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आज ही के दिन दुनिया ने देखे थे ये दो सूरमा, दादा ने जड़ा था सैकड़ा तो शतक से चूके थे द्रविड़

Sat, 20 Jun 2020 01:15 PM IST
Rohit Ojha Rohit Ojha
Updated Sat, 20 Jun 2020 01:15 PM IST
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Debut of Two Legendary Indian Batsman Sourav Ganguly and Rahul Dravid at lords 20 June 1996
सौरव गांगुली-राहुल द्रविड़ - फोटो : सोशल मीडिया

साल 1996, भारतीय टीम तीन मैच की टेस्ट और वन-डे सीरीज खेलने के लिए इंग्लैंड पहुंची। तब टीम की कमान मोहम्मद अजहरूद्दीन के हाथों में थी। पहला टेस्ट एजबेस्टन में खेला गया और भारत ने वो मुकाबला गंवा दिया। फिर तारीख आई 20 जून की। क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स के मैदान पर इस दिन भारत और इंग्लैंड के बीच सीरीज का दूसरा टेस्ट शुरू होने वाला था। 

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जून की हल्की सर्दी, टॉस का सिक्का हवा में उछला और भारत के पक्ष में गिरा। अजहर ने फिल्डिंग चुनी और अपनी प्लेइंग इलेवन बताने लगे। अजहर को यहां अंतिम 11 बताने देते हैं और हम पहुंचते हैं भारत की ड्रेसिंग रूम में। ड्रेसिंग रूम में दो खिलाड़ी थोड़ा नर्वस, थोड़े बेचैन दिख रहे थे। दोनों के सिर पर पहली बार टेस्ट कैप सजी थी। अजहर ने एक नाजुक मुकाबले में उन्हें मौका दिया, क्योंकि उन्हें भी कभी किसी ने ऐसे ही मौका दिया था।
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बहरहाल, मैदान पर लौटते हैं। लॉर्ड्स का हरा मैदान और हल्की सर्दी तेज गेंदबाजों के लिए स्वर्ग साबित हो रही थी। भारतीय तेज गेंदबाजों ने 107 रन पर मेजबान इंग्लैंड के शीर्ष क्रम को वापस पवेलियन में बैठा दिया था। जवागल श्रीनाथ, वेंकटेश प्रसाद के साथ मिलकर एक और मध्यम तेज गति के गेंदबाज (जो बल्लेबाज के तौर पर डेब्यू कर रहा था) ने इंग्लिश शीर्ष क्रम को तबाह करने में अहम भूमिका निभाई थी। जवागल श्रीनाथ – 2 विकेट, वेंकटेश प्रसाद – 1 विकेट और सौरव गांगुली – 2 विकेट
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सौरव गांगुली ने अपने पहले ही स्पेल में नासिर हुसैन और ग्रीम हिक को पवेलियन की राह पकड़ा दी। गांगुली ने शुरुआत कर दी थी। बस उनका छा जाना बाकी था। वेंकटेश प्रसाद अंग्रेजों पर घातक मिसाइल बनकर गिरे और इंग्लैंड की टीम को ढाहने में जुट गए। वेंकटेश को इंग्लैंड की पारी को समेटने देते हैं और वापस सौरव गांगुली पर लौटते हैं।

सौरव के शतक की धमक ने आलोचनाओं को हवा उड़ा दिया

Debut of Two Legendary Indian Batsman Sourav Ganguly and Rahul Dravid at lords 20 June 1996
सौरव गांगुली-राहुल द्रविड़ - फोटो : सोशल मीडिया

सौरव गांगुली को 1992 के ऑस्ट्रेलियाई दौरे के लिए टीम में शामिल किया गया था, लेकिन उस दौरे पर टेस्ट डेब्यू की कैप सिर पर नहीं चढ़ पाई। उसी दौरे पर सौरव के बर्ताव को लेकर सवाल उठे और उन्हें घमंडी कहा गया था। हालांकि बाद में अजहरुद्दीन ने इन बातों को महज अफवाह बताया। उनपर कई और आरोप लगे, कहा गया कि उसका चयन सिर्फ ईस्ट जोन का कोटा भरने के लिए हुआ।

राजदीप सरदेसाई ने अपनी किताब किताब ‘डेमोक्रेसीज इलेवेन’ में अरुण लाल के हवाले से लिखा कि '1995-96 के घेरलू सीजन में सौरव ने शानदार प्रदर्शन किया, जिसे देखते हुए उन्हें इंग्लैंड दौरे के लिए टीम में बुलाया गया।  फिर उनके चयन पर सवाल उठे और कहा गया कि बोर्ड के सेक्रेटरी होने के कारण जगमोहन डालमिया ने सौरव को टीम में शामिल कराने के लिए अपनी ताकत का इस्तेमाल किया।

हरे मैदान पर सौरव का कट

एक बार फिर मैच में लौटते हैं। वेंकटेश ने इंग्लिश पारी को जामुन की पकी डाली की तरह झकझोर कर झाड़ दिया। उनके खाते में पांच विकेट आए। भारतीय टीम बल्लेबाजी करने के लिए उतरी। विक्रम राठौड़ और नयन मोंगिया ने पारी की शुरुआत की। इंग्लैंड के गेंदबाजों का स्पेल शुरू हुआ और ड्रेसिंग रूम में एक बाएं हाथ का बल्लेबाज पैड पहने नर्वस बैठा। पहला मैच था, गेंदबाजी में कमाल दिखा चुका था। अब बारी बल्लेबाजी की थी, जिसके लिए उसे टीम में बुलाया गया था। सौरव खुद को बल्लेबाजी की परिस्थितियों के लिए तैयार कर ही रहे थे कि राठौर आउट होकर लौटने लगे। एक 24 साल के लड़के ने हेलमेट पहना और ग्लव्स पहनते हुए लॉर्ड्स के हरे मैदान में कदम रखा। 

सौरव को क्रीज तक पहुंचने देते हैं, उससे पहले दूसरे लड़के की बात, जो सौरव के साथ ही डेब्यू कर रहा था। बंगलूरू के इस लड़के के चेहरे पर भी पहले अंतरराष्ट्रीय मैच का दबाव दिख रहा था। उसकी की हुई तमाम नेट प्रैक्टिस पर इस वक्त के हालात भारी पड़ रहे थे। वो मैदान पर खुद को तपाकर टीम इंडिया तक पहुंचा था। उसके बारे में एक किस्सा चर्चित था कि, उसने 48 घंटों तक ग्लव्स पहन कर क्लास में पढ़ाई की थी।

शतक से चूके द्रविड़, लेकिन जूझने का जज्बा दिखा दिया

Debut of Two Legendary Indian Batsman Sourav Ganguly and Rahul Dravid at lords 20 June 1996
सौरव गांगुली-राहुल द्रविड़ - फोटो : सोशल मीडिया

कारण ये था कि उसके पुराने ग्लव्स ढीले हो गए थे, जिसकी वजह से गेंद के बल्ले से नहीं लगने के बावजूद हल्की आवाज आती थी। आवाज इतनी कि विकेकीपर गेंद को कैच कर ले, तो अंपायार द्वारा उसे आउट दिए जाने की बहुत संभावनाएं थी। इसलिए उसने नए ग्लव्स खरीदे और अपने हाथों में सेट करने के लिए घंटो पहने रखा। नए ग्लव्स को पहन उसने रणजी ट्रॉफी के सेमीफाइनल में सैकड़ा ठोका। दिल्ली के खिलाफ फाइनल में शतक और इस खिलाड़ी को दुनिया राहुल द्रविड़ के नाम से जानती है, जो कालंतर में 'द वॉल' के नाम से जाना गया।

वापस मैच पर लौटते हैं। सौरव सर्द मौसम और धीमी पिच पर जमे और लगभग सात घंटे तक क्रीज के दोनों छोर पर बल्ला भांजते रहे। पहले पचासा पूरा किया फिर शतक की ओर बढ़े। सौरव 97 पर थे, इससे पहले वाली गेंद पर भी उन्होंने चौका जड़ा था। डॉमिनिक की एक गेंद ऑफ स्टम्प के बाहर गिरी, सौरव ने पैर को गेंद की लाइन में डाला और बल्ले से बस दिशा भर दिखा दिया। लॉर्ड्स तालियों की शोर से गड़गड़ा उठा, सौरव ने हेलमेट उतारा और बल्ले के साथ हवा में उठा दिया। दूसरे छोर पर खड़े द्रविड़ पहुंचे और गांगुली को बधाई दी। सौरव ने 131 रन बनाए और 20 चौके मारे।

द्रविड़ 'द वॉल'

अपने पहले मैच में बल्लेबाजी के लिए उतरे द्रविड़ इतने आराम से खेल रहे थे, जैसे परीक्षा के पेपर में मनमुताबिक सवाल को देखकर बच्चा ताबड़तोड़ कलम चलाता है। वो गेंद को शानदार तरीके से छोड़ रहे थे, डिफेंस कर रहे थे और मौका लगते ही बाउंड्री पार भी भेज रहे थे। सौरव के रूप में छठा विकेट 296 रन पर गिरने के बाद भारतीय टीम 350 के आस-पास सिमटती नजर आ रही थी, लेकिन द्रविड़ ने 400 के पार लगाया और स्कोर बोर्ड  429 रन टंग गए। द्रविड़ ने भी अर्धशतक पूरा किया, लेकिन वो शतक नहीं बनाए पाए और 95 पर आउट हो गए। 

भारत के दो महान खिलाड़ियों ने अपनी शुरुआत एक ही दिन की थी। दोनों ने अपने पहले मैच में ही बता दिया था कि परफेक्टनेस क्या होती है। एक भारत का सफलतम कप्तानों में शुमार हुआ और आज बीसीसीआई का मुखिया है। दूसरा, जिसने मैदान पर चिखने-चिल्लाने वाले को बताया कि एग्रेसन सिर्फ शोर से नहीं खेल से भी दिखाया जाता है। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज मैथ्यू हेडेन ने द्रविड़ के लिए कहा था कि एग्रेसन देखना है, तो द्रविड़ की आंखों में देखो। गांगुली देश के दुलारे कप्तान बने, तो देश ने द्रविड़ को अथाह इज्जत दी।

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