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शुक्र ग्रह: कोई खास जीव उस शाम के इंतजार में… ग्रह का तापमान 400 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक, जीवन लगभग असंभव
Sun, 22 Sep 2024 05:54 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
ल्यूक स्टेलर, यूएनएसडब्ल्यू सिडनी विश्वविद्यालय
ल्यूक स्टेलर, यूएनएसडब्ल्यू सिडनी विश्वविद्यालय
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Sun, 22 Sep 2024 05:54 AM IST
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विस्तार
शुक्र ग्रह पर शाम बिताने की चाह रखने वालों को तब रोमांच हुआ, जब करीब चार वर्ष पहले वहां के वायुमंडल में फॉस्फीन की खोज हुई। पृथ्वी के वायुमंडल में ज्यादातर फॉस्फीन सूक्ष्मजीवों द्वारा उत्पादित होती है। अब शुक्र पर यह फॉस्फीन कहां से आई, इसका जवाब तो शोधकर्ताओं के पास भी नहीं था। लेकिन अगर शुक्र ग्रह पर फॉस्फीन है, तो इसका मतलब वहां जीवन किसी न किसी रूप में अवश्य होगा।
दरअसल, किसी भी ग्रह पर जीवन की उत्पत्ति के लिए जो रासायनिक प्रतिक्रियाएं जरूरी होती हैं, वे तरल जल के बगैर संभव ही नहीं हैं। जीवन खुद में एक अविश्वसनीय रूप से जटिल घटना है, इसलिए इसके लिए एक जटिल वातावरण की जरूरत होगी। जीवन को पनपने के लिए बड़ी मात्रा में जटिल कार्बनिक अणुओं की भी जरूरत होती है, लेकिन अगर ग्रह का तापमान 122 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा है, तो ज्यादातर कार्बनिक अणु नष्ट हो जाते हैं। शुक्र ग्रह का तापमान 400 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा है। जाहिर है कि वहां कार्बन आधारित जीवन तो असंभव ही है। हालांकि, शुक्र के ऊपरी वायुमंडल का तापमान इतना कम है कि पानी की बूंदंे बन सकती हैं, और इस प्रकार यह जीवन की शुरुआत के लिए उपयुक्त हो सकता है। लेकिन इसमें भी समस्या है। शुक्र पर मंडराने वाले सल्फ्यूरिक अम्ल के बादल किसी कार्बनिक अणु को किसी भी हालत में पनपने नहीं देंगे। इसके अलावा, शुक्र के वायुमंडल में कोई भी सतह या खनिज कण नहीं हैं, जिस पर कार्बनिक अणु इकट्ठे हो सकें।
इसके बावजूद अगर शुक्र पर फॉस्फीन मौजूद है, तो यह वाकई एक रहस्य है। मुमकिन है कि ग्रह की सतह पर जीवन उस समय उत्पन्न हुआ होगा, जब वहां की सतह पृथ्वी से मिलती-जुलती थी। वहां झीलें भी थीं और महासागर भी। लेकिन ग्रीन हाउस प्रभाव ने इस ग्रह को नरक में बदल दिया। या फिर यह भी हो सकता है कि पृथ्वी से कोई उल्का पिंड टकराया हो और यहां की चट्टान से टूटकर कोई टुकड़ा शुक्र ग्रह पर चला गया हो। इस टुकड़े में मौजूद सूक्ष्मजीव शुक्र के अम्लीय वातावरण के अनुकूल हो गया हो। तीसरी संभावना यह है कि शुक्र पर कोई खास जीव पैदा हो गया हो, जो आज भी वहां जीवित हो और इंतजार कर रहा हो कि कोई उसके साथ एक शाम बिताने वहां आए।
साथ में मार्टिन वान क्रैनेंडोंक
(कन्वर्सेशन से)