारत में। आज देश के हर कोने में आईपीएल की धूम मची हुई है। रविवार को 7 बजते ही मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में आईपीएल ट्रॉफी पाने के लिए चेन्नई सुपरकिंग्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच भिड़ंत भी शुरू हो जाएगी। चेन्नई जहां तीसरी बार इस खिताब को पाने के लिए जी-जान लगा देगी तो सनराइजर्स हैदराबाद दूसरी बार चैंपियन बनने का सपना संजोए हुए है।
2 साल के बैन के बाद महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई वाली चेन्नई सुपर किंग्स खिताब से बस एक कदम दूर है। धोनी की टीम अनुभवी खिलाड़ियों की ऐसी फौज बनकर उभरी है, जिसके किले को भेदना हर विरोधी टीम के लिए टेढ़ी खीर साबित हुआ है। आइए इस पैकेज में जानते हैं वह 5 कारण जो पीली जर्सी वालों को इस खिताब का प्रबल दावेदार बनाते हैं।
युवा जोश पर भारी पड़ता अनुभव
शुरुआत में सभी ने इस टीम को 'बूढ़ों की फौज' कहकर खारिज कर दिया था। इस टीम में खिलाड़ियों की औसत उम्र 34 साल के पार है। कप्तान धोनी खुद धोनी 36 साल के हैं, जबकि शानदार फॉर्म में चल रहे अंबाति रायुडू 32, मिस्टर आईपीएल सुरेश रैना 31, शेन वॉटसन और हरभजन सिंह 37 साल के वो बुढ़े शेर हैं, जिन्होंने अपने अनुभव से विरोधियों के दात खट्टे कर दिए।
शानदार फॉर्म में रायुडू
कभी अंडर-19 टीम इंडिया के कप्तान रहे अंबाती रायुडू इस आईपीएल शानदार फॉर्म में चल रहे हैं। चाहे पारी की शुरुआत करनी हो या फिर चौथे क्रम पर आकर टीम की बल्लेबाजी को मजबूती देना, यह 32 वर्षीय खिलाड़ी कप्तान की सभी उम्मीदों पर बखूबी खरा उतरा। टूर्नामेंट में 586 रन बनाकर ऑरेंज कैप की दौड़ में बरकरार रायुडू से फाइनल मुकाबले में टीम को उसी दम-खम की उम्मीद होगी।
फिर लौटा पुराना माही
अपने करियर के आखिरी पड़ाव पर पहुंचे एमएस धोनी ने 15 मुकाबलों में 455 रन बनाए हैं, जिसमें 30 छक्के शामिल हैं। धोनी का यह आठवां फाइनल और बतौर कप्तान सातवां खिताबी मुकाबला होगा। चेन्नई के इस 'थाला' ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अनुभव का कोई सानी नहीं। धोनी की चतुराई और विकेट के पीछे फूर्ती के दम पर चेन्नई सनराइजर्स से कहीं मजबूत नजर आती है।