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सरकार बनाम अवाम: अपने ही नियमों को तोड़ रहा पाकिस्तान, समझ से परे है हुकूमत की मंशा

Sat, 21 Sep 2024 06:34 AM IST
mariana babar मरिआना बाबर
Updated Sat, 21 Sep 2024 06:34 AM IST
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सार
पाकिस्तान में एक्स पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध है, लेकिन प्रधानमंत्री समेत सभी मंत्री और अधिकारी एक्स का धड़ाधड़ उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान सरकार को चुनना होगा कि क्या सोशल मीडिया पर नफरत को रोकने के लिए उसे प्रतिबंधित करना उचित है या डिजिटल अर्थव्यवस्था को बचाना।
 
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X is officially banned in Pakistan, but all ministers and officials including Prime Minister are using X
एक्स - फोटो : एएनआई

विस्तार

पाकिस्तान सरकार ने कई महीनों से एक्स (ट्विटर) पर पहुंच प्रतिबंधित कर रखी है। इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक उपयोगकर्ता सिर्फ मुफ्त या सशुल्क वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) के जरिये पहुंच सकते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, एक्स प्लेटफॉर्म उत्तर कोरिया, बेलारूस, चीन, मिस्र, तुर्कमेनिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई अन्य देशों में भी प्रतिबंधित है। कुछ देशों में केवल सरकार द्वारा अनुमोदित वीपीएन ही वैध हैं, हालांकि उपयोगकर्ताओं की निगरानी की जाती है। लेकिन अभी तक पाकिस्तानी हुकूमत ने फेसबुक और व्हाट्सएप पर प्रतिबंध नहीं लगाया है। जबसे सरकार ने फायरवॉल लगाने की प्रक्रिया शुरू की है, यहां काफी हंगामा मचा हुआ है। सरकार का तर्क है कि यह साइबर सुरक्षा का मामला है और दुनिया भर के देश इस तकनीक का उपयोग करते हैं।



चीन, ईरान, तुर्किये और रूस जैसे देशों ने इंटरनेट सामग्री को विनियमित करने के लिए वर्षों से राष्ट्रीय फायरवॉल का उपयोग किया है, उनका कहना है कि उनका उद्देश्य स्रोतों को चिह्नित करना और उन्हें प्रतिबंधित करना है।


यह मामला अदालत में भी ले जाया गया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली, क्योंकि गृह मंत्रालय ने कहा कि वे एक्स पर रोक हटाकर राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं कर सकते। पाकिस्तान में एक्स पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध है, इसलिए सवाल पूछा जा रहा है कि प्रधानमंत्री और उनके कैबिनेट मंत्री तथा सभी मंत्रालय विदेशी अधिकारियों सहित जनता तक पहुंचने के लिए एक्स का उपयोग क्यों कर रहे हैं। यह हास्यास्पद है कि सरकार अपने ही नियमों को तोड़ रही है।

सुरक्षा प्रतिष्ठान ने एक्स की ताकत की आलोचना की, जिसका पाकिस्तान तहरीक-ए-इन्साफ (पीटीआई) और इसके प्रमुख पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के विदेशी समर्थकों ने चुनाव से पहले समर्थकों और अब विपक्ष तक पहुंचने के लिए इस चालाक तकनीक का इस्तेमाल किया। जब सुप्रीम कोर्ट ने खान पर प्रतिबंध लगाया था, तब भी वह इसका इस्तेमाल करने में सफल रहे थे। अन्य राजनीतिक दलों के विपरीत पीटीआई को कई वर्षों से बढ़त हासिल थी। पिछले चुनाव में पीटीआई का चुनाव चिह्न क्रिकेट बैट था, लेकिन पीटीआई उम्मीदवारों को स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने के लिए मजबूर कर उन्हें अलग-अलग चुनाव चिह्न आवंटित किए गए, लेकिन मतदाताओं को एक्स से दिशा-निर्देश मिले। सोशल मीडिया ने काम किया व पीटीआई ने बहुमत हासिल किया, पर चुनाव आयोग ने उसकी जीत की घोषणा नहीं की।

इस सप्ताह फिर से एक्स सरकार और उसके सहयोगी दलों के लिए बाधक बना, जब उन्होंने नेशनल असेंबली और सीनेट में कुछ सांविधानिक संशोधनों को पेश करने की कोशिश की। ये संशोधन न्यायिक सुधारों से संबंधित थे, जहां राजकोषीय (ट्रेजरी) बेंच अधिक शक्तियां प्राप्त करना चाहती थीं, जो अभी न्यायपालिका को प्राप्त हैं। कुछ संशोधन सेना के पक्ष में थे, ताकि उनके खिलाफ मामलों को सिविल अदालतों में चुनौती न दी जा सके।

यह मुद्दा एक्स पर वायरल हो गया, जहां लोगों ने इसका विरोध किया और मांग की कि इन संशोधनों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, इन पर बहस होनी चाहिए और फिर इन्हें दोनों सदनों में लाया जाना चाहिए। सरकार पूरी तरह से बेनकाब हो गई, क्योंकि ऐसा लगा कि सांविधानिक संशोधनों को कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया था और पार्टी के किसी भी मंत्री या सदस्य ने मसौदा भी नहीं देखा था। सरकार को मजबूर होकर संसद सत्र बुलाना पड़ा और कहना पड़ा कि वह ये संशोधन बाद में लाएगी।

लेकिन मुल्क में इंटरनेट की गति बहुत धीमी हो गई है, क्योंकि इसके चारों ओर फायरवॉल बनाया जा रहा है। पाकिस्तान सॉफ्टवेयर हाउसेज एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अली एहसान ने एक बयान में कहा, 'तेजी से बढ़ता आईटी उद्योग एक आपदा का सामना कर रहा है, जो अभूतपूर्व परिचालन व्यवधानों से जूझ रहा है, और पाकिस्तान के बढ़ते तकनीकी क्षेत्र की नींव को खतरा पहुंचा रहा है।' उन्होंने कहा कि लंबे समय तक इंटरनेट व्यवधान और अनियमित वीपीएन प्रदर्शन से व्यावसायिक संचालन के पूरी तरह से ठप होने का खतरा है। उन्होंने कहा, 'ये व्यवधान महज असुविधाएं ही पैदा नहीं कर रहे हैं, बल्कि उद्योग की व्यवहार्यता पर प्रत्यक्ष, ठोस और आक्रामक हमला हैं, जिससे भारी वित्तीय नुकसान होने का अनुमान है, जो 30 करोड़ डॉलर से ज्यादा तक पहुंच सकता है।' आईटी कंपनियों का कहना है कि इससे पाकिस्तानी कारोबारों को करोड़ों डॉलर का नुकसान हुआ है। पत्रकारों को भी धीमी इंटरनेट का सामना करना पड़ रहा है और एक्स से जुड़ने के लिए वीपीएन का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। एक तरफ सरकार सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति का वादा करती है, दूसरी तरफ वह इसे पूरी तरह से रोक रही है!

साइबर हमलों को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे-बड़े संगठनों को अपने नेटवर्क के बचाव के लिए सुरक्षा उपाय करने चाहिए। इनमें प्रॉक्सी सर्वर, वीपीएन और एन्क्रिप्शन सॉफ्टवेयर जैसे टूल का इस्तेमाल करना है। ये हैकिंग, घुसपैठ और साइबर हमलों के खिलाफ सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। डिजिटल अधिकारों के लिए काम करने वाली गैर-लाभकारी संस्था 'बोलो भी' ने जून 2020 में चेतावनी दी कि वीपीएन रजिस्टर करने से न केवल इस्तेमाल की जाने वाली विशिष्ट वीपीएन सेवा सरकार के डाटाबेस में आपकी पहचान से जुड़ जाएगी, बल्कि सरकार को आपकी इच्छानुसार आपके डाटा के लिए अनुरोध करने और निजी डाटा तक पहुंचने की अनुमति भी मिल जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि निर्देशों का अनुपालन नहीं करने वाले वीपीएन सेवा प्रदाताओं की सेवा सरकार बंद भी कर सकती है। अनिवार्य रूप से, वीपीएन पंजीकरण एक सार्वजनिक निगरानी उपकरण बन सकता है, जो विश्वास की आड़ में व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है।

पाकिस्तान सरकार चाहती है कि स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय, दोनों कंपनियां क्लाउड सेवाओं सहित देश के भीतर पाकिस्तानी लोगों के बारे में डाटा जमा करें। फिर इसका कोई ठोस सबूत नहीं है कि यह दृष्टिकोण सुरक्षा के लिए स्वर्ण मानक है। एक मुद्दा जो अब भी सुरक्षा प्रतिष्ठान को परेशान कर रहा है, वह है सैन्य विरोधी ट्वीट, जिनमें से कुछ वास्तव में अस्वीकार्य हैं, ज्यादातर विदेशों में रह रहे पाकिस्तानियों द्वारा, जिनमें से अधिकांश पीटीआई समर्थक हैं। यह एक नया चलन है, जो इमरान खान के जेल जाने और सुरक्षा प्रतिष्ठान के साथ उनके लगातार टकराव के बाद शुरू हुआ है। सरकार को चुनना होगा कि क्या सोशल मीडिया पर नफरत को रोकने के लिए उसे प्रतिबंधित करना उचित है या डिजिटल अर्थव्यवस्था को बचाना बेहतर है, क्योंकि मुल्क में 60 प्रतिशत से अधिक युवा हैं और उनमें से कई इंटरनेट से अपनी आजीविका कमाते हैं? 

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