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CWC 2025: अमोल मजूमदार बोले- 'सात घंटे बिना शोर' वाला भाषण दिल से निकला, किसी फिल्म से प्रेरित नहीं था
Sat, 08 Nov 2025 09:47 PM IST
Mayank Tripathi
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Mayank Tripathi
Updated Sat, 08 Nov 2025 09:47 PM IST
सार
बीसीसीआई को दिए एक इंटरव्यू में मजूमदार ने अपने वायरल भाषण के बारे में कहा कि यह किसी फिल्मी सीन से प्रेरित नहीं था, बल्कि दिल से निकले शब्द थे। उनके इस भाषण की तुलना लोगों ने शाहरुख खान के फिल्म चक दे इंडिया में दिए '70 मिनट' वाले भाषण से की थी।
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पीएम मोदी-अमोल मजूमदार
- फोटो : PTI
विस्तार
भारतीय महिला टीम को पहली बार विश्व कप जिताने वाले मुख्य कोच और पूर्व घरेलू क्रिकेटर अमोल मजूमदार ने खुलासा किया है कि उनका प्रसिद्ध 'सात घंटे बिना शोर' वाला भाषण पूरी तरह से दिल से निकला था। बता दें कि, भारतीय महिला टीम ने रविवार (2 नवंबर) को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 52 रनों से फाइनल में जीत हासिल कर पहली बार महिला वनडे विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था।
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किसी फिल्म से प्रेरित नहीं था भाषण
बीसीसीआई को दिए एक इंटरव्यू में मजूमदार ने अपने वायरल भाषण के बारे में कहा कि यह किसी फिल्मी सीन से प्रेरित नहीं था, बल्कि दिल से निकले शब्द थे। उनके इस भाषण की तुलना लोगों ने शाहरुख खान के फिल्म चक दे इंडिया में दिए '70 मिनट' वाले भाषण से की थी। अपने भाषण में मजूमदार ने कहा था, 'सात घंटे के लिए हम सारी आवाजें बंद कर देंगे। सात घंटे हम अपना खुद का बुलबुला बनाएंगे। सात घंटे सिर्फ हम और हमारी कहानी। कोई बाहरी कहानी नहीं, हम अपनी कहानी खुद लिखेंगे। चलो इतिहास रचते हैं।'
मजूमदार ने बताया कि वह ड्रामा में यकीन नहीं रखते और जो भी कहा, दिल से कहा। उन्होंने कहा, 'मैं ड्रामेबाजी में यकीन नहीं करता। जो भी कहता हूं, दिल से कहता हूं। फाइनल से पहले के सभी मैचों में मुझे पता होता था कि हडल (टीम मीटिंग) में क्या कहना है, लेकिन फाइनल में यह भाषण अपने आप आ गया। उस पल जो महसूस हुआ, वही बोल दिया।'
बीसीसीआई को दिए एक इंटरव्यू में मजूमदार ने अपने वायरल भाषण के बारे में कहा कि यह किसी फिल्मी सीन से प्रेरित नहीं था, बल्कि दिल से निकले शब्द थे। उनके इस भाषण की तुलना लोगों ने शाहरुख खान के फिल्म चक दे इंडिया में दिए '70 मिनट' वाले भाषण से की थी। अपने भाषण में मजूमदार ने कहा था, 'सात घंटे के लिए हम सारी आवाजें बंद कर देंगे। सात घंटे हम अपना खुद का बुलबुला बनाएंगे। सात घंटे सिर्फ हम और हमारी कहानी। कोई बाहरी कहानी नहीं, हम अपनी कहानी खुद लिखेंगे। चलो इतिहास रचते हैं।'
मजूमदार ने बताया कि वह ड्रामा में यकीन नहीं रखते और जो भी कहा, दिल से कहा। उन्होंने कहा, 'मैं ड्रामेबाजी में यकीन नहीं करता। जो भी कहता हूं, दिल से कहता हूं। फाइनल से पहले के सभी मैचों में मुझे पता होता था कि हडल (टीम मीटिंग) में क्या कहना है, लेकिन फाइनल में यह भाषण अपने आप आ गया। उस पल जो महसूस हुआ, वही बोल दिया।'
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खिताबी जीत पर भी की बात
विश्व कप जीत पर बोलते हुए मजूमदार ने कहा कि खिताब जीतना एक सपना था, लेकिन यह सफर यहीं खत्म नहीं होता। उन्होंने आगे कहा, 'विश्व कप जीतना सपना था, लेकिन यह सपना यहीं खत्म नहीं होता। अब यह सफर जारी रहेगा। एक लक्ष्य पूरा हुआ है, अब नए लक्ष्य सामने हैं।'
विश्व कप जीत पर बोलते हुए मजूमदार ने कहा कि खिताब जीतना एक सपना था, लेकिन यह सफर यहीं खत्म नहीं होता। उन्होंने आगे कहा, 'विश्व कप जीतना सपना था, लेकिन यह सपना यहीं खत्म नहीं होता। अब यह सफर जारी रहेगा। एक लक्ष्य पूरा हुआ है, अब नए लक्ष्य सामने हैं।'