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राहत की सांस कौन लेता है
मनु पंवार
Updated Tue, 12 Nov 2013 07:47 PM IST
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पापा, राहत की सांस कैसे लेते हैं? टेलीविजन पर खबरें देखते-देखते अचानक बेटे ने कौतूहलवश प्रश्न दाग दिया।
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बेटा, जब आदमी इत्मीनान से लंबी सांस छोड़ता है, तो उसे राहत की सांस लेना कहते हैं। पिता ने सरल शब्दों में बेटे को समझाने की कोशिश की।
लेकिन सांस तो सभी लेते और छोड़ते हैं। फिर उसे राहत की सांस लेना क्यों नहीं कहते? बेटे ने प्रश्न उछालकर पिता को चौंका दिया।
बेटा, यह हर एक को नसीब नहीं होती। राजनीति और नौकरशाही में राहत की सांस लेने का चलन ज्यादा है। नेताओं को इसमें ज्यादा निपुणता हासिल है। इसे इस तरह समझो कि चुनाव में जब किसी नेता का टिकट कटते-कटते बच जाता है या किसी मुकदमे में जब किसी नेता या अफसर के आजू-बाजू वालों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हो जाता है और खुद उस पर आंच तक नहीं आती, तब उस नेता या अफसर द्वारा ली गई सांस को राहत की सांस लेना कहते हैं। पिता ने संदर्भ सहित व्याख्या दी।
लेकिन आज तो बेटा सदन में प्रतिपक्ष के नेता की तरह मुखर था। ऐसे में, स्वाभाविक था कि उसके पास प्रश्नों की लंबी खेप थी। इसलिए उसने दोबारा सवाल दागा, लेकिन पापा, राहत की सांस सिर्फ राजनीति में ही क्यों ली जाती है?
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बेटा, ऐसा इसलिए कि आम जनता तक तो राहत ही ठीक से नहीं पहुंच पाती, तो बेचारी राहत की सांस कैसे लेगी? बेटा, राहत की सांस के लिए राहत बहुत जरूरी है। इसीलिए तो राहत की सांस लेना भी एक हुनर है, जो प्राय: नेताओं में पाया जाता है। पिता ने समझाया।
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लेकिन पापा, आपदा में घिरी जनता के लिए तो राहत के ट्रक के ट्रक भेजे गए थे। फिर भी जनता ने राहत की सांस क्यों नहीं ली? टीवी देखते बच्चे ने फिर प्रतिप्रश्न किया।
बेटा, इस तरह की आपदाओं में अक्सर होता यह है कि नेता और अफसर मिलकर राहत का माल डकार जाते हैं। चूंकि उन्हें राहत की सांस लेनी होती है, इसलिए राहत का माल हड़पना वह अपना सांविधानिक अधिकार समझते हैं। इसीलिए जनता के हिस्से में राहत की सांस नहीं आ पाती।
पिता की यह बात बच्चे की समझ में आ गई है। राहत की सांस केवल वही ले सकते हैं, जो राहत का माल डकार जाते हैं। बच्चे में अब अपने प्रश्न का उत्तर पा लेने का संतुष्टि भाव था। यह देखकर पिता ने भी आखिरकार राहत की सांस ली है।