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Bishan Singh Bedi: नाइंसाफी का किया था विरोध, पाकिस्तान के खिलाफ बीच में ही छोड़ दिया था मैच; जानें पूरा मामला

Mon, 23 Oct 2023 04:45 PM IST
शक्तिराज सिंह स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शक्तिराज सिंह Updated Mon, 23 Oct 2023 04:45 PM IST
सार

बिशन सिंह बेदी ने गुस्से में भारतीय बल्लेबाजों को वापस बुला लिया था और पाकिस्तान की टीम को विजेता घोषित कर दिया गया था। 1978 में यह किसी कप्तान के लिए बहुत ही साहस भरा फैसला था। 

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Former Cricketer Bishan Singh Bedi Called indian batters against Pakistan in 1978 Series
बिशन सिंह बेदी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारत के दिग्गज स्पिनर बिशन सिंह बेदी का निधन हो चुका है। उन्होंने 77 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। बेदी अपनी बेहतरीन स्पिन गेंदबाजी के अलावा बेबाक बयानबाजी और आक्रामक रवैये के लिए भी जाने जाते हैं। 22 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी करने वाले बेदी बेहद निर्भीक और बेबाक कप्तान थे। साल 1978 में उन्होंने कुछ ऐसा किया था, जिससे पूरे क्रिकेट जगत में सनसनी फैल गई थी। बेदी ने पाकिस्तान के खिलाफ मैच में भारतीय बल्लेबाजों को वापस बुला लिया था और पाकिस्तान की टीम पूरा मैच खेले बिना ही यह मैच जीत गई थी। 
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साल 1978 में भारतीय क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान का दौरा किया था। इस दौरे में भारत को तीन वनडे और तीन टेस्ट खेलने थे। भारत ने पहला वनडे मैच चार रन से जीता था, लेकिन दूसरे वनडे में टीम इंडिया को आठ विकेट से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद दो टेस्ट मैच खेले गए। पहला टेस्ट ड्रॉ रहा और दूसरा टेस्ट पाकिस्तान ने आठ विकेट से जीता। इसके बाद तीसरा वनडे मैच खेला जा रहा था। 
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तीसरे वनडे में पाकिस्तान ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। आसिफ इकबाल के 62 रन और माजिद खान के 37 रन के चलते पाकिस्तान ने 40 ओवर में सात विकेट खोकर 205 रन बनाए। भारत के लिए कपिल देव, वेंकटराघवन और मोहिंदर अमरनाथ ने दो-दो विकेट लिए थे। जवाब में भारत ने अच्छी शुरुआत की थी। चेतन चौहान 23 रन पर आउट हुए। इसके बाद अंशुमन गायकवाड़ और सुरिंदर अमरनाथ ने पारी संभाली। दोनों ने दूसरे विकेट के लिए शतकीय साझेदारी की। सुरिंदर 62 रन बनाकर आउट हुए, लेकिन अंशुमन 78 रन बनाकर नाबाद थे और गुंडप्पा विश्वनाथ आठ रन बनाकर खेल रहे थे। 
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बाउंसर के खिलाफ किया था विरोध
भारत को जीत के लिए आखिरी तीन ओवरों में 23 रन की जरूरत थी। ऐसे में पाकिस्तान के सरफराज नवाज ने लगातार बाउंसर फेंकना शुरू कर दिया। उस समय बाउंसर की ऊंचाई को लेकर वाइड का नियम नहीं था। ऐसे में अंशुमन ने अंपायर से हस्तक्षेप करने के लिए कहा, क्योंकि सभी गेंदें उनके सर के काफी ऊपर से जा रही थीं। घरेलू अंपायरों जावेद अख्तर और खिजर हयात ने पाकिस्तान के कप्तान मुश्ताक मोहम्मद से बाउंसर गेंद नहीं करने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने इसे आक्रामक गेंदबाजी मानने से इनकार कर दिया। 48वें ओवर की पहली चार गेंदों में से प्रत्येक गायकवाड़ की पहुंच से काफी दूर थी और डॉट गेंदें थीं क्योंकि तब बाउंसर सीमा का कोई प्रावधान नहीं था। भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी विपक्षी कप्तान मुश्ताक से बात करने के लिए बाहर चले गए और बातचीत से नाखुश दिखे।


मैच और सीरीज हारा था भारत
इसके बाद बेदी ने अपने बल्लेबाजों गायकवाड़ और गुंडप्पा विश्वनाथ को पवेलियन वापस बुला लिया। इसके बाद मुश्ताक भारतीय पक्ष को खेल फिर से शुरू करने के लिए मनाने के लिए भारतीय ड्रेसिंग रूम में चले गए। लेकिन बेदी पाकिस्तान की बाउंसर रणनीति के खिलाफ दृढ़ता से खड़े रहे और अपने बल्लेबाजों को मौका नहीं दिया, जबकि उन्हें पता था कि इससे विपक्षी टीम मैच और सीरीज जीतेगी। इस प्रकार, बिशन सिंह बेदी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में विपक्षी टीम को मैच जीता देने वाले पहले कप्तान बने। हालांकि, उन्होंने नाइंसाफी के खिलाफ झुकने से इंकार कर दिया था। भले ही उनकी टीम को मैच और सीरीज गंवानी पड़ी।
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