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अप्रैल में बूंदें: क्या यह महज संयोग है या किसी बड़े संकट की ओर इशारा?

Fri, 10 Apr 2026 06:54 AM IST
Nitin Gautam अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Nitin Gautam Updated Fri, 10 Apr 2026 06:54 AM IST
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सार
अमूमन सर्दियों में सक्रिय होने वाले पश्चिमी विक्षोभ अगर वसंत और गर्मी के शुरुआती महीनों में भी लगातार सक्रिय दिख रहे हैं, तो सवाल उठता है कि क्या यह महज संयोग है या किसी बड़े संकट की ओर इशारा?
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weather system rain in april global warming impact
अप्रैल में बारिश - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर भारत में अप्रैल का महीना आमतौर पर गर्मी की दस्तक का संकेत होता है, जब गर्म हवाओं का सिलसिला शुरू होने लगता है और लोग अगले कुछ महीनों की प्रचंड गर्मी को बर्दाश्त करने की ताकत जुटा रहे होते हैं, लेकिन इस वर्ष तस्वीर कुछ अलग है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में पिछले कुछ दिनों से ठंडी हवाएं, लगातार बारिश, ओलावृष्टि और तेज आंधियां मौसम के पारंपरिक चक्र को चुनौती दे रही हैं।


बुधवार का दिन तो देश की राजधानी में पिछले 11 वर्षों में अप्रैल का सबसे ठंडा दिन रहा। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ की एक के बाद एक शृंखला ने इस पूरे क्षेत्र को प्रभावित किया है। समस्या सिर्फ इतनी ही नहीं है। राजस्थान के ऊपर बन रही चक्रवातीय स्थितियां अरब सागर की गर्म व नमी वाली हवाओं को खींच रही हैं। जब पश्चिमी विक्षोभ इन हवाओं से टकराता है, तो तापमान में गिरावट और बारिश के हालात पैदा होने लगते हैं। उल्लेखनीय है कि मार्च में भी कई पश्चिमी विक्षोभ आए थे और आने वाले दिनों के लिए भी मौसम विभाग चेतावनी जारी कर चुका है। जाहिर है कि यह मौसमी असंतुलन अभी कुछ दिन और अपना असर दिखा सकता है।


आम धारणा यह है कि ग्लोबल वार्मिंग का अर्थ केवल तापमान में वृद्धि होना है, लेकिन यह मौसम के चरम और अनिश्चित स्वरूप को भी बढ़ावा देता है। असामान्य गर्मी हो या फिर असामान्य सर्दी, दोनों ही इसी असंतुलन के परिणाम हैं। इससे फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन पर भी असर पड़ता है। पंजाब के कृषि विभाग के अनुसार, बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं के कारण 1.25 लाख एकड़ से अधिक की फसलें बर्बाद हो गई हैं और कई जिलों में तो कटाई के लिए तैयार गेहूं की फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए ये अप्रत्याशित मौसमी बदलाव स्वास्थ्य से जुड़े संकट भी पैदा कर रहे हैं।

महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव जैसी वैश्विक चिंताओं से पहले से ही घिरे लोगों के मन में मौसम के ये तेवर अनिश्चितता की एक और परत जोड़ रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि अप्रैल के इस मौसम को एक अस्थायी विचलन के रूप में नहीं, बल्कि चेतावनी के रूप में लिया जाए।
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