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ICC World Cup: दिग्गज सुनील गावस्कर ने विश्व कप जीतने के लिए टीम इंडिया को दिया अहम सुझाव, बताया कि कैसे मिली थी 1983 में कामयाबी

Tue, 28 Dec 2021 08:24 PM IST
Rajeev Rai स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rajeev Rai Updated Tue, 28 Dec 2021 08:24 PM IST
सार

दिग्गज क्रिकेटर और पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने टीम इंडिया को आगामी विश्व कप के लिए एक अहम सुझाव दिया है। इसके लिए उन्होंने 1983 के विश्व कप का उदाहरण भी दिया।

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If Indian cricket team can find two allrounders then we have better chance to win upcoming world cup says sunil gavaskar
सुनील गावस्कर

विस्तार

भारतीय क्रिकेट टीम को आईसीसी ट्रॉफी जीते आठ साल हो गए। विराट कोहली की अगुवाई में टीम एक भी आईसीसी टूर्नामेंट जीतने में नाकाम रही। भारतीय टीम ने आखिरी बार 2013 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में चैंपियंस ट्रॉफी जीता था। लेकिन उसके बाद वह ट्रॉफी जीतने के करीब पहुंची लेकिन खिताब से चूक गई। हालांकि अब सीमित ओवरों के क्रिकेट का कप्तान रोहित शर्मा को बनाया जा चुका है और अगले दो साल में दो विश्व कप होने वाले हैं। ऐसे में भारतीय क्रिकेट बोर्ड खिताब जीतने के मौके गंवाना नहीं चाहता है। 

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उधर दिग्गज क्रिकेटर और पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने टीम इंडिया को आगामी विश्व कप के लिए एक अहम सुझाव दिया है। इसके लिए उन्होंने 1983 के विश्व कप का उदाहरण भी दिया। गावस्कर का मानना है कि टीम इंडिया को आगामी टी-20 विश्व कप और फिर भारत में होने वाले 50 ओवरों के विश्व कप को जीतना है तो टीम में कम से कम दो मुख्य ऑलराउंडर्स की जरूरत पड़ेगी। 
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गावस्कर ने स्पष्ट किया कि 1983 के विश्व कप में उनके विजेता बनने का मुख्य कारण ऑलराउंडर ही थे। भारतीय टीम को नई ऊचाईयों तक पहुंचाने में हमेशा से ही ऑलराउंडरों ने अहम भूमिका निभाई है। 1983, 2007 और 2011 के विश्व कप के दौरान भी टीम में काफी ऑलराउंडर्स थे।
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एक अंग्रेजी अख़बार के लिए लिखे कॉलम में गावस्कर ने भारतीय टीम में ऑलराउंडर्स की कमी पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'ये 14 खिलाड़ी और एक मैनेजर वाला स्क्वाड था जिससे हमने कमाल किया। उस समय किसी प्रकार की फिल्डिंग की पाबंदियां नहीं थी, ना ही ओवर में बाउंस गेंद डालने की संख्या को लेकर कोई रोक टोक थी, लाल गेंद का इस्तेमाल होता था जो पुरानी होने के बाद भी इंग्लिश कंडीशन में घूमना बंद नहीं करती थी। वो टीम ऑलराउंडर्स से भरी थी। यही सीमित ओवरों के क्रिकेट टीम की कामयाबी का मूल मंत्र था।'


सुनील गावस्कर ने कहा, 'यहां तक कि साल 2007 के टी-20 विश्व कप और 2011 के 50 ओवरों के विश्व कप में भी भारत के पास ऐसे खिलाड़ी थे जो बल्ले और गेंद दोनों से योगदान दे सकते थे। इसलिए अगर भारत दो अच्छे ऑलराउंडर ढूंढ़ लेता है तो ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी-20 विश्व कप 2022 और इसके बाद 2023 में होने वाले 50 ओवरों के विश्व कप के दौरान हमारे जीतने की अच्छी संभावनाएं होंगी।'

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