फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Whose wave is it in Tamil Nadu? Forming a stable government is not an easy path

सत्ता संग्राम : तमिलनाडु में किसकी लहर, स्थायी सरकार बनाने की आसान नहीं डगर

Fri, 19 Sep 2025 06:59 AM IST
r.rajgopalan राजगोपालन आर. राजगोपालन
Updated Fri, 19 Sep 2025 06:59 AM IST
विज्ञापन
सार
राज्य में अगले साल अप्रैल में चुनाव होने हैं, लेकिन विपक्षी और सत्ताधारी दल आपसी कलह में उलझे हुए हैं। अब तक कोई भी पार्टी मजबूत गठबंधन नहीं बना सकी है। राज्य के छह करोड़ मतदाताओं को समझना होगा कि यदि स्थायी सरकार नहीं बनी, तो यह राज्य की प्रगति के साथ ही देश की सुरक्षा के लिए भी जोखिम भरा होगा।
 
loader
Whose wave is it in Tamil Nadu? Forming a stable government is not an easy path
एम के स्टालिन, नरेंद्र मोदी - फोटो : पीटीआई

विस्तार

तमिलनाडु की राजनीति गरमा रही है। अगले साल अप्रैल में संभावित विधानसभा चुनाव राजनीतिक पार्टियों को डरा रहे हैं। चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक गर्मी तो दिखने लगी है, लेकिन न तो सत्ता पक्ष और न ही विपक्ष के पक्ष में कोई तेज लहर दिख रही है। ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) और अन्य छोटी विपक्षी पार्टियां अब तक मजबूत विपक्षी गठबंधन नहीं बना सकी हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने निश्चित ही अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन कर अपनी कुछ पैठ बनाई है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि को बढ़ावा मिलने की वजह से सत्ताधारी दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) में आपसी कलह मची हुई है। राज्य के विवादास्पद मुद्दों में बिगड़ी कानून व्यवस्था, नशीले पदार्थों का खतरा, शराब घोटाला और रेत माफिया का बोलबाला प्रमुख हैं। संक्षेप में, विपक्ष या सत्ताधारी दल की ओर से अब तक कोई चुनावी माहौल नहीं बनाया गया है।



राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में अभिनेता से नेता बने तमिल वेत्री कड़गम के विजय जोसेफ जैसे नए खिलाड़ी हैं, तो पट्टाली मक्कल काची में फूट पड़ी है। तमिल राष्ट्रवाद की राजनीति करने वाली पार्टियों, जैसे विजयकांत की द्रविड़ मुर्पोक्कू मुनेत्र कड़गम और सीमान के नेतृत्व वाली नाम तमिलार काची, टीटीवी दिनाकरन की अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके), इनमें से किसी ने भी अब तक कोई ठोस गठबंधन नहीं किया है। हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसी साल अप्रैल में अन्नाद्रमुक के साथ भाजपा के गठबंधन की घोषणा कर दी थी। आगामी चुनाव में कई कारक असर डालेंगे।


प्रमुख मुद्दे : राज्य में आर्थिक, राजकोषीय, औद्योगिक और कृषि जैसे कारक महत्वपूर्ण हैं। राज्य के पास धन का अभाव है। वित्तीय व्यवस्था बाहरी कर्जे पर निर्भर है। बैंकों का ओवरड्राफ्ट बढ़ गया है। नीति निर्माण के उच्च स्तर पर कटौती और कमीशनखोरी की वजह से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) बहुत न्यूनतम स्तर पर है।

राहुल गांधी फैक्टर : कांग्रेस के पास अपना खुद का अच्छा-खासा वोट बैंक था, लेकिन राहुल गांधी पूरी तरह द्रमुक पर निर्भर थे। नतीजतन, कांग्रेस युवाओं को अपने साथ नहीं जोड़ पाई। कांग्रेस के जनाधार को बरकरार रखने में पार्टी का राज्य नेतृत्व विफल रहा। पी चिदंबरम जैसे कद्दावर नेताओं के बावजूद द्रमुक ने बड़ी ही चतुरता से कांग्रेस को अपने प्रभाव के नीचे रखा।  

राज्य की अन्य पार्टियां : अगले साल तमिलनाडु में छह करोड़ से अधिक मतदाता 234 विधानसभा सदस्यों को चुनेंगे। राज्य में 12 लोकप्रिय पार्टियां हैं, जो चुनाव में अपना भाग्य आजमाएंगी। कुछ नए दल भी बन रहे हैं। ऐसे में द्रविड़ विचारधारा का परीक्षण लाजिमी है। कहने की जरूरत नहीं है कि अध्यात्मवाद के चलते एक सौम्य हिंदुत्व की भावना पहले से ही राज्य में विद्यमान थी, जो अब उभरकर सामने आ रही है। इसके अलावा, तमिलनाडु के चुनाव में जातियां भी अहम भूमिका निभाती रही हैं। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार केंद्र में सरकार बनाने वाली भाजपा ने तमिल के युवाओं में राष्ट्रवाद की भावना भर दी है। जबकि राज्य के राजनीतिक दलों में अंदरूनी कलह जारी है। इनके नेता वरिष्ठ-कनिष्ठ, निष्कासन, दल-बदल, साझा न्यूनतम मसौदा तैयार करने में उलझे हुए हैं।

अन्नाद्रमुक में बगावत : मुख्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक में बगावत और गुटबंदी गठबंधन के विस्तार के लिए अहम समस्या है। एडापडी के पलानीस्वामी (ईपीएस) ने कानूनी लड़ाई के जरिये नीति निर्माण के लिए संगठन के महासचिव का पद, और सबसे बड़ी बात, पार्टी का दो पत्ती का चुनाव चिह्न अपने पास रखा है।

दो वरिष्ठ नेताओं का टकराव : अन्नाद्रमुक के असंतुष्ट नेता सेंगोट्टायन, जो एमजीआर-जयललिता के कट्टर समर्थक माने जाते रहे हैं, बीते कुछ दिनों से सुर्खियां बटोर रहे हैं। उन्होंने पार्टी से अलग हुए धड़ों को मिलाने को लेकर अन्नाद्रमुक के शीर्ष नेता ईपीएस को दस दिन का अल्टीमेटम दे दिया। ईपीएस ने इसे मानने के बजाय अनुशासनहीनता बताते हुए सेंगोट्टायन को तत्काल पार्टी के सभी दायित्वों से मुक्त कर दिया। इस कठोर कार्रवाई ने निश्चित रूप से एमजीआर और जयललिता के अनुयायियों को विचलित किया होगा। ईपीएस द्वारा सेंगोट्टायन पर की गई कार्रवाई का अन्नाद्रमुक के पूर्व संयोजक ओ पन्नीरसेल्वम (ओपीएस), एएमएमके के महासचिव टीटीवी दिनाकरन और दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता की सहयोगी रहीं वीके शशिकला ने निंदा कर उन्हें सांत्वना दी है। सेंगोट्टायन की बर्खास्तगी को ‘तानाशाही की पराकाष्ठा’ बताते हुए ओपीएस ने कहा, ‘वह पार्टी के सबसे वरिष्ठ पदाधिकारियों में से एक हैं। उनका मकसद सिर्फ पार्टी को एकजुट करना है। उन्हें इतनी बड़ी सजा इसलिए दी गई, क्योंकि उन्होंने एकता की आवाज को बुलंद किया।’ टीटीवी दिनाकरन ने सेंगोट्टायन के एकता के आह्वान का समर्थन किया और चेतावनी दी कि सभी पार्टी नेताओं को एकजुट करने में विफलता अन्नाद्रमुक की हार का कारण बनेगी।

पार्टियों के तूफानी दौरे : द्रमुक एवं अन्नाद्रमुक के नेताओं ने रोड शो करने शुरू कर दिए हैं। एमके स्टालिन का ध्यान द्रमुक सरकार की समाज कल्याण योजनाओं पर है। विपक्षी अन्नाद्रमुक नेता एडापडी पलानीस्वामी 125 विधानसभा क्षेत्रों में रोड शो कर चुके हैं और शेष बचे 109 क्षेत्रों में आने वाले महीनों में रोड शो करेंगे।

स्टालिन की विदेश यात्रा : मुख्यमंत्री के रूप में अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) हासिल करने के लिए एमके स्टालिन विदेश दौरे पर गए थे। विपक्ष के कई नेताओं ने इसे ढकोसला बताते हुए आलोचना की कि बीते चार साल तक एफडीआई के सिर्फ झूठे दावे किए गए थे। अब भी सिर्फ दिखावे के लिए मुख्यमंत्री विदेश दौरों पर जा रहे हैं, जिसका उन्हें कोई लाभ नहीं मिलने वाला।  

तमिलनाडु का भविष्य और जोखिम : आप चाहे इसे जिस तरह से देखें, तमिलनाडु का भविष्य सकारात्मक और नकारात्मक भावनाओं से भरा है। यदि मतदाता स्थायी सरकार नहीं चुनते हैं, तो राज्य की प्रगति नहीं होगी। अगले छह माह में राज्य के छह करोड़ मतदाताओं को इसे लेकर अपना मन बना लेना चाहिए कि श्रीलंका और मालदीव से सटे तटवर्ती राज्य तमिलनाडु को गठबंधन की सरकार नहीं चाहिए। यह देश की सुरक्षा के लिए भी जोखिम भरा होगा।                   

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed