फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   welfare on power of worship

आराधना के बल पर कल्याण

Mon, 03 Jun 2013 03:35 PM IST
शिवकुमार गोयल
शिवकुमार गोयल Updated Mon, 03 Jun 2013 03:35 PM IST
विज्ञापन
welfare on power of worship

सुरथ धर्मपरायण तथा दानशील राजा थे। अधर्मी उनकी धर्मपरायणता से चिढ़ते थे। एक बार अधर्मियों ने युद्ध में उन्हें पराजित कर दिया।

विज्ञापन


सुरथ वन में मुनि सुमेधा के आश्रम में पहुंच गए। राजा ने उन्हें अपनी कहानी सुनाई। मुनि ने उन्हें धैर्य रखने का सुझाव देते हुए कहा, वन में रहकर अच्छा समय आने की प्रतीक्षा करो। देवी की आराधना के बल पर तुम्हारा कल्याण होगा।
विज्ञापन


उन्हीं दिनों समाधि नामक परम धर्मात्मा और संतोषी वैश्य अपने दुर्व्यसनी पुत्र से प्रताड़ित होकर वन में आया। राजा सुरथ से उसकी भेंट हो गई। संकटग्रस्त होने के कारण दोनों मित्र बन गए।
विज्ञापन
विज्ञापन


सुमेधा मुनि द्वारा बताई गई विधि के अनुसार दोनों जगदंबा देवी की उपासना में लग गए। सुरथ और समाधि ने निर्णय लिया कि यदि देवी प्रसन्न नहीं हुईं, तो वे अग्निकुंड में अपना शरीर अर्पित कर देंगे।

जैसे ही वे शरीर की आहुति देने को उद्धत हुए कि देवी ने प्रकट होकर कहा, शरीर बड़े भाग्य से सत्कर्मों के लिए मिलता है। इसे इस तरह नष्ट नहीं करना चाहिए।

देवी ने प्रसन्न होकर राजा सुरथ को पुनः राजा बनने का वरदान दिया, फिर देवी ने समाधि को भी वर मांगने को कहा। समाधि ने हाथ जोड़कर कहा, अब मुझे न घर लौटने की इच्छा है, न धन की। मुझे मोक्ष देने वाला दिव्य ज्ञान प्रदान करें।

देवी ने कहा, तुम वास्तव में संसार की असारता को जान गए हो। तुम्हें ज्ञान प्राप्त हो चुका है। और देखते-देखते देवी अंतर्ध्यान हो गईं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed