क्रिकेट सुधार पर सुनवाई जनवरी 2021 में, सौरव गांगुली बने रहेंगे बीसीसीआई अध्यक्ष
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को क्रिकेट सुधार से संबंधित मामलों को लेकर राज्य क्रिकेट संघों की वादाकाली याचिकाओं का निपटारा कर दिया। वहीं, बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली, सचिव जय शाह और सह सचिव जयेश जॉर्ज के पद पर बने रहने से संबंधित याचिका पर सुनवाई अगले साल जनवरी तक के लिए टाल दिया गया। इनका कार्यकाल कुछ महीनों पहले खत्म हो चुका है।
न्यायमित्र (एमिकस क्यूरी) पीएस नरसिम्हा ने सुनवाई के बाद कहा, 'अदालत द्वारा पर्याप्त संख्या में आवेदनों का निपटारा किया गया। बड़ी संख्या में मामले जो धन से संबंधित थे, वे विनाशकारी हो गए हैं, जबकि अदालत ने कहा कि राज्य क्रिकेट संघों में जहां एमिकस क्यूरी (नरसिम्हा) ने सफलतापूर्वक मध्यस्थता की थी और कर्नाटक के चुनावों में उनकी मदद की थी, उनका भी निपटारा कर दिया गया।' उन्होंने कहा, 'केवल कुछ मामले बचे हैं और अदालत ने इन्हें जनवरी के तीसरे सप्ताह में सूचीबद्ध करने के लिए कहा है। बीसीसीआई ने अपने संविधान में संशोधन की मांग की, जिस पर आज सुनवाई नहीं की गई।'
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संघों से जुड़े विवादों की सुनवाई के लिए अन्य अदालतों पर लगाई गई अपनी रोक बुधवार को हटा ली। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की पीठ ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिए की गई सुनवाई के दौरान राज्य क्रिकेट संघों की ओर से दी गई विभिन्न वकीलों की दलीलों का संज्ञान लिया और आदेश निष्प्रभावी करने का फैसला किया।
दरअसल, शीर्ष न्यायालय ने 14 मार्च 2019 को देश भर की सभी अन्य अदालतों को बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संघों से जुड़े किसी विषय पर कार्यवाही करने या सुनवाई करने से रोक दिया था, जब तक कि न्यायालय द्वारा नियुक्त मध्यस्थ एवं वरिष्ठ अधिवक्ता पी एस नरसिम्हा लंबित विवादों पर अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप देते हैं।
उस वक्त न्यायमित्र के तौर पर न्यायालय की सहायता कर रहे नरसिम्हा को बीसीसीआई में क्रिकेट प्रशासन से जुड़े लंबित विवादों के समाधान के लिए मध्यस्थ नियुक्त किया गया था। नरसिम्हा ने कहा कि सभी याचिकाकर्ताओं को, जिन्होंने विभिन्न राहत की मांग की है और जिन पर उच्च न्यायालयों द्वारा फैसला किया जा सकता है, उन्हें अब निराकरण पाने के लिए संबद्ध उच्च न्यायालय जाने की अनुमति है।
शीर्ष न्यायलय ने इस बात का संज्ञान लिया कि काफी संख्या में अर्जियां निष्फल हो गई हैं क्योंकि उनमें मांगी गई राहत मध्यस्थता प्रक्रिया में दी जा चुकी है। बहरहाल, शीर्ष न्यायालय ने कुछ लंबित अंतरिम अर्जियों को अगले साल जनवरी के तीसरे हफ्ते में सुनवाई के लिए निर्धारित कर दिया।
शीर्ष न्यायालय ने 2017 में भारत के पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) विनोद राय की अध्यक्षता वाली सीओए को बीसीसीआई का कामकाज करने के लिए और न्यायमूर्ति आर एम लोढ़ा समिति की न्यायालय द्वारा मंजूर की गई सिफारिशों को लागू करने के लिए नियुक्त किया था। लोढ़ा समिति ने बीसीसीआई में सुधारों पर कुछ सिफारिशें की थी।