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‘कर्नल’ ने पहले ही पहचान ली थी विराट-धोनी की प्रतिभा, ओपनिंग को भी तैयार थे कोहली

Wed, 08 Apr 2020 07:48 AM IST
Rajeev Rai स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Published by: Rajeev Rai Updated Wed, 08 Apr 2020 07:48 AM IST
सार

2006-2008 : तक राष्ट्रीय चयनसमिति के अध्यक्ष रहे पूर्व कप्तान वेंगसरकर  

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Dilip Vengsarkar recalls the time he backed 'exceptionally talented' Virat Kohli, MS Dhoni.
धोनी-वेंगसरकर - फोटो : social media

विस्तार

पूर्व कप्तान दिलीप वेंगसरकर को प्रतिभाओं को तलाशने के मामले में भारत के सबसे अच्छे चयनकर्ताओं में से एक माना जाता है जिन्होंने पहली बार आयु वर्ग के क्रिकेट में मौजूदा कप्तान विराट कोहली की प्रतिभा को पहचाना था। उनके चयनकर्ता रहते हुए महेंद्र सिंह धोनी भी कप्तान बने।  

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‘कर्नल’ के नाम से मशहूर रहे वेंगसरकर कहते हैं कि विराट ऑस्ट्रेलिया के इमर्जिंग टीम के दौरे पर चयनसमिति के अध्यक्ष के कहने पर पारी की शुरुआत करने को भी तैयार थे। कोहली का यह रवैया वेंगसरकर को काफी पसंद आया।
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वेंगसरकर का मानना है कि वह चयनसमिति के अध्यक्ष पद से न्याय करने में इसलिए सफल रहे क्योंकि वह बीसीसीआई के प्रतिभा अनुसंधान विकास विभाग (टीआरडीडब्ल्यू) से जुड़े थे जिसने धोनी जैसे क्रिकेटर की प्रतिभा को भी तलाशा था। टीआरडीडब्ल्यू हालांकि अब अस्तित्व में नहीं है। वेंगसरकर बताते हैं, ‘टीआरडीडब्ल्यू के अध्यक्ष के तौर पर मैंने जूनियर क्रिकेट में कोहली को कई बार देखा था। इसलिए जब मैं चयन समिति का अध्यक्ष बना, तो हमने उन्हें ऑस्ट्रेलिया के एक इमर्जिंग टीम के दौरे के लिए चुना। मैं वहां था और जब मैंने उन्हें बल्लेबाजी करते देखा तो मुझे पता था कि वह क्रिकेट में बड़ी जिम्मेदारी के लिए तैयार हैं।’
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वेंगसरकर से जब पूछा गया कि क्या कोहली को देखकर उन्हें लगा था कि वह 15 साल तक क्रिकेट खेलेंगे तो उन्होंने,‘आप कभी भी इस बात को लेकर सुनिश्चित नहीं हो सकते कि किसी खिलाड़ी का करिअर कितना लंबा चलेगा। मैंने जो देखा वह एक असाधारण प्रतिभा थी।’

दिलीप वेंगसरकर, चयन समिति के पूर्व अध्यक्ष

अगर आप प्रतिभा की पहचान कर सकते हैं तो आपको पता होगा कि किस खिलाड़ी के पास शीर्ष स्तर पर सफल होने की संभावना है। शीर्ष स्तर के लिए आपके पास कुछ अतिरिक्त कौशल होना चाहिए और कोहली में वह था।

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आतिशी शॉटों ने कराया धोनी का चयन
धोनी को 21 साल की उम्र में टीआरडीडब्ल्यू योजना में शामिल किया गया था जबकि इसके लिए 19 साल की उम्र निर्धारित थी। वेंगसरकर ने बताया कि बंगाल के पूर्व कप्तान प्रकाश पोद्दार जमशेदपुर में एक अंडर-19 मैच देखने गए थे। कीनन स्टेडियम में बिहार की टीम वनडे मैच खेल रही थी और गेंद बार-बार स्टेडियम के बाहर आ रही थी। पोद्दार को उत्सुकता हुई कि इतनी दूर गेंद को कौन मार रहा है। जानकारी लेने पर धोनी के बारे में पता चला। पोद्दार के कहने पर धोनी को टीआरडीडब्ल्यू कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया।’

एनसीए बन गया पुनर्वास केंद्र
टीआरडीडब्ल्यू को पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया ने शुरू किया था। डालमिया के चुनाव हारने के बाद हालांकि इसे बंद कर दिया गया। उन्होंने राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) की मौजूदा स्थिति पर निराशा जताते हुए कहा कि यह प्रतिभा निखारने के बजाय खिलाडियों का रिहैबिलिटेशन (पुनर्वास) का केंद्र बनता जा रहा है। 

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