अजहर से लेकर श्रीसंथ तक, वो पांच भारतीय क्रिकेटर जो मैच फिक्सिंग में फंस बर्बाद हुए
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
क्रिकेट इतिहास का यह सबसे बड़ा मैच फिक्सिंग स्कैंडल भारत-दक्षिण अफ्रीका के बीच 2000 में हुई सीरीज के दौरान सामने आया था। दिल्ली पुलिस ने खुलासा किया कि दोनों टीमों के पांच खिलाड़ी मैच फिक्स करने के लिए बुकियों के संपर्क में थे।
टीम इंडिया के कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन और दक्षिण अफ्रीका के कप्तान हैंसी क्रोनिए पर आरोप लगे। शुरू में क्रोनिए ने इन आरोपों से इनकार किया, लेकिन बाद में स्वीकार किया कि अजहर ने उन्हें बुकी से मिलवाया था।
बाद में अजहर और अजय जडेजा पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया। 2002 में क्रोनिए की एक प्लेन दुर्घटना में मौत हो गई थी।
2013 में आईपीएल की टीम राजस्थान रॉयल्स के क्रिकेटर्स श्रीसंथ, अंकित चव्हाण और अजित चंदौलिया को आईपीएल मैचों में स्पॉट फिक्सिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि श्रीसंथ और चव्हाण ने स्पॉट फिक्सिंग में शामिल होने की बात स्वीकार कर ली है।
इस कांड ने यह उजागर कर दिया कि आईपीएल में बड़े पैमाने पर मैच फिक्सिंग और स्पॉट फिक्सिंग चल रही है। बाद में श्रीसंथ को कोर्ट से क्लीन चिट मिल गई लेकिन बीसीसीआई ने उन पर लगा बैन नहीं हटाया।
भारत के दिग्गज ऑलराउंडर्स में एक रहे मनोज प्रभाकर पर फिक्सिंग आरोपों के कारण पांच साल का बैन लगा था, जो उनके करियर पर भारी पड़ गया। उनपर बहुत से बुकीज से संबंध रखने का आरोप लगा।
2000 में मनोज प्रभाकर ने दिग्गज कपिल देव और दूसरे खिलाड़ियों पर फिक्सिंग का आरोप लगाकर तहलका मचाया था, लेकिन बाद में वे खुद फंस गए।
भारतीय क्रिकेट में अजय शर्मा ने प्रथम श्रेणी में 67.46 की औसत से सबसे तेज रन बनाने वाले बल्लेबाज माने जाते थे। घरेलू मैचों में उन्होंने कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए. लेकिन मैच फिक्सिंग के आरोप लगने के बाद अजय शर्मा का क्रिकेट करियर पूरी तरह से खत्म हो गया।