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इमरान की नाकामी के दो साल

Tue, 25 Aug 2020 04:19 AM IST
kuldeep talwar कुलदीप तलवार
Updated Tue, 25 Aug 2020 04:19 AM IST
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Two Years Of Pakistan Prime Minister Imran Khans Failure
शीरीन मजारी-इमरान खान (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के तौर पर इमरान खान को दो साल पूरे हो गए हैं। उन्होंने 18 अगस्त, 2018 को प्रधानमंत्री का पद संभाला था। सेना को उम्मीद थी कि इमरान खान देश के बदतर हालात को संभाल लेंगे। पर ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने वायदा तो बहुत किया, पर वह कुछ खास करने में सफल नहीं हुए। महंगाई बढ़ती गई।


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देश की आर्थिक हालत कर्ज के बोझ से खराब होती गई। आतंकवाद को पनाह देने के कारण पाकिस्तान लंबे समय से एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में है। शासन चलाने का अनुभव न होने में इमरान की मुश्किलें बढ़ती गईं और उनकी सरकार कोई साहसिक कदम नहीं उठा सकी। उनकी पार्टी में मतभेद भी सामने आने लगे। नतीजतन उन्होंने व उनके मंत्रियों ने कुछ ऐसे आक्रामक बयान दिए व ऐसी लुभावनी घोषणाएं कीं, जिनसे हालत सुधरने के बजाय और बिगड़ गई।

पाकिस्तान ने अपने मददगार सऊदी अरब से संबंध खराब कर लिए हैं। मोदी सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर देने के बाद से ही इमरान सरकार इस मुद्दे पर ओआईसी का समर्थन पाने की कोशिश कर रही है। लेकिन उसे समर्थन नहीं मिल पाया, जिसकी बड़ी वजह पाकिस्तान और तुर्की के बीच बढ़ती निकटता है, जो सऊदी अरब किसी भी सूरत में नहीं चाहता।

सऊदी अरब की नाराजगी दूर करने के लिए पाक सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा और आईएसआई प्रमुख को रियाद जाना पड़ा। पर वहां क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने उनसे मिलने से इन्कार कर दिया। यही नहीं, रियाद ने बाजवा के सम्मान में होने वाला कार्यक्रम भी रद्द कर दिया। इमरान खान पिछले कुछ अरसे से कश्मीर मुद्दे पर काफी बौखलाहट में हैं।

उन्होंने चंद दिन पहले भारतीय समाचार पत्र में छपी एक खबर के हवाले से कहा कि 34 प्रतिशत भारतीय बगैर सरकारी मदद के एक सप्ताह से ज्यादा जिंदा नहीं रह सकेंगे। इसलिए वह भारत की मदद करना चाहते हैं। इमरान को याद रखना चाहिए कि मोदी सरकार ने कोविड-19 से निपटने के लिए जो वित्तीय पैकेज घोषित किया है, वह पाकिस्तान की जीडीपी से ज्यादा है।

सैन्य अधिष्ठान की नजर में खुद को महिमामंडित करने के लिए इमरान खान ने कुछ दिन पहले संसद में बड़े गर्व से ओसामा-बिन-लादेन को शहीद करार दिया और कहा कि हमने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका का साथ दिया, लेकिन अमेरिकियों  ने यहां आकर लादेन को मार दिया। जबकि खुद पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ जंग में 70,000 लोगों को गंवा चुका है।

इमरान खान ने यह बयान ऐसे समय में दिया, जब पहले ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान द्वारा कोई कदम न उठाने का आरोप लग रहा है। संसद में इस बयान की पाक मुस्लिम लीग (नवाज) के वरिष्ठ नेता ख्वाजा आसिफ ने जमकर निंदा की और कहा कि दहशतगर्दी को पाक की धरती पर लाने वाला ओसामा-बिन-लादेन एक दहशतगर्द था।

पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी की तरफ से एक बयान जारी करके इमरान को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा करार दिया गया। इमरान के इस बयान की विश्व बिरादरी ने, खास तौर पर अमेरिका व नाटो देशों ने केवल निंदा ही नहीं की, बल्कि इसने अमेरिका से पाकिस्तान के संबंधों में पहले से जारी कटुता और बढ़ा दी।

पाकिस्तान की जनता व मीडिया का मानना है कि इमरान खान कोरोना को ठीक से नियंत्रित नहीं कर पाए, बल्कि उल्टे इसके लिए वह जनता को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इमरान सरकार इस दौरान तीन स्वास्थ्य मंत्री बदल चुकी है, पर हालात नहीं सुधरे।

इसके अलावा बिखरती अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई और बेतहाशा बढ़ते अपराध से भी इमरान सरकार की छवि धूमिल हुई है। उनको सेना से मिला सहयोग भी कमजोर होता जा रहा है। अंत में यही कहा जा सकता है कि इमरान सरकार हर मोर्चे पर नाकाम रही है। उससे जनता और सेना, दोनों ही नाखुश हैं।

भारत के साथ उसके रिश्ते तो पहले से ही खराब चल रहे हैं, अब अमेरिका व दूसरे कई देश भी पाकिस्तान से नाराज हैं। ऐसे में, आने वाला समय पाकिस्तान के लिए और भी संकट भरा रह सकता है। इस मुश्किल घड़ी में पाकिस्तान को अब केवल चीन से ही मदद की उम्मीद है।

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