टी-20 वर्ल्ड कप के 8 ऐसे रिकॉर्ड जो इस बार भारत में बने
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डेरेन सैमी की अगुवाई वाली कैरेबियाई टीम ने रिकॉर्ड दूसरी बार इस खिताब पर कब्जा जमाया। इससे पहले खेले गए 5 संस्करणों में हर बार एक नई टीम चैंपियन बनकर उभरी थी। पाकिस्तान, टीम इंडिया और श्रीलंका एक से ज्यादा बार वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचने में कामयाब रही थी लेकिन ये टीमें 2 पार खिताब जीतने का कारनामा करने में नाकाम रहीं। जबकि विंडीज की टीम ने दूसरी बार फाइनल खेल रहे इंग्लैंड को हराते हुए कीर्तिमान रच ही दिया।
हालांकि कैरेबियाई टीम के इतिहास रचने से पहले भी कई दिलचस्प बातें भी हुई। इन्हीं ढेर सारी दिलचस्प बातों के बीच कई रिकॉर्ड्स भी बने। आइए, जानते हैं भारत में हुए टी-20 वर्ल्ड कप में बने 8 रोचक रिकॉर्ड्स को।
ये रहे वो 8 रिकॉर्ड जिन्हें आप जरूर जानना चाहेंगे
पहला, छक्कों के लिहाज से यह वर्ल्ड कप बेहद खास रहा। पिछले 6 संस्करणों में सबसे ज्यादा छक्के इसी बार लगे। 2007 में पहला वर्ल्ड कप खेला गया जिसमें 265 छक्के (27 मैच) लगे थे और इस बार तो किसी एक टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा छक्के लगने का रिकॉर्ड ही बन गया। इस बार बल्लेबाजों ने 35 मैचों से कुल 314 छक्के जड़े।
दूसरा, टी-20 अंतरराष्ट्रीय के किसी मैच के अंतिम ओवर में सबसे ज्यादा रन बनाते हुए मैच जीतने का रिकॉर्ड भी इसी वर्ल्ड कप में बना। इंग्लैंड के खिलाफ मैच में जीत हासिल करने के लिए विंडीज को 6 गेंदों में 19 रन चाहिए थे। क्रीज पर कार्लोस ब्रेथवेट को गेंदबाज बेन स्टोक्स का सामना करना था। ब्रेथवेट ने 20वें ओवर के पहले 4 गेंदों में लगातार छक्के जड़कर अपनी टीम को ऐतिहासिक जीत दिला दी। इससे पहले 2010 में ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान के खिलाफ 23 रन बनाते हुए मैच में जीत हासिल की थी।
तीसरा, कुछ ही खिलाड़ी ऐसे हैं जिन्हें टी-20 वर्ल्ड कप के सभी संस्करणों में खेलने का मौका मिला है। इन्हीं में से एक क्रिकेटर ऐसा भी है जिसके नाम सबसे ज्यादा टी-20 वर्ल्ड कप के मैच खेलने का रिकॉर्ड बन गया है। श्रीलंका के ओपनर दिलशान तिलकरत्ने ने रिकॉर्ड 35 वर्ल्ड कप मैच खेले जिसमें 30.93 की औसत से 897 रन बनाए हैं। दिलशान के बाद सबसे ज्यादा मैच खेलने का रिकॉर्ड पाकिस्तान टीम के कप्तान रहे शाहिद अफरीदी का है जिन्होंने 34 मैच खेले हैं। वहीं टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने 33 मैच खेले हैं।
चौथा, टी-20 वर्ल्ड कप के सबसे ज्यादा मैचों में कप्तानी करने का रिकॉर्ड टीम इंडिया के पास है। टीम के बजाए कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के पास है कहें तो ज्यादा बेहतर होगा। धोनी 2007 के पहले संस्करण में कप्तान बनने के बाद से टीम की लगातार इस महाकुंभ में अगुवाई कर रहे हैं। उन्होंने रिकॉर्ड 33 मैचों में कप्तानी की, साथ ही वह हर मैच में बतौर कप्तान ही उतरे हैं।
पांचवां, टी-20 वर्ल्ड कप में विकेट के पीछे सबसे ज्यादा शिकार करने का रिकॉर्ड भी इसी टूर्नामेंट में बना। यह रिकॉर्ड भी भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के नाम ही है जिन्होंने 32 मैचों में 32 (21 कैच और 11 स्टंपिंग) शिकार किए हैं। इस तरह से देखा जाए तो उन्होंने औसतन हर मैच में एक शिकार किया है। उन्होंने यह रिकॉर्ड पाकिस्तान के विकेटकीपर कामरान अकमल से छीना। इस पाक विकेटकीपर ने 30 शिकार किए हैं वर्ल्ड कप में। इस बार धोनी ने कुल 8 शिकार किए जिसमें 4 कैच और 4 स्टंप किए हैं।
छठा, पाकिस्तान की टीम के लिए भले ही यह वर्ल्ड कप नाकामीभरा साबित हुआ हो, लेकिन कप्तान शाहिद अफरीदी ने एक वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। टी-20 के सफलतम गेंदबाजों में शुमार किए जाने वाले श्रीलंका के लसित मलिंगा के चोटिल होने से बाहर होने का मौका अफरीदी ने उठाया और वह टूर्नामेंट के सबसे सफल गेंदबाज हो गए। अफरीदी ने 4 मैचों से 4 विकेट झटककर मलिंगा को पीछे छोड़ दिया। पाक के इस पूर्व कप्तान के नाम अब 34 मैचों से 39 विकेट हो गए हैं, जबकि मलिंगा ने 38 विकेट लिए हैं।
सातवां, टी-20 वर्ल्ड कप के एक मैच में सबसे ज्यादा छक्के जमाने का 9 साल पुराना रिकॉर्ड क्रिस गेल ने अपने नाम बरकरार रखा। इंग्लैंड के खिलाफ फाइनल में भिड़ने से पहले विंडीज की इस टीम से भिड़ंत लीग मैच में हुई थी जिसमें गेल में शानदार शतक लगाया था। इस नाबाद शतकीय पारी में उन्होंने 5 चौके के साथ-साथ 11 छक्के भी जड़े जो किसी एक वर्ल्ड कप मैच में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड है। उन्होंने एक मैच में सर्वाधिक छक्के लगाने का अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा जो उन्होंने 2007 के संस्करण में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच में 10 छक्के के साथ-साथ शतक भी लगाया था।
आठवां, रिकॉर्ड की बात हो और विराट कोहली का जिक्र न हो ऐसा हो ही नहीं सकता। प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बने कोहली ने 5 मैचों में 136.50 की औसत से 273 रन बनाए। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 146.77 रहा। साथ ही टूर्नामेंट के इतिहास में उन्होंने सिर्फ 16 पारियों में 777 रन बनाए और वह भी 86.33 की औसत से।