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ओमान में टैंकरों में हुए धमाकों का राज क्या है

Sun, 16 Jun 2019 02:02 AM IST
Avdhesh Kumar डेविड डी किर्कपैट्रिक
डेविड डी किर्कपैट्रिक Published by: Avdhesh Kumar Updated Sun, 16 Jun 2019 02:02 AM IST
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What is the secret of the bomb blasts in Oman   
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ओमान की खाड़ी में बृहस्पतिवार को दो व्यावसायिक टैंकरों में हुए रहस्यमय धमाकों के बाद जहां तेल की कीमतें बढ सकती हैं, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी जारी की है, तो संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने शांति बनाए रखने की अपील की है।

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ओमान की खाड़ी में बृहस्पतिवार को दो व्यावसायिक टैंकरों में हुए रहस्यमय धमाकों के बाद जहां तेल की कीमतें बढ सकती हैं, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी जारी की है, तो संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने शांति बनाए रखने की अपील की है।

हालांकि दोनों जहाजों को बिना किसी गंभीर नुकसान के खाली करवा लिया गया, लेकिन इस घटना ने क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी ताकतों के बीच सैन्य विवाद बढ़ने का अंदेशा पैदा कर दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने इसके लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है, जिससे वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव तीन दशक में अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंच चुका है। वहीं ईरान का कहना है कि उसे फंसाया जा रहा है। क्या दो जहाजों पर हुए ये धमाके दुनिया को किसी खतरनाक मोड़ पर ले आए हैं? जरा इस पर गौर करते हैं।

ये धमाके, जिन्हें अमेरिका ईरान द्वारा जानबूझकर किया गया हमला बता रहा है, वैश्विक अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण धमनियों को अवरुद्ध कर सकता है। ओमान की खाड़ी फारस की खाड़ी में होर्मुज के 21-मील-चौड़े जलडमरूमध्य से गुजरती है, और दुनिया के कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग एक तिहाई और प्राकृतिक गैस का लगभग पांचवां हिस्सा इसके पानी से गुजरता है।

एशिया की ओर जा रहे दोनों जहाजों का अमेरिका से कोई संबंध नहीं था। लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के बाद से वाशिंगटन फारस की खाड़ी से पेट्रोलियम का सुरक्षित निर्यात सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताता आया है। और 1990-91 में पहले खाड़ी युद्ध के बाद से अमेरिका ने इस क्षेत्र में सैन्य जमावड़े के जरिये अपनी इस प्रतिबद्धता को मजबूत किया है। इसलिए होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने या तेल के प्रवाह को रोकने के प्रयास से अमेरिकी हितों के लिए गंभीर खतरा पैदा होगा, भले ही इसमें कोई भी अमेरिकी जहाज शामिल न हो।

इसके अलावा ट्रंप ने ईरान से टकराव को प्राथमिकता में रखा है, जो कि इस्राइल और अरब की खाड़ी के देशों की शिकायतों के अनुरूप ही है कि तेहरान इस क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करना चाहता है। ट्रंप ने पिछले वर्ष अमेरिका को 2015 में हुए उस समझौते से अलग कर लिया जिसमें ईरान को परमाणु कार्यक्रम में कटौती के एवज में आर्थिक लाभ देने का वादा किया गया था। 
 
 

उन्होंने न केवल पुराने प्रतिबंध बहाल कर दिए हैं, बल्कि कुछ नए प्रतिबंध भी लाद दिए हैं, जिससे ईरान की दुनिया में कहीं भी तेल निर्यात करने की क्षमता ध्वस्त हो जाए। उन्होंने ईरान की सेना का हिस्सा रिवोल्यूशनरी गॉर्ड को आतंकी गुट करार दिया है और धमकी दी है कि यदि ईरान अमेरिका से लड़ाई करता है तो वह बर्बादी लाने वाला बदला लेंगे। ट्रंप ट्वीटर पर ईरान के आधिकारिक रूप से खात्मे की बात लिख ही चुके हैं।

ट्रंप प्रशासन के अधिकारी क्षेत्र के आसपास 'ईरान नीति' में बार-बार बदलाव की मांग करते हैं, जहां तेहरान ने इराक, लेबनान, सीरिया, गाजा और यमन में सहयोगी लड़ाकों के बीच अपना प्रभाव बढ़ाया है। आलोचक ईरान पर यह भी आरोप लगाते हैं कि वह बहरीन में सरकार विरोधियों का समर्थन कर रहा है। कोई और समय होता तो ट्रंप ऐसी मांगों पर नरम रुख अपनाते। लेकिन प्रशासन इस बार ऐसी मांगों को इनकार करने में कठिनाई महसूस कर रहा है। 

बृहस्पतिवार को ही पेंटागन ने एक वीडियो जारी किया, जिसके बारे में अधिकारियों का कहना है कि इसमें ईरानी नौसैनिक एक जहाज से बिना उपयोग किया गया विस्फोटक हटा रहे हैं, जिससे लगता है कि ईरान ने ही उसे वहां लगाया था और अब वह सबूत मिटाने का प्रयास कर रहा है। ईरान का कहना है कि यह सबूत जानबूझकर वहां प्लांट किया गया है। आखिर वह ऐसे हमला क्यों करेगा?

अनेक विशेषज्ञ ट्रंप प्रशासन के ईरान को जिम्मेदार ठहराने के दावे पर सवाल कर रहे हैं। इसके बावजूद अधिकारियों में यह सहमति उभरी है कि पिछले महीने संयुक्त अरब अमीरात के पोर्ट ऑफ फुजैरा में इसी जलमार्ग पर चार टैंकरों पर ईरान ने ही हमला किया था, हालांकि इससे बहुत नुकसान नहीं हुआ।

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान झांसा देकर प्रत्यक्ष सैन्य टकराव से बचते हुए वाशिंगटन को नुकसान पहुंचाने के रास्ते तलाश सकता है। खाड़ी में टैंकरों को नुकसान होने से तेल के दाम बढ़ेंगे, जिससे अमेरिका दंडित होगा और इससे ईरान को लाभ होगा क्योंकि तब वह तेल बेचकर अपना राजस्व बढ़ा सकता है।  

अमेरिका के पूर्व अधिकारियों का कहना है कि ईरान अक्सर अमेरिका पर अप्रत्यक्ष हमला कर दंडित होने से बच निकलता है। उदारण के लिए 2003 के हमले के बाद जब अमेरिका ने ईराक पर कब्जा किया था, उस समय वाशिंगटन को पता था कि ईरान शिया लड़ाकों को प्रशिक्षित कर रहा है और हथियार मुहैया करा रहा है, जिन्होंने अमेरिकी बलों पर हमला किया, जिसमें कई अमेरिकी जवान मारे गए। उस समय ईरान यही कहता रहा कि लड़ाके अपने से लड़ाई कर रहे हैं और इस तरह वह प्रत्यक्ष टकराव से बच गया।

© The New York Times 2019
 
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