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नडेला से कुंबले ने कही दिल की बात, करियर के अंत में मुझे 'हेडमास्टर' का टैग मिला

Wed, 08 Nov 2017 12:35 PM IST
amarujala.com- Presented by: मुकेश झा
amarujala.com- Presented by: मुकेश झा Updated Wed, 08 Nov 2017 12:35 PM IST
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Former coach anil kumble said, Headmaster tag came back to me later in my career
अनिल कुंबले और सत्या नडेला - फोटो : indian express

टीम इंडिया के पूर्व कोच और दिग्गज गेंदबाज अनिल कुंबले ने कहा है कि उन्हें बतौर कोच करियर के अंत में 'हेडमास्टर' का टैग मिला। दरअसल, मंगलवार को नई दिल्ली में माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला की किताब ‘हिट रिफ्रेश’ से जुड़े एक प्रोग्राम के दौरान दोनों के बीच बातचीत हुई। बता दें कि नडेला खुद क्रिकेट के बहुत बड़े फैन हैं। इस दौरान उन्होंने कुंबले से उनकी जिंदगी और क्रिकेट करियर को लेकर कई अहम सवाल पूछे। 

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सीईओ नडेला ने जब पूर्व कोच कुंबले से पूछा कि आपको अपने माता-पिता से क्या सीख मिली, तो उन्होंने कहा कि खुद पर यकीन करना। कुंबले ने कहा कि माता-पिता ने मुझे खुद पर भरोसा करना सिखाया। इसके लिए आपको अपने माता-पिता और दादा-दादी की तरफ देखना पड़ता है।
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पढ़ेंः- इस क्रिकेटर के दीवाने हैं माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला, मानते हैं कोहली से बेहतर
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बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, 'मेरे दादाजी एक स्कूल में हेडमास्टर थे। इसलिए मैं इस शब्द के मायने खूब समझता हूं। हालांकि ये शब्द बाद में मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गया। यहां पर बैठे कुछ लोग इस शब्द 'हेडमास्टर' का मतलब समझते हैं। कुंबले ने यह जवाब ऑडियंस की तरफ मुस्कराते हुए दिया।

इस दौरान कुंबले ने बातचीत में 2003-04 के ऑस्ट्रेलिया दौरा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2003-04 का ऑस्ट्रेलिया दौरा उनके लिए चैलेंज था। इस टूर में उन्हें खुद को फिर से निखारने की चुनौती थी। कुंबले ने कहा, 'वैसे तो एक क्रिकेटर के तौर पर आपको हर सीरीज के बाद हिट और रिफ्रेश करने की चुनौती होती है। मगर मैं 2003-04 के ऑस्ट्रेलिया दौरे का याद करना चाहूंगा। क्योंकि यह मेरे करियर के लिए बहुत खास था।' 

इसी साल जून में कुंबले ने टीम इंडिया के कोच का पद छोड़ा

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अनिल कुंबले - फोटो : BCCI

उन्होंने आगे बातचीत में कहा, 'मैं प्लेइंग इलेवन में आने के लिए भी हरभजन से मुकाबला कर रहा था। मैं 30 साल का था और लोग मेरे रिटायरमेंट की बातें करने लगे थे। मगर हमने एडिलेड टेस्ट जीता। इस टेस्ट के पहले दिन मैंने काफी रन दिए लेकिन अगले दिन पांच विकेट लिए। मैं समझ गया था कि अब कुछ अलग ही करना होगा। इसलिए मैंने इस टेस्ट में अलग तरह की गुगली की। ये गुगली मैंने टेनिस बॉल से सीखी थी। फिर कुछ और बदलाव भी किए।' भारतीय क्रिकेट के अच्छे मोमेंट के बारे में पूछे जाने पर कुंबले ने 1983 वर्ल्ड कप जीत और 2001 के ऑस्ट्रेलिया दौरे को खास तौर पर याद किया।

बता दें कि अनिल कुंबले ने इसी साल जून में टीम इंडिया के कोच का पद छोड़ा था। ऐसा माना जाता है कि कुंबले ने कोहली से अच्छे रिश्ते ना होने की वजह से टीम इंडिया के कोच का पद छोड़ा था। विराट कोहली के नेतृत्व वाली टीम इंडिया के कोच के रूप में कुंबले ने टीम के खिलाड़ियों को अनुशासन का पाठ पढ़ाना शुरू ही किया था कि कुंबले और कोहली में विवाद पैदा हो गया। इस दौरान ही कुंबले को ये टैग मिला था।

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