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Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Who demand an account of the good days

अच्छे दिनों का हिसाब मांगने वाले

Thu, 03 Sep 2015 08:09 PM IST
राजेंद्र शर्मा
राजेंद्र शर्मा Updated Thu, 03 Sep 2015 08:09 PM IST
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Who demand an account of the good days

हम तो पहले ही कह रहे थे कि इसमें जरूर कुछ न कुछ लोचा है। वर्ना खाकी पार्टी वाले इतने अनाड़ी थोड़े ही हैं कि पब्लिक से अच्छे दिन लाने टाइप के वायदे करेंगे! इंडिया शाइनिंग का जला सुराज वगैरह के भी वायदे फूंक-फूंककर करता है। उन्हें सरकार चलाने का अनुभव है। इसलिए बखूबी पता था उन्हें कि भला पब्लिक से भी कोई अच्छे दिन लाने के वायदे करता है? वैसे में तो निठल्ली पब्लिक कैलेंडर की तारीखें दिखा-दिखाकर ही पागल कर देगी कि अब तक अच्छे दिन क्यों नहीं आए! वैसे में सरकार की क्या हालत होती! अब पता चल रहा है कि उन बेचारों ने तो अपने मुंह से कभी कहा ही नहीं था कि अच्छे दिन आएंगे। जब आने का भरोसा ही नहीं दिया, तो लाने का वायदा करने का सवाल ही कहां उठता है!

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पर अच्छे दिन लाने का वायदा किए बिना ही बेचारों से घड़ी-घड़ी अच्छे दिनों का हिसाब मांगा जा रहा है। हमें तो जरूर यह विरोधियों के षड्यंत्र का मामला लगता है। यह सघन जांच का विषय है कि यह अफवाह फैलाई किसने कि वे अच्छे दिन लाएंगे। ऐसी अफवाह फैलाने वालों को ऐसी कड़ी सजा दी जानी चाहिए, जिसे देखकर दूसरे सबक लें।
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खैर! सरकार का काम सरकार जाने, हम तो नरेंद्र तोमर जी का शुक्रिया अदा करना चाहते हैं। मंत्री होते हुए सारी व्यस्तताओं के बीच भी उन्होंने इस अफवाह का खंडन करने के लिए समय निकाल लिया कि उन लोगों ने कभी अपने मुंह से अच्छे दिन लाने का वायदा नहीं किया था! उल्टे यह राजनीतिक विरोधियों की फैलाई हुई अफवाह थी।
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खैर! देर आयद-दुरुस्त आयद। अब भी बहुत ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। पब्लिक को शुक्र मनाना चाहिए कि चौदह महीने में ही पता चल गया। अच्छे दिनों का अब और इंतजार करने की जरूरत नहीं है। अच्छे दिन आ गए, तो ठीक, अगर नहीं आए, तो सरकार पर दबाव बनाने का कोई मतलब ही नहीं बनता। इस तरह तो चुनौतियों के बीच सरकार की छवि खराब करने की पूरी साजिश थी। शुक्र है, समय रहते पता चल गया। नहीं तो बहुत किरकिरी होती।

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