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बांग्लादेश में विकास जीतेगा या विपक्ष

Sun, 16 Dec 2018 06:36 PM IST
subir bhowmik सुबीर भौमिक
Updated Sun, 16 Dec 2018 06:36 PM IST
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who will win in Bangladesh-development or opposition
शेख हसीना

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना अर्थशास्त्री नहीं हैं, लेकिन इन दिनों वह आर्थिक मामलों पर बात करना पसंद करती हैं। उनके दस साल के शासन ने असाधारण आर्थिक विकास और मानव विकास देखा है, जिसने देश को बदल दिया है। आगामी 30 दिसंबर को होने वाले संसदीय चुनाव में सत्तारूढ़ अवामी लीग को अपेक्षाकृत एकजुट विपक्ष का सामना करना पड़ेगा, लेकिन हसीना आश्वस्त हैं कि 'मतदान पेटी में उनका काम बोलेगा।' बांग्लादेश के अस्तित्व की 50वीं सालगिरह पर वर्ष 2021 तक देश को मध्यम आय वर्ग के देश में बदलने की बात करते हुए 71 वर्षीय प्रधानमंत्री कहती हैं कि वह चाहती हैं कि लोग उन्हें फिर से सत्ता में वापस लाने के लिए वोट दें, ताकि 'विकास की गति आगे बढ़ सके।' 


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बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था सालाना छह से सात फीसदी की दर से बढ़ी है, लेकिन हसीना आश्वस्त हैं कि अगले वित्त वर्ष में विकास दर आठ फीसदी से अधिक हो जाएगी। पर हसीना वहीं नहीं रुकेंगी। भारतीय पत्रकारों से बात करते हुए वह कहती हैं कि 'अगर मैं फिर से चुनी गईं, तो अगले तीन वर्षों में विकास दर को 10 फीसदी तक पहुंचाने के लिए हरसंभव प्रयास करूंगी।'

विश्व बैंक के मुताबिक, बांग्लादेश की गरीबी दर 1972 के 82 प्रतिशत से घटकर 2010 में 18.5 फीसदी, 2016 में 13.8 फीसदी और 2018 में नौ फीसदी से कम रह गई है। गरीबी में कमी की मौजूदा दर के आधार पर वहां 2021 तक अति निर्धनता उन्मूलन का अनुमान है। ऐसा करने वाला बांग्लादेश दक्षिण एशिया का पहला देश होगा। हसीना का आर्थिक मॉडल समावेशी विकास में से एक है और वह शानदार मानव विकास संकेतकों में परिलक्षित होता है। मसलन, वर्ष 2018 में इसकी महिला श्रमबल भागीदारी दर 45 फीसदी है, जबकि लड़कियों की स्कूल में नामांकन दर 98 फीसदी है, जो लड़कों के मुकाबले सात फीसदी ज्यादा है। हसीना कहती हैं कि आर्थिक विकास से सबसे ज्यादा फायदा गरीबों को होगा, खासकर ग्रामीण बांग्लादेश में।

अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध ने दुनिया के अनेक उत्पादकों को बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों की ओर जाने के लिए बाध्य किया है और हसीना इस अवसर को खोने देना नहीं चाहतीं। उन्होंने सौ विशेष आर्थिक क्षेत्र स्थापित करने की योजना बनाई है, जिनमें से 11 पहले से तैयार हैं और 79 निर्माणाधीन हैं। वहां ऊर्जा संयंत्रों की संख्या 27 से बढ़कर 121 हो गई है, जबकि बिजली की पहुंच 47 फीसदी आबादी से बढ़कर 93 फीसदी आबादी तक हो गई है।

हसीना ने दृढ़ता से चीन और भारत, पश्चिम और इस्लामी विश्व के साथ संतुलित संबंध बनाए रखा है, इस्लामी आतंकवाद को कुचला है और देश के श्रम निर्यात को सुव्यवस्थित करके विदेशों से भेजे जाने वाले धन (रेमिटेंस) की मात्रा बढ़ाई है, जो गारमेंट्स के बाद विदेशी मुद्रा का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। बांग्लादेश के विश्लेषक सुखोरंजन दासगुप्ता, जो उनके पिता और बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान को जानते थे, कहते हैं कि 'हसीना जैसी विकास के लिए प्रतिबद्ध शख्सियत दक्षिण एशिया में दूसरी नहीं है। वह अपने पिता के सोनार बांग्ला के स्वप्न को संभव बनाने के लिए कृत संकल्प हैं।' प्राइस वाटरहाउस कूपर्स का आकलन है कि अगले दो दशक में बांग्लादेश दुनिया की तीन सबसे तेज अर्थव्यवस्थाओं में से एक होगा।
 
हसीना भी चुनावी सभाओं में 'विकास और केवल विकास' की बात कर रही हैं। उनकी पार्टी के नेता मतदाताओं को चेतावनी दे रहे हैं कि अवामी लीग के हारने का मतलब है विकास का अंत और 2001-06 के अंधेरे दिनों की वापसी, जब बीएनपी-जमात-ए इस्लामी गठबंधन का शासन था और आतंकवाद व हिंसा चरम पर थी।

लेकिन हसीना जहां विकास की बात कर रही हैं, वहीं विपक्ष लोकतंत्र के अभाव की बात कर रहा है। बीएनपी एवं उसके सहयोगियों ने जनवरी, 2014 के चुनाव का बहिष्कार करते हुए चुनाव के संचालन लिए एक तटस्थ केयरटेकर की मांग की थी। जब हसीना ने उनकी मांग ठुकरा दी, तो उनके समर्थकों ने बम धमाके किए और हमला किया, जिनमें सौ लोग मारे गए।

इस बार बीएनपी ने शेख मुजीबुर रहमान के करीबी, लेकिन हसीना की विरोधी और पूर्व अवामी लीग मंत्री कमल हुसैन के नेतृत्व में बने गणमंच जैसे कई छोटे दलों के साथ हाथ मिलाया है। कमल हुसैन कहते हैं कि हसीना पिछले पांच वर्षों से एक गैर निर्वाचित सरकार चला रही हैं। देश में लोकतंत्र को बहाल करना होगा और विपक्षी दल लोगों को उनका मताधिकार वापस दिलाने के लिए एकजुट हुए हैं। लेकिन बीएनपी ने पहले ही चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली होने की योजना की शिकायत की है।

अवामी लीग के युवा नेता सुफी फारूक इस आरोप को खारिज करते हुए कहते हैं कि 'यह उनकी हताशा है, क्योंकि बीएनपी को पता है कि लोगों का मन किसकी तरफ है।' एक अमेरिकी इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट ने हाल ही में एक सर्वेक्षण किया, जिसमें हसीना को 66 फीसदी लोगों ने पसंद किया, जबकि बीएनपी अध्यक्ष और हसीना की कट्टर विरोधी खालिदा जिया को 21 फीसदी लोगों ने। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया अनाथालय के धन के गबन के दोष में जेल में हैं और उनका बेटा लंदन भागा हुआ है, जिसे हसीना पर 2004 में ग्रेनेड हमले के मामले में उम्रकैद मिली है। इस तरह बीएनपी अभी नेतृत्वविहीन है।

लेकिन सत्ता में दस साल रहने के कारण अवामी लीग पर आकांक्षाओं का बोझ बढ़ गया है। जिन लोगों को अवामी लीग का टिकट नहीं मिला, वे हसीना का विरोध कर रहे हैं। सुखोरंजन दासगुप्ता कहते हैं, 'अवामी लीग के लिए गुटबंदी एक बड़ी समस्या है तथा भ्रष्टाचार व प्रशासनिक मनमानी के आरोप ने सत्ता विरोधी रुझान को बढ़ाया है। अब देखना है कि पार्टी इससे कैसे निपटती है। वैसे भी बांग्लादेश में सिर्फ विकास को मुद्दा बनाकर चुनाव नहीं जीते जाते।'

दक्षिण एशिया में मालदीव से लेकर पाकिस्तान व नेपाल और उससे पहले श्रीलंका तक में लंबे समय से सत्तारूढ़ दिग्गज राजनेताओं को उखाड़ फेंका गया है, लेकिन हसीना को उम्मीद है कि उनके कामकाज के प्रदर्शन पर उन्हें तीसरी बार मौका मिलेगा। 

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