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वायु प्रदूषण का जिम्मेदार कौन

Thu, 08 Nov 2018 05:35 PM IST
सुभाष चंद्र कुशवाहा
सुभाष चंद्र कुशवाहा Updated Thu, 08 Nov 2018 05:35 PM IST
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Who is responsible for air pollution
सुभाष चंद्र कुशवाहा

पटाखे चलाने पर सर्वोच्च न्यायालय की सशर्त रोक के बावजूद दीपावली की रात लोगों ने जमकर पटाखे चलाए और अगली सुबह दिल्ली की कुछ जगहों पर एयर क्वालिटी इंडेक्स 999 पर पहुंच गया। यही हाल कमोबेश देश के दूसरे इलाकों में भी रहा। अदालत के आदेश की अवमानना करते हुए लोग पर्यावरण के साथ खिलवाड़ करने में लगे हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरणीय कार्यक्रम (यूएनईपी) के मुताबिक, भारत में वायु प्रदूषण का 22 से 52 प्रतिशत हिस्सा घरेलू है। यूएनईपी ने खाना पकाने और धूल उड़ने आदि को प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि घरेलू प्रदूषण में स्थायी हानिकारक तत्व कितने हैं और औद्योगिकीकरण के नाम पर दुनिया भर में जो रसायनों, वाहनों के धुएं और फैक्टरियों के कचरे को लगातार फैलाया गया है, इनकी तुलना में घरेलू कारक कौन-से हानिकारक प्रदूषण पैदा कर रहे हैं?


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अपने यहां पर्यावरण के मोर्चे पर व्याप्त उदासीनता की अनदेखी नहीं की जा सकती, पर यह भी विडंबना ही है कि हानिकारक हथियारों की होड़ पैदा करने वाली महाशक्तियों ने संहारक बमों और बारूदों का इस्तेमाल करके पर्यावरण को जितना नुकसान किया, उसकी चर्चा नहीं हुई। जीवन के लिए जरूरी हवा, पानी और वायु को जहरीला बनाने में बहुराष्ट्रीय कंपनियों का कितना हाथ है, इस पर कोई अध्ययन नहीं होता। घरेलू धुएं की तुलना में कीटनाशकों और रसायनों ने वायुमंडल को ज्यादा जहरीला बनाया है। तीसरी दुनियों में कीड़ों और बीमारियों को पैदा करने और उनको मारने के लिए कीटनाशकों का उत्पादन करने का खेल बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने किया है। पहले फसलों में लगने वाले कीड़े-मकोड़े या बीमारियों को राख और नीम के पानी से दूर किया जाता था। अब जो हाइब्रिड बीज बेचे जा रहे हैं, उनमें लगने वाली बीमारियों और कीड़ों को मारने की दवा वही कंपनियां बना रही हैं, जो उन बीजों को बाजार में उतार रही हैं। कीटनाशकों ने खाद्यान्न और सब्जियों को जहरीला बना दिया है। कैंसर की बढ़ती बीमारी इसी का परिणाम है।
 
बेशक पिछले वर्ष भी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सख्त रुख अपनाया था। उसने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और राजस्थान में खेतों में फसल कटाई के बाद छूट गए अवशेष यानी पराली जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया था, पर उससे स्थिति में सुधार नहीं हुआ। अगर डंठलों को उपयोगी बनाने के लिए किसानों को सुविधा और प्रशिक्षण दे दिया जाए, तो यह समस्या दूर हो सकती है। जबकि रसायनों और कीटनाशकों के तत्व हमारे पर्यावरण को हमेशा के लिए विषैला बना देते हैं। अब तो भूमिगत जल में भी कीटनाशकों के तत्व पाए जाने लगे हैं।
 
औद्योगिकीकरण ने अपने अवशेषों से पानी और हवा को नुकसान पहुंचाया है। वाहन प्रदूषण दूर करने के लिए बेशक मानक लगातार कठोर किए जा रहे हैं, पर शहरी जीवन पर आज भी वाहन प्रदूषण का असर ही सबसे हानिकारक हो रहा है। वायु प्रदूषण रोकने के लिए महाशक्तियों को बारूद से धन कमाने की मनोवृत्ति त्यागनी होगी। लकड़ी, पुआल और सूखे पत्ते जैविक अवशेष हैं, जिन्हें जलाने से कार्बन मोनोक्साइड को छोड़कर अन्य कोई हानिकारक तत्व पैदा नहीं होता। इसके अलावा उसका विघटन होता है और वह जीवन चक्र में प्रयुक्त हो जाती है। इसलिए वायु प्रदूषण को रोकने के लिए जरूरी है कि मानव जीवन में जहर घोलने वाले उत्पादों को रोका जाए।

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