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भीड़ में सच्चा धर्मात्मा कौन

शिवकुमार गोयल Updated Tue, 29 Jan 2013 11:28 PM IST
who is true saint
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ईसा मसीह एक दिन कहीं जा रहे थे। उन्होंने देखा कि कुछ दूरी पर कुछ लोग शोर मचा रहे हैं। वह पास पहुंचे, तो देखा कि कुछ लोग एक युवती को घेरे खड़े हैं और क्रोध से लाल-पीले होकर उसे गालियां दे रहे हैं। ईसा ने उनके बिल्कुल पास पहुंचकर पूछा, तुम लोग इस अकेली महिला पर क्रोध क्यों कर रहे हो?



कई लोग एक साथ बोल उठे, यह युवती चरित्रहीन है। आज हम इसे पत्थरों से मार डालेंगे। इसी बीच कुछ लोगों ने पत्थर उठा लिए। यीशु ने गंभीर होकर कहा, यह बात ठीक है कि व्यभिचार पाप है। तुम लोगों का क्रोधित होना भी ठीक है, परंतु दंड देने का अधिकारी वही आदमी हो सकता है, जिसने अपने जीवन में कभी कोई अपराध नहीं किया हो। इस युवती को पहला पत्थर वह मारे, जिसने मन, वचन तथा शरीर से कभी पाप-कर्म न किया हो। तुम लोगों में यदि कोई महान धर्मात्मा हो, तो वह आगे आए।


प्रभु यीशु के वचन सुनते ही सबके चेहरे उतर गए। उनके हाथों के पत्थर नीचे गिर गए। एक-एक करके सब वहां से खिसक लिए। तब प्रभु यीशु ने युवती से कहा, बेटी, चरित्र जीवन का महत्वपूर्ण गुण होता है। तुमसे यदि कोई भूल हो गई, तो भविष्य में ऐसा न करने का संकल्प लो। जाओ, घर जाओ और अपना जीवन सदाचार में बिताओ। ईश्वर तुम्हारे अपराध क्षमा करेंगे। वह युवती प्रभु के चरणों में झुक गई।

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