नई टेस्ट टीम के लिए चाहिए 12 महीने का वक्त
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विदेशी धरती पर टीम इंडिया ने एक और टेस्ट सीरीज गंवा दी है। ऑस्ट्रेलिया के हाथों 4 मैचों की टेस्ट सीरीज बचाने के लिए भारतीय टीम को मेलबर्न टेस्ट मैच को हर हाल में जीतना था, लेकिन वह ड्रॉ कराने में कामयाब रही।
मेलबर्न टेस्ट के ड्रॉ होते ही भारत ने टेस्ट सीरीज में बराबरी का मौका गंवा दिया। इस हार के बाद कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अचानक टेस्ट क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर सभी को चौंका दिया। भारत जारी सीरीज में 0-2 से पीछे है लेकिन सीरीज का अंतिम मैच अभी खेला जाना है इसलिए धोनी के संन्यास लेने के बाद टीम की कमान विराट कोहली को सौंप दी गई।
कोहली इस सीरीज के पहले मैच में भी टीम इंडिया की कप्तानी कर चुके हैं। उनकी कप्तानी में टीम इंडिया एडिलेड टेस्ट मैच में जीत की ओर आसानी से बढ़ रही थी लेकिन खेल के अंतिम समय में लगातार विकेटों के पतन से भारत मैच से दूर हो गया और 48 रन के अंतर से मैच गंवा बैठा। ब्रिसबेन टेस्ट से धोनी बतौर कप्तान वापस मैदार पर लौटे और इस मैच में भी भारत ने शुरुआत शानदार की थी लेकिन दूसरी पारी में बल्लेबाजों के लड़खड़ा जाने से टीम यह मैच भी हार गई। सीरीज के तीसरे मैच में भारत ने 17 साल बाद मेलबर्न में कोई टेस्ट ड्रॉ कराया और ऑस्ट्रेलिया में लगातार हार के सिलसिले को खत्म कर दिया। भारत ने सीरीज भले ही गंवा दी हो लेकिन उसका प्रदर्शन पिछले दौरे की तुलना में बेहद संतुलित रहा है।
साल के मध्य में इंग्लैंड दौरे के दौरान टेस्ट सीरीज में मिली हार के बाद टीम इंडिया का मनोबल बढ़ाने के लिए टीम से बतौर डायरेक्टर जुड़ने वाले पूर्व कप्तान रवि शास्त्री को नई टीम से काफी उम्मीदें है आशाएं हैं।
'एक साल में टॉप टू में होगी टीम इंडिया'
महेंद्र सिंह धोनी के संन्यास लेने के बाद विराट कोहली को भारत की टेस्ट टीम की कमान सौंप दी गई है। कोहली के पास महज एक टेस्ट मैच में कप्तानी करने का अनुभव है। उनकी अगुवाई वाली टीम इंडिया को लेकर टीम डायरेक्टर रवि शास्त्री ने प्रशंसकों और आलोचकों से गुजारिश की है कि वे इस नई टीम को कम से कम 12 महीने यानी एक साल का मौका दें।
शास्त्री ने कहा कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि परिणाम 3-0 या 4-0 होता है। भारत अगर इसी तरह अपना आक्रामक प्रदर्शन जारी रखता है तो आगे यह परिणाम बेहतर हो सकता है और विदेशी धरती पर टीम जीत की राह पर लौट सकती है। भारत ने 2011 में वेस्टइंडीज को हराने के बाद विदेशी धरती पर एक भी सीरीज नहीं जीता है। साथ ही पिछले विदेशी धरती पर खेले अपने 23 टेस्ट मैचों में उसने महज 2 में जीत हासिल की है।
शास्त्री ने मैच के बाद कहा, "मैं इस बात पर फोकस करता हूं कि प्रदर्शन होना चाहिए। स्कोरलाइन का कोई मतलब नहीं होता।" टीम के अलावा उन्होंने विराट कोहली और अजिंक्य रहाणे ने मेलबर्न टेस्ट के तीसरे दिन शानदार बल्लेबाजी करते हुए भारत की मैच में वापसी कराई। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर एक साल का वक्त दिया जाता है तो इस टीम के पास इतना माद्दा है कि वह दुनिया की शीर्ष 2 टीम में शामिल हो सके।
उन्होंने कहा, "दो युवा बल्लेबाजों ने विपक्षी टीम पर जमकर प्रहार किया। मैं इस माइंडसेट से खुश हूं। मैंने लंबे समय बाद तीसरे दिन इस तरह की बल्लेबाजी देखी है। उनके प्रदर्शन से ऑस्ट्रेलियाई परेशान हो गई।"
क्या कोहली-शास्त्री जुगलबंदी से असहज थे धोनी?
इससे पहले महेंद्र सिंह धोनी का टेस्ट क्रिकेट को यूं अचानक अलविदा कह देना कई सवाल खड़े करने के लिए काफी है। आखिर इतना बड़ा फैसला कोई इस तरह तो नहीं ही करता। वैसे तो धोनी के संन्यास की वजह उनके अन्य दोनों प्रारूपों पर ध्यान देने को बताया जा रहा है, लेकिन नए टेस्ट कप्तान विराट कोहली और टीम डायरेक्टर रवि शास्त्री की जुगलबंदी से पैदा हुए हालात भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
बात इसलिए भी वाजिब लगती है क्योंकि जब शास्त्री को टीम डायरेक्टर बनाया गया था तब भी धोनी इस फैसले से खुश नजर नहीं आ रहे थे और उन्होंने खुलेआम यह कहकर नाराजगी जाहिर की थी कि कोच डंकन फ्लेचर ही टीम के बॉस हैं।
ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी एडीलेड में जब भारतीय टीम पहले टेस्ट में विराट कोहली के नेतृत्व में मैदान पर उतरी तो उनकी आक्रामक और सकारात्मक सोच की काफी प्रशंसा की गई थी। शास्त्री भी टीम की सोच आक्रामक रखने पर जोर देते रहे हैं, जबकि धोनी के बारे में कहा जाता है कि वो रक्षात्मक कप्तान हैं। ऐसे में शास्त्री की आक्रामक सोच के ढांचे में धोनी शायद फिट नहीं हो पा रहे थे। साथ ही विदेशी जमीन पर उनका बेहद खराब प्रदर्शन भी उनके लिए हालात और मुश्किल कर रहा था।
वजह चाहे जो भी सच यही है कि धोनी अब भारतीय टेस्ट टीम का हिस्सा नहीं हैं। हालांकि उनके संन्यास के पीछे की वजह क्या है, यह तो वक्त ही बता पाएगा।