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मानकों का उल्लंघन ठीक नहीं: रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को रोकने पर जोर, राज्यों में अमल जरूरी
सार
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे खास तौर पर रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को रोकने को प्राथमिकता दें। देश में जिस तरह से लागू मानकों का खुला उल्लंघन करते हुए निर्माण कार्य हो रहे हैं, उन्हें देखते हुए यह एक अहम पहल कही जा सकती है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में देशभर के नगर निकायों को आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल के मामलों में प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने कहा कि जहां नियमों का उल्लंघन पाया जाए, वहां संबंधित संपत्ति को सील किया जाए। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि जिन इलाकों में यह स्पष्ट रूप से तय नहीं है कि उनका इस्तेमाल आवासीय या व्यावसायिक किस उद्देश्य के लिए किया जाना है, उनकी भी जांच की जाए। हालांकि, फिलहाल ऐसे मामलों में कोई कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया गया है।
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सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि सभी प्राधिकरण बिना किसी भेदभाव के यह प्रक्रिया पूरी करें। यदि चुनिंदा तरीके से कार्रवाई की जाती है, तो सर्वोच्च न्यायालय इस मामले को गंभीरता से लेगा। न्यायालय ने पहले भी इमारत निर्माण से जुड़े नियमों और भूमि उपयोग संबंधी नियमों के बड़े पैमाने पर उल्लंघन पर चिंता जताई थी। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि कई जगह लागू नियमों और मानकों का खुला उल्लंघन करते हुए निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। इनमें प्रतिबंधित क्षेत्र भी शामिल हैं।
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चेन्नई में अवैध निर्माण से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने मामले का दायरा बढ़ाकर इसे पूरे देश के स्तर पर देखने का फैसला किया। न्यायालय ने कहा कि उसके सामने ऐसे कई मामले आए हैं, जहां आवासीय कालोनियों में घरों और जमीन का अनधिकृत तरीके से व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय का व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हो रही रिहायशी जगहों को सील करने का आदेश भी दिया।
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सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्देश बिल्डिंग नियम-उपनियम और जमीन-इस्तेमाल से जुड़ी पाबंदियों को लागू करने के मामले की सुनवाई के दौरान दिया। इस मामले में न्यायालय उस मुद्दे की जांच कर रहा है, जिसमें जमीन या बिल्डिंग प्लान जिस मकसद के लिए आवंटित या मंजूर किए गए थे, उसके उलट उस जगह का इस्तेमाल किया जा रहा है। न्यायालय ने अधिकारियों को ‘चुनिंदा कार्रवाई’ का तरीका अपनाने के खिलाफ भी चेतावनी दी।
जिन इलाकों का इस्तेमाल साफ तौर पर तय नहीं है (जैसे व्यावसायिक या रिहायशी), वहां मिक्स्ड यूज (मिली-जुली गतिविधि) के सवाल पर भी विचार करना पड़ सकता है। हालांकि, अभी के लिए, मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। कागजी कार्रवाई जारी रह सकती है। किसी ऐसी बिल्डिंग/जमीन/इलाके के मामले में जिस पर कोई कानूनी विवाद चल रहा हो, चाहे वह मालिकाना हक या किसी और बात को लेकर निजी व्यक्तियों के बीच हो, या सरकार और संबंधित पक्ष के बीच-अधिकारियों द्वारा उस जगह को सील करने में इस विवाद के लंबित होने से कोई रुकावट नहीं आएगी, बशर्ते उसका इस्तेमाल उस मकसद के खिलाफ हो रहा हो, जिसके लिए जमीन/बिल्डिंग आवंटित की गई थी और जिसके लिए सक्षम अधिकारी ने प्लान को मंजूरी दी थी।
किसी भी संपत्ति का इस्तेमाल आवासीय होगा अथवा व्यावसायिक या दोनों के लिए, यह फैसला स्थानीय नगर निगम या प्राधिकरण के नियमों के हिसाब से होता है। कई बार घर से कोई भी व्यवसाय शुरू करने से पहले आपको उसकी अनुमति लेनी पड़ती है। इसलिए, शुरुआत में यह समझना जरूरी है कि कौन-कौन से काम हेतु आम तौर पर घर से करने की इजाजत होती है, ताकि आगे कोई परेशानी न हो।
सवाल यह है कि आखिर भारत में आवासीय संपत्ति में किन व्यावसायिक गतिविधियों को मंजूरी मिलती है। हाउसिंग सोसाइटी के नियम भी यह तय करते हैं कि घर को व्यावसायिक काम के लिए कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए, आम तौर पर संपत्ति स्वामी को पहले रहवासी समितियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना पड़ता है। कुछ मामलों में स्थानीय नियमों और संपत्ति के प्रकार के हिसाब से घर के सिर्फ एक हिस्से में ही व्यावसायिक गतिविधियों को मंजूरी मिलती है। आवासीय संपत्ति में जिन पेशेवर सेवाओं की मंजूरी होती है, उनमें व्यावसायिक सलाह जैसे डॉक्टर (क्लीनिक), वकील, चार्टेड अकाउंटेंट और आर्किटेक्ट जैसी सेवाओं को चलाने की अनुमति होती है, क्योंकि इनमें ज्यादा भीड़-भाड़ नहीं होती और ये छोटे स्तर पर चलती हैं।
साथ ही, शैक्षणिक गतिविधियां भी इनमें शामिल हैं। छोटे स्तर पर घर से चलने वाली गतिविधियां जैसे ट्यूशन क्लास, योग, डांस या पेंटिंग क्लास की भी आम तौर पर अनुमति होती है, बस ध्यान रहे कि इससे आसपास के लोगों को कोई परेशानी या किसी तरह का शोर-शराबा न हो। ऐसे काम, जिनसे ज्यादा भीड़-भाड़ या परेशानी नहीं होती है, जैसे फ्रीलांसिंग, घर से ऑफिस चलाना, ऑनलाइन बिजनेस (जहां ग्राहक सीधे न आने हों) और छोटी कपड़ों की बुटीक भी इनमें शामिल है। लेकिन, तय नियमों का पालन करना जरूरी होता है। क्लाउड किचन या घर से चलने वाला फूड डिलीवरी का काम भी किया जा सकता है, बस इसके लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के नियमों का पालन करना जरूरी होता है।
ज्यादातर राज्यों में ऐसे काम करने की अनुमति घर के सिर्फ एक हिस्से तक ही होती है, आम तौर पर कुल बने हुए क्षेत्रफल के करीब 25 से 50 प्रतिशत तक के हिस्से में ऐसी गतिविधियां चलाई जा सकती हैं। दूसरी तरफ, घर में फैक्टरी या उत्पादन इकाई चलाने की मंजूरी नहीं होती। इसके लिए पहले भूमि उपयोग में परिवर्तन की मंजूरी लेनी पड़ती है और अनुमति मिलने के बाद उस संपत्ति को कानूनी और टैक्स के हिसाब से व्यावसायिक माना जाता है।
ज्वलनशील (जल्दी आग पकड़ने वाली), जहरीली या प्रदूषण फैलाने वाली चीजों को संग्रहित करना, बेचना या इस्तेमाल करना मना होता है, क्योंकि इससे सुरक्षा और पर्यावरण, दोनों को खतरा होता है। कुछ व्यापार जैसे शराब की दुकान, बैंक्वेट हॉल और गाड़ियों की मरम्मत वर्कशॉप को आम तौर पर आवासीय क्षेत्रों में चलाने की अनुमति नहीं होती, क्योंकि इनके काम की वजह से आसपास के लोगों पर असर पड़ता है।