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Amar Ujala Samwad: सचिन या धोनी नहीं, इस भारतीय खिलाड़ी को अपना आदर्श मानते हैं सुरेश रैना, जमकर की सराहना
Fri, 18 Apr 2025 08:56 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Fri, 18 Apr 2025 08:56 PM IST
सार
सुरेश रैना ने अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में बताया कि किस तरह राहुल द्रविड़ ने उनके शुरुआत दिनों के दौरान उनकी मदद की थी और रैना का हौसला बढ़ाया था।
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सुरेश रैना
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारतीय टीम के पूर्व ऑलराउंडर सुरेश रैना ने लखनऊ में आयोजित हुए अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में शिरकत की। 2011 वनडे विश्व कप विजेता टीम के सदस्य रहे रैना ने बताया कि भारतीय टीम में उनके आदर्श कौन हैं। रैना को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिए अब समय हो चुका है, लेकिन अब भी उनकी यादगार पारियों प्रशंसकों के दिलों में ताजा हैं।
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श्रीलंका के खिलाफ वनडे करियर की हुई थी शुरुआत
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में जन्में सुरेश रैना देश के सबसे विस्फोटक बल्लेबाजों में शुमार रहे हैं। वह पहले भारतीय खिलाड़ी हैं, जिन्होंने तीनों फॉर्मेट में शतक लगाने का गौरव हासिल किया। वह अंतरराष्ट्रीय टी20 मैच में शतक लगाने वाले पहले भारतीय भी हैं। 2005 में श्रीलंका के खिलाफ वनडे मैच में अपने करियर की शुरुआत करने वाले रैना भारत के मध्यक्रम में बेहतरीन बल्लेबाज और बेहद उपयोगी खिलाड़ी थे।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में जन्में सुरेश रैना देश के सबसे विस्फोटक बल्लेबाजों में शुमार रहे हैं। वह पहले भारतीय खिलाड़ी हैं, जिन्होंने तीनों फॉर्मेट में शतक लगाने का गौरव हासिल किया। वह अंतरराष्ट्रीय टी20 मैच में शतक लगाने वाले पहले भारतीय भी हैं। 2005 में श्रीलंका के खिलाफ वनडे मैच में अपने करियर की शुरुआत करने वाले रैना भारत के मध्यक्रम में बेहतरीन बल्लेबाज और बेहद उपयोगी खिलाड़ी थे।
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पहले मैच में शून्य पर आउट हुए थे रैना
रैना ने कहा, पहला मैच श्रीलंका के खिलाफ था। राहुल द्रविड़ हमारे कप्तान थे। धोनी भाई, मैं और इरफान पठान बैठे हुए थे। जब मैं शून्य पर आउट हुआ तो काफी निराश था। सोच रहा था कि पहला मौका मिला, लेकिन अब दूसरा मौका मिलेगा या नहीं मिलेगा। तो राहुल भाई आए और कहा- मैच था ये भाई। आउट ही हो गया। कल फिर ये मैच होगा। फील्डिंग में कुछ करके दिखाओ, गेंदबाजी में कुछ करके दिखाओ। उस समय राहुल भाई, सचिन पाजी, वीरेंद्र सहवाग ने इतना समर्थन किया एक मेरे जैसे युवा का, वो कहते थे जाओ बिंदास खेलो, हम आपके साथ खड़े हैं। तो ऐसा लगता था कि ये टीम नहीं हमारा परिवार है। राहुल भाई मेरे आदर्श हैं।
ये भी पढ़ें: Amar Ujala Samwad: 'सीधा शाहरुख-प्रीति की टीम में जाना है', सुरेश रैना ने युवा खिलाड़ियों को क्या दी सलाह?
रैना ने कहा, पहला मैच श्रीलंका के खिलाफ था। राहुल द्रविड़ हमारे कप्तान थे। धोनी भाई, मैं और इरफान पठान बैठे हुए थे। जब मैं शून्य पर आउट हुआ तो काफी निराश था। सोच रहा था कि पहला मौका मिला, लेकिन अब दूसरा मौका मिलेगा या नहीं मिलेगा। तो राहुल भाई आए और कहा- मैच था ये भाई। आउट ही हो गया। कल फिर ये मैच होगा। फील्डिंग में कुछ करके दिखाओ, गेंदबाजी में कुछ करके दिखाओ। उस समय राहुल भाई, सचिन पाजी, वीरेंद्र सहवाग ने इतना समर्थन किया एक मेरे जैसे युवा का, वो कहते थे जाओ बिंदास खेलो, हम आपके साथ खड़े हैं। तो ऐसा लगता था कि ये टीम नहीं हमारा परिवार है। राहुल भाई मेरे आदर्श हैं।
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'राहुल भाई से सीखा खेलने का जज्बा'
उन्होंने कहा, फिर 2005, 2006, 2007, 2008 वो डगर चलती रही। राहुल भाई ने बहुत समर्थन किया, वो काफी अनुशासित थे और टीम की दीवार थे। राहुल भाई एक अलग ही किस्म के इंसान हैं। मुझे 2005 में वनडे कैप भी उनसे मिली, 2010 में टेस्ट कैप भी उनसे मिली। उनके साथ बहुत साझेदारी की, बहुत मैच खेले। 2005-06 में उनका बेटा समित, तब बहुत छोटा था तो वो बहुत रो रहा था। राहुल भाई को अगले दिन जमैका में बल्लेबाजी करनी थी। तो वो पहले बेटे के साथ रात तीन बजे तक खेले और फिर उसे सुलाके फिर आराम किया। अगले दिन दोनों पारियों में उन्होंने 60-70 रन बनाए। वो पिच बल्लेबाजी के लिए बहुत मुश्किल थी। भारत के लिए खेलना एक जज्बा होता है और एक फाइटिंग स्पिरिट होती है तो ये हमने राहुल भाई से सीखी।
उन्होंने कहा, फिर 2005, 2006, 2007, 2008 वो डगर चलती रही। राहुल भाई ने बहुत समर्थन किया, वो काफी अनुशासित थे और टीम की दीवार थे। राहुल भाई एक अलग ही किस्म के इंसान हैं। मुझे 2005 में वनडे कैप भी उनसे मिली, 2010 में टेस्ट कैप भी उनसे मिली। उनके साथ बहुत साझेदारी की, बहुत मैच खेले। 2005-06 में उनका बेटा समित, तब बहुत छोटा था तो वो बहुत रो रहा था। राहुल भाई को अगले दिन जमैका में बल्लेबाजी करनी थी। तो वो पहले बेटे के साथ रात तीन बजे तक खेले और फिर उसे सुलाके फिर आराम किया। अगले दिन दोनों पारियों में उन्होंने 60-70 रन बनाए। वो पिच बल्लेबाजी के लिए बहुत मुश्किल थी। भारत के लिए खेलना एक जज्बा होता है और एक फाइटिंग स्पिरिट होती है तो ये हमने राहुल भाई से सीखी।