Bronco Test: '2027 विश्व कप से पहले क्यों लाया गया ब्रोंको टेस्ट, क्या निशाने पर हैं हिटमैन?' बोले मनोज तिवारी
ब्रोंको टेस्ट को भारतीय टीम के सेंट्रल ऑफ एक्सीलेंस में शामिल किया गया है, जिसमें खिलाड़ी को एक सेट में 20 मीटर, 40 मीटर और 60 मीटर दौड़ पूरी करनी होती है। कुल दूरी लगभग 1200 मीटर हो जाती है, जिसे छह मिनटों में पूरा करना होता है।
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ब्रोंको टेस्ट को भारतीय टीम के सेंट्रल ऑफ एक्सीलेंस में शामिल किया गया है, जिसमें खिलाड़ी को एक सेट में 20 मीटर, 40 मीटर और 60 मीटर दौड़ पूरी करनी होती है। कुल दूरी लगभग 1200 मीटर हो जाती है, जिसे छह मिनटों में पूरा करना होता है। यह टेस्ट पहले से मौजूद यो-यो टेस्ट और दो किलोमीटर टाइम-ट्रायल के साथ मिलकर खिलाड़ियों की फिटनेस का मूल्यांकन करेगा। यह टेस्ट तेज गेंदबाजों की एरोबिक क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। इसे टीम के नए स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कोच एड्रियन ले रूक्स ने सुझाया और मुख्य कोच गौतम गंभीर ने इसे मंजूरी दी।
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गेंदबाजों को लिए लाया गया
हाल फिलहाल में देखा गया है कि भारतीय तेज गेंदबाज लंबे समय तक चोट से जूझते रहे हैं। इस साल आईपीएल से पहले तक कई मुख्य तेज गेंदबाज चोटिल थे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अब उनके स्टैमिना को बढ़ाने और उन्हें लंबे समय तक फिट रखने के लिए यह टेस्ट अनिवार्य किया गया है। यह टेस्ट रग्बी से लिया गया है और खिलाड़ियों की एरोबिक क्षमता और रनिंग स्टैमिना को जांचने के लिए बनाया गया है। कोचिंग स्टाफ का मानना है कि खिलाड़ी जिम में ज्यादा समय बिता रहे हैं, जबकि असली चुनौती मैदान पर लगातार दौड़ने और पारी दर पारी गेंदबाजी करने की है। इस टेस्ट से यह सुनिश्चित होगा कि तेज गेंदबाज लंबे स्पेल तक थकान झेले बिना अपनी गेंदबाजी की गति बनाए रख सकें।
एक स्पोर्ट्स वेबसाइट से बात करते हुए पूर्व भारतीय क्रिकेटर मनोज तिवारी ने सार्वजनिक रूप से इस टेस्ट पर संदेह जताया। उन्होंने कहा कि जबकि विराट कोहली को 2027 वर्ल्ड कप योजनाओं में बनाए रखना आसान होगा, रोहित शर्मा की फिटनेस को लेकर इस टेस्ट से चयन पर असर पड़ सकता है। वे यह अनुमान लगाते हैं कि यह टेस्ट बाद के फेज में खास खिलाड़ियों को बाहर करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
'रोहित शर्मा के लिए लाया गया'
मनोज तिवारी ने कहा, 'मुझे लगता है कि विराट कोहली को 2027 विश्व कप की योजनाओं से बाहर रखना बेहद मुश्किल होगा, लेकिन मुझे शक है कि रोहित शर्मा को इस योजना में शामिल किया जाएगा या नहीं। देखिए, मैं भारतीय क्रिकेट में हो रही घटनाओं पर नजदीक से नजर रखता हूं। मेरा मानना है कि यह ब्रोंको टेस्ट, जो कुछ दिन पहले ही लागू किया गया है, खासतौर पर रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ियों के लिए लाया गया है, जिन्हें कुछ लोग शायद भविष्य की टीम का हिस्सा नहीं बनाना चाहते। यही वजह है कि इसे लागू किया गया है।'
मनोत तिवारी ने सवाल खड़े किए
उन्होंने आगे कहा, 'ब्रोंको टेस्ट भारतीय क्रिकेट में लागू किए गए अब तक के सबसे कठिन फिटनेस टेस्ट मानकों में से एक होगा। लेकिन असली सवाल यह है कि अभी क्यों? जब आपके नए मुख्य कोच ने पहली सीरीज से जिम्मेदारी संभाली थी, तब क्यों नहीं? यह आइडिया किसका था? किसने इसे लागू किया? किसने इसे कुछ दिन पहले ही लागू करने कहा? यह ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब मेरे पास नहीं हैं। लेकिन मेरा अवलोकन यही कहता है कि अगर रोहित शर्मा अपनी फिटनेस पर बहुत मेहनत नहीं करते हैं तो उनके लिए मुश्किलें होंगी। और मुझे लगता है कि उन्हें ब्रोंको टेस्ट के आधार पर ही रोका जाएगा।'
इस फिटनेस टेस्ट के समय पर आपत्तियां भी उठ रही हैं। फैंस ये सवाल उठा रहे हैं कि यह टेस्ट तभी क्यों लाया गया जब गौतम गंभीर मुख्य कोच बने और एड्रियन जून में टीम में आए? इस मेल की क्या आवश्यकता थी,क्योंकि नियम तो पहले भी बन सकता था। फैंस का मानना है कि चयन प्रक्रिया में ब्रोंको टेस्ट को पैमाना बनाने से इस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्न उठेंगे। अब यह समय ही बताएगा कि रोहित शर्मा इस फिटनेस चुनौती को पार कर पाते हैं या नहीं और क्या यह टेस्ट उनके वनडे करियर पर असर डालता है।